चे ग्वेरा कैसे बने सबसे मशहूर क्रांतिकारी चेहरा? आज भी उन पर दो हिस्सों में क्यों बंटी हुई है दुनिया?

क्या आप चे ग्वेरा को जानते हैं? नाम तो सुना ही होगा. और ना भी सुना हो तो चेहरे पर बेतरतीब बढ़ी दाढ़ी और हाथों में सिगार लिए हुए शख्स का चेहरा तो देखा ही होगा. स्टार बनी हुई खास गोल कैप और शरीर पर फौजी वर्दी वाला यह इंसान ही चे ग्वेरा है. यह दुनिया का सबसे मशहूर क्रांतिकारी चेहरा है. चे बीसवीं सदी का सबसे प्रभावशाली चेहरा है, जो उतना ही फेमस है जितना विवादित है. अर्जेंटीना के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले चे ग्वेरा ने सबसे मजबूत और साम्राज्यवादी देश अमेरिका की नाक में दम कर दिया था. उन्हें पसंद करने वाले क्रांतिकारी, आजादी और समानता का मसीहा मानते हैं, जबकि विरोधी उन्हें हिंसक तानाशाह मानते हैं. चे आखिर पॉप कल्चर से लेकर टी-शर्ट्स तक कैसे लोकप्रिय हो गए?
अर्नोस्टो चे ग्वेरा का जन्म 14 जून 1928 को अर्जेंटीना के रोसारियो में हुआ था. आज 9 अक्टूबर 1967 के दिन ही उन्होंने अंतिम सांस ली. पेशे से वे एक डॉक्टर थे. जवानी के दिनों में उन्होंने अपनी मोटरबाइक पर पूरे लैटिन अमेरिका की यात्रा की. इस यात्रा के दौरान उन्होंने वहां के गरीबों, शोषितों, किसानों और मजदूरों की दयनीय स्थिति, भुखमरी देखी. अमेरिकी कंपनियों और स्थानीय तानाशाहों की तरफ से किए जा रहे शोषण को अपनी आंखों से देखा. इस यात्रा ने उनके अंदर की वैचारिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया और वे मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़ गए.
1955 में मेक्सिको में उनकी मुलाकात फिदेल कास्त्रो से हुई. यहां से वे क्यूबा के की क्रांति के चेहरा बन गए. दोनों ने मिलकर क्यूबा के क्रूर तानाशाह फुलजेंसियो बतिस्ता की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए 26 जुलाई मूवमेंट की शुरुआत की. चे ग्वेरा ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति का बेहतरीन इस्तेमाल किया. उनके नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने सांता क्लारा की ऐतिहासिक लड़ाई जीती, जिसके बाद 1959 में बतिस्ता को देश छोड़कर भागना पड़ा और क्यूबा में फिदेल कास्त्रो की सरकार बनी.
क्रांति के बाद चे ग्वेरा छा गए. उनको क्यूबा के नेशनल बैंक का अध्यक्ष और इंडस्ट्रियल मंत्री बनाया गया. उन्होंने देश से निरक्षरता को खत्म करने के कैम्पेन और भूमि सुधारों में अहम भूमिका निभाई. चे ग्वेरा सिर्फ क्यूबा तक सीमित नहीं रहना चाहते थे. वे पूरी दुनिया से साम्राज्यवाद को मिटाना चाहते थे. इसी मकसद से वे पहले अफ्रीका के कांगो में गए और बाद में बोलीविया पहुंचे, जहां वे किसानों के बीच क्रांति की अलख जगाने की कोशिश कर रहे थे. 9 अक्टूबर 1967 को बोलीविया की सेना ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की मदद से उन्हें पकड़कर गोली मार दी.
दुनिया भर में वो लोकप्रिय कैसे हुए?
चे ग्वेरा की लोकप्रियता का दायरा सिर्फ उनके राजनीतिक विचारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके जीवन जीने के तरीके ने उन्हें ग्लोबल आइकॉन बना दिया. जब क्यूबा में सरकार बन गई, तो चे ग्वेरा चाहते तो आराम की जिंदगी जी सकते थे, लेकिन वे सत्ता के मोह में नहीं फंसे. वे मंत्री पद और क्यूबा की नागरिकता छोड़कर दुनिया के अन्य पीड़ित देशों में क्रांति की आग जलाने निकल पड़े.
चे ग्वेरा और फिदेल कास्त्रो (फोटो-साभार)
इस निस्वार्थ त्याग ने उन्हें युवाओं की नजर में महान बना दिया. उनकी मोटरबाइक यात्रा, डायरियां और उनका विद्रोही स्वभाव दुनिया भर के युवाओं के लिए एक साहसिक एडवेंचर की तरह था. उन्होंने खुलकर अमेरिका की पूंजीवादी नीतियों और लैटिन अमेरिका में उसके हस्तक्षेप का विरोध किया. कोल्ड वार के दौर में वे सोवियत संघ और अमेरिका के बीच तीसरी दुनिया की आजाद आवाज बनकर उभरे.
वे इतिहास के सबसे मशहूर क्रांतिकारी चेहरा कैसे बने?
चे ग्वेरा को दुनिया भर में अमर बनाने में एक तस्वीर का सबसे बड़ा हाथ है, जिसे गुएरिलेरो हेरोइको (Guerrillero Heroico) कहा जाता है. 5 मार्च 1960 को हवाना में एक शोक सभा के दौरान क्यूबाई फोटोग्राफर अल्बर्टो कॉर्डा ने चे ग्वेरा की एक तस्वीर खींची थी. उस तस्वीर में चे की आंखों में एक दूर की दृष्टि, चेहरे पर दृढ़ संकल्प और सिर पर स्टार वाली बेरेट कैप थी.
उनकी मौत के बाद इटली के पब्लिशर गियांगियाकोमो फेरत्रिनेल्ली ने इस फोटो के पोस्टर छपवाए, जो देखते ही देखते यूरोप और अमेरिका के छात्र आंदोलनों में छा गए. समय के साथ यह तस्वीर टी-शर्ट्स, बेल्ट, बैज, कॉफी मग और दीवारों के पोस्टरों पर प्रिंट होने लगी. यह दुनिया में सबसे ज्यादा बनने और बिकने वाली तस्वीरों में से एक बन गई. वह पॉप-कल्चर का प्रतीक बन गए.
चे पर आज भी दो हिस्सों में क्यों बंटी है दुनिया?
आज भी चे ग्वेरा के नाम पर वैचारिक लड़ाइयां लड़ी जाती हैं. समाज का एक वर्ग उन्हें भगवान की तरह पूजता है, तो दूसरा वर्ग उन्हें एक खूंखार हत्यारा मानता है. उनके चाहने वालों के लिए चे ग्वेरा अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले ‘रॉबिनहुड’ हैं. वे उन्हें समानता, अंतरराष्ट्रीय एकजुटता, रंगभेद, साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक मानते हैं.
आलोचकों का कहना है कि चे ग्वेरा ने क्यूबा की ला काबाना जेल में बिना निष्पक्ष मुकदमे के सैकड़ों राजनीतिक कैदियों, जासूसों और बतिस्ता के समर्थकों को फांसी की सजा दी थी. वे उन्हें एक क्रूर हिंसक व्यक्ति मानते हैं जो लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते थे और तानाशाही शासन सिस्टम के समर्थक थे. दक्षिणपंथी विचारक और क्यूबाई प्रवासी आज भी उन्हें एक आतंकवादी और खून के प्यासे क्रांतिकारी के रूप में याद करते हैं.
पॉप कल्चर का चेहरा चे ग्वेरा
भारत में चे ग्वेरा कैसे फेमस होते गए?
भारत में चे ग्वेरा की लोकप्रियता का इतिहास वामपंथी राजनीति, छात्र आंदोलनों और बंगाल-केरल की सांस्कृतिक जमीन से जुड़ा हुआ है. 1960 के दशक में जब पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी इलाके से कम्युनिस्ट किसानों का सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ, तो भारत के लेफ्ट विचारधारा वाले युवाओं के लिए चे ग्वेरा प्रेरणास्त्रोत बन गए. पश्चिम बंगाल और केरल में लेफ्ट विचारधारा की वजह से चे ग्वेरा की मौजूदगी हर जगह मिल जाएगी. वहां की दीवारों पर उनके पोस्टर, किताबों की दुकानों पर उनकी जीवनियां और दुर्गा पूजा के पंडालों या राजनीतिक रैलियों में उनकी टी-शर्ट्स आम बात हैं.
भारतीय युवाओं के बीच फैशन और विचार पनपने में जेएनयू, जाधवपुर जैसी यूनिवर्सिटी के साथ ही सोशल मीडिया ट्रेंड्स का योगदान रहा. आज के दौर में भारत के महानगरों के कॉलेज जाने वाले युवा भी चे ग्वेरा की टी-शर्ट पहनते हैं. शुरुआत में भले ही यह सिर्फ एक ‘कूल फैशन ट्रेंड’ या विद्रोह का प्रतीक लगता हो, लेकिन धीरे-धीरे युवा उनके जीवन, उनकी किताबों और लैटिन अमेरिकी क्रांति के इतिहास को पढ़ने लगे, जिससे भारत में उनकी लोकप्रियता और गहरी होती गई.
चे ग्वेरा सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि एक विचार और एक ब्रांड बन चुके हैं. समय बीतने के साथ उनकी शख्सियत के कई अंधेरे और उजाले पहलू सामने आए हैं, लेकिन आज भी जब दुनिया में कहीं भी शोषण के खिलाफ कोई आवाज उठती है, तो चे ग्वेरा का चेहरा और उनका फेमस नारा याद आ जाता है- Hasta la victoria siempre यानी जीत होने तक हमेशा के लिए, अंत तक.



