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Navratri Special: श्मशान में आधी रात को क्यों उमड़ता है भक्तों का सैलाब? भीलवाड़ा के इस मंदिर की अनोखी है कहानी

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दिन में सुनसान, रात में भक्तों की भीड़, भीलवाड़ा के इस मंदिर की अनोखी है कहानी

Last Updated:October 11, 2026, 10:06 IST

Bhilwara Kali Mata Temple Beliefs: दिन में भी जिस श्मशान में जाने से लोग कतराते हैं, वहां नवरात्र की रात को मां काली के जयकारे गूंजते हैं. भीलवाड़ा के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरवनाथ मंदिर में श्मशान काली माता की आराधना के लिए आधी रात को श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है. यहां नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान होते हैं और माता का अलग-अलग स्वरूपों में शृंगार किया जाता है. मंदिर से जुड़ी परंपराओं में संतान सुख की कामना करने वाली महिलाओं की गोद भराई, कन्या पूजन और सिद्ध सिंदूर वितरण शामिल हैं. मंदिर के पुजारी के मुताबिक, नशामुक्ति का संकल्प लेने वालों को सिद्ध रुद्राक्ष भी दिए जाते हैं. श्रद्धालु इस स्थान को आस्था और मानसिक शांति का केंद्र मानते हैं. श्मशान की भूमि पर रातभर चलने वाली पूजा-अर्चना इस मंदिर को अलग पहचान देती है.Amazon Prime DayTop Deals Insideदिन में सुनसान, रात में भक्तों की भीड़, भीलवाड़ा के इस मंदिर की अनोखी है कहानीZoomभीलवाड़ा के मसानियां भैरवनाथ मंदिर में श्मशान काली माता की आराधना के लिए आधी रात को श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है

भीलवाड़ा. रात का सन्नाटा, चारों तरफ श्मशान और घड़ी में बजते आधी रात के 12 बजे. आमतौर पर जिस जगह जाने से लोग दिन में भी कतराते हैं, उसी जगह रात के अंधेरे में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. यह नजारा राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरवनाथ मंदिर का है. यहां विराजमान श्मशान काली माता के दर्शन के लिए नवरात्र के नौ दिनों तक आधी रात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर में विशेष यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. मान्यता और आस्था से जुड़े इस धाम में कोई संतान सुख की कामना लेकर आता है, तो कोई नशे की लत से छुटकारा पाने का संकल्प लेकर माता के दरबार में पहुंचता है.

श्मशान की भूमि पर मां काली की आराधना का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. रात के सन्नाटे में गूंजते जयकारे और भजन-कीर्तन यहां के माहौल को भक्तिमय बना देते हैं. भीलवाड़ा के पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरवनाथ मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. मंदिर में विराजमान श्मशान काली माता की प्रतिमा कई वर्ष पहले कोलकाता से लाई गई थी. मंदिर के पुजारी रवि कुमार खटीक के अनुसार, नवरात्र के नौ दिनों तक यहां विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ और हवन किए जाते हैं. प्रतिदिन मध्यरात्रि 12 बजकर 15 मिनट से सुबह 4 बजकर 15 मिनट तक धार्मिक अनुष्ठान चलते हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं.

संतान सुख की कामना को लेकर गोद भराई की है विशेष परंपरा

मंदिर में संतान सुख की कामना करने वाली महिलाओं के लिए गोद भराई की रस्म भी आयोजित की जाती है. श्रद्धालु इसे अपनी आस्था और विश्वास से जुड़ी परंपरा मानते हैं. नवरात्र के दौरान कन्याओं का पूजन किया जाता है और उन्हें सामूहिक रूप से भोजन प्रसादी करवाई जाती है. मंदिर से जुड़ी परंपराओं के अनुसार, माता का नौ दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में विशेष शृंगार किया जाता है. इसके लिए नौ अलग-अलग शक्तिपीठों से लाई गई सामग्री का उपयोग किया जाता है.

करवा चौथ से पहले मां कामाख्या का सिद्ध सिंदूर का होता है वितरण

मंदिर के पुजारी रवि कुमार खटीक बताते हैं कि करवा चौथ से एक दिन पहले असम स्थित मां कामाख्या देवी से लाए गए सिद्ध सिंदूर का वितरण किया जाता है. मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं इसे पति की लंबी आयु की कामना के साथ धारण करती हैं. इसके अलावा नशामुक्ति का संकल्प लेने वाले लोगों को सिद्ध रुद्राक्ष भी वितरित किए जाते हैं. पुजारी के अनुसार, इसे धारण करने से लोगों को नशे की लत छोड़ने की प्रेरणा मिलती है. मंदिर आने वाले श्रद्धालु मुकुंद शर्मा बताते हैं कि वह करीब एक साल से यहां आ रहे हैं. उनके अनुसार, उन्होंने नशामुक्ति के उद्देश्य से सिद्ध रुद्राक्ष लिया था और इसके बाद नशे से दूरी बना ली. वह मंदिर में आकर मानसिक शांति और संतुष्टि मिलने की बात भी कहते हैं.

श्मशान में रातभर गूंजते हैं मां के जयकारे

नवरात्र के दौरान यहां महिला, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. रात के अंधेरे में भजन-कीर्तन और मां काली के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो जाता है. श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि उनकी आस्था, विश्वास और मनोकामनाओं से जुड़ा धाम है. श्मशान की भूमि पर आधी रात में होने वाली आराधना और मंदिर की अनूठी परंपराएं मसानियां भैरवनाथ मंदिर को भीलवाड़ा के धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान दिलाती हैं.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Bhilwara,Rajasthan

First Published :

October 11, 2026, 10:06 IST

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