चित्तौड़गढ़ में अरावली की पहाड़ियों में बसा जोगणिया माता का धाम, जहां मन्नत पूरी होने पर चढ़ती हैं हथकड़ियां, जानें सदियों पुरानी परंपरा

Last Updated:October 12, 2026, 09:31 IST
Joganiya Mata Mandir Chittorgarh: चित्तौड़गढ़ स्थित प्राचीन जोगणिया माता मंदिर में नवरात्रि पर श्रद्धालुओं का तांता लगा है. अरावली की पहाड़ियों और घने जंगलों में स्थित इस धाम में माँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती तीनों रूप में विराजमान हैं. मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा ‘हथकड़ी चढ़ाने’ की है, जहां मुकदमों और पुलिस की गिरफ्त से मुक्ति मिलने पर भक्त गुप्त रूप से हथकड़ी चढ़ाते हैं. 8वीं-9वीं शताब्दी के इस मंदिर में हाड़ा चौहान शासकों की कुलदेवी के रूप में अटूट आस्था है, जहां राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से लाखों भक्त पहुंचते हैं.
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Rajasthan Temple Mystery: आखिर जोगणिया माता के दरबार में क्यों चढ़ाई जाती हैं हथकड़ियां? जानें सदियों पुरानी परंपरा
Chittorgarh: नवरात्रि के इस पावन पर्व पर जहां पूरे देश में शक्ति की आराधना की गूंज है, वहीं मेवाड़ की पवित्र धरा पर स्थित शक्तिपीठों की महिमा अपने चरम पर देखने को मिल रही है. राजस्थान के ऐतिहासिक शहर चित्तौड़गढ़ में स्थित जोगणिया माता का यह प्राचीन धाम प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम है. अरावली पर्वतमाला की ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों और गहरी खाइयों से घिरा यह मंदिर भक्तों को एक अलग ही अलौकिक दुनिया में ले जाता है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती—तीनों देवियां एक साथ विराजमान हैं. वर्षा ऋतु के दौरान मंदिर के समीप स्थित लगभग 300 फीट गहरे दर्रे में गिरता विशाल झरना इस पावन स्थान की खूबसूरती और रहस्यमय वातावरण को कई गुना बढ़ा देता है.
जोगणिया माता मंदिर की सबसे चर्चित और अनोखी परंपरा मंदिर में हथकड़ी चढ़ाने की है. पूरे विश्व में शायद ही ऐसा कोई दूसरा मंदिर हो जहां भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर लोहे की हथकड़ियां चढ़ाते हों. स्थानीय लोकमान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी झूठे मुकदमे, पुलिस कार्रवाई या किसी भयंकर कानूनी मुसीबत में फंसा हुआ हो, और वह माता के दरबार में आकर सच्चे मन से संकटमुक्ति की प्रार्थना करता है, तो माता रानी उसकी फरियाद जरूर सुनती हैं. मनोकामना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु गुप्त रूप से आकर मंदिर परिसर में हथकड़ी अर्पित करते हैं. आज भी मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर टंगी अनगिनत हथकड़ियां माता की न्यायप्रिय शक्ति और श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करती हैं.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और हाड़ा चौहान शासकों से जुड़ावइस शक्तिपीठ का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है. 8वीं से 9वीं शताब्दी के दौरान स्थापित इस प्राचीन मंदिर को शुरुआती दौर में ‘अन्नपूर्णा देवी’ के नाम से पूजा जाता था. किंवदंतियों के अनुसार, जब हाड़ा चौहान शासकों के राज्य बंबावदागढ़ पर अचानक कोई बड़ा संकट आया था, तब माता ने स्वयं एक जोगिन (तपस्विनी) का रूप धारण करके उनकी रक्षा की थी. इसके बाद से ही देवी को ‘जोगणिया माता’ के नाम से पुकारा जाने लगा. हाड़ा राजवंश के राजपूत आज भी माता को अपनी कुलदेवी मानकर उनकी पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार पर स्थित दो विशाल सिंह प्रतिमाएं और पास ही स्थापित सहस्त्र शिवलिंग शिव-शक्ति के शाश्वत मिलन की अनुभूति कराते हैं.
नवरात्र में उमड़ता आस्था का सैलाबशारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान जोगणिया माता के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और गुजरात से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने और अपनी झोली फैलाने यहां पहुंचते हैं. मंदिर मंडल के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी और स्थानीय विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ के अनुसार, मंदिर प्रशासन द्वारा नवरात्रि के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं. मंदिर में चलने वाले अखंड भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से पूरा अरावली क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Chittaurgarh,Chittaurgarh,Rajasthan
First Published :
October 12, 2026, 09:22 IST



