Entertainment

1 हफ्ते तक सुनते रहे लता मंगेशकर का गाना, किशोर दा ने फिर अपना वर्जन किया रिकॉर्ड, बिना ट्रेनिंग के अमर किया गीत

Last Updated:October 14, 2026, 03:31 IST

भारतीय सिनेमा में किशोर कुमार एक ऐसा नाम है, जिनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसती है. उनकी संगीत यात्रा कई उतार-चढ़ाव से भरी रही, लेकिन अपनी अनोखी आवाज और अलग अंदाज के दम पर उन्होंने खास पहचान बनाई. उन्होंने कभी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा नहीं ली, मगर जब भी क्लासिकल गाना गाने का मौका मिला, तो कमाल कर दिया. वह कैसे ऐसा कर लेते थे, इसके पीछे उनकी अनूठी तरीक थी.

ख़बरें फटाफट

Amazon Prime DayTop Deals Inside1 हफ्ते तक सुनते रहे लता का गाना, किशोर दा ने फिर अपना वर्जन किया रिकॉर्डZoomकिशोर दा ने क्लासिकल संगीत की ट्रेनिंग नहीं ली थी. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: किशोर कुमार एक ऐसे गायक थे, जिन्होंने कभी भी शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग नहीं ली थी. उसके बावजूद अपनी गायकी से लोगों का दिल जीता. बताया जाता है कि जब भी किशोर कुमार से शास्त्रीय संगीत गाने के लिए कहा जाता था, तो वह शास्त्रीय संगीत में कुशल अन्य समकालीन गायकों के वर्जन को सुनते थे और फिर खुद गाना गाते थे.

फिल्म ‘महबूब’ का गाना ‘नैना सावन भादौ’ को किशोर कुमार ने गाया है. इसके संगीतकार आर⁠डी⁠ बर्मन और गीतकार आनंद बख्शी थे. बताया जाता है कि जब आरडी बर्मन पहली बार यह गाना लेकर किशोर कुमार के पास गए, तो किशोर दा इसे गाने में हिचक रहे थे क्योंकि उन्हें शास्त्रीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं मिली थी. उन्होंने पहले लता मंगेशकर का गाया हुआ वर्जन सुनने की इच्छा जताई.

लता मंगेशकर का गाया ⁠वर्जन एक सप्ताह तक बार-बार सुनने और उसकी बारीकियों को समझने के बाद उन्होंने अपना वर्जन रिकॉर्ड किया, जिसे आज कई लोग इस गाने का सबसे बेहतरीन वर्जन मानते हैं. शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग न होने के बावजूद किशोर कुमार ने इस गाने के दर्द और जज्बात को बहुत गहराई से गाया. आज भी यह गाना लोग सुनते रहते हैं. भले ही किशोर कुमार ने कभी पारंपरिक तरीके से शास्त्रीय संगीत नहीं सीखा था, लेकिन संगीत को लेकर उनकी समझ इतनी तेज थी कि बड़े-बड़े प्रशिक्षित संगीतकार भी हैरान रह जाते थे.

(फोटो साभार: YouTube@videograb)

जज्बात को दी ज्यादा अहमियतकिशोर किसी भी धुन को सुनते ही उसके भाव को तुरंत पकड़ लेते थे. न कोई क्लास, न कोई औपचारिक ट्रेनिंग, बस संगीत के साथ एक सच्चा, गहरा जुड़ाव और यही बात उन्हें सबसे अलग बनाती थी. उनकी गायकी किताबी तौर पर भले ही परफेक्ट न हो, लेकिन उसमें जान थी. वह सिर्फ राग का गायन नहीं करते थे, बल्कि उसे जीते थे. इसी अंदाज ने उन्हें शास्त्रीय संगीत को आम गीतों में पिरोने में मदद की. किशोर दा के गाने इस बात का सबूत हैं कि जज्बात तकनीक से ज्यादा मायने रखते हैं. किशोर कुमार के गीत आज भी लोगों के दिलों में गूंजते हैं. वह अपने पीछे एक शानदार संगीत विरासत छोड़ गए हैं.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

और पढ़ेंLocation :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

October 14, 2026, 03:31 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj