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राजस्थान में GST विभाग की बड़ी कार्रवाई, प्रतिष्ठानों में गड़बड़ियां; कारोबारियों ने 2.21 करोड़ रुपये सरेंडर किए

जयपुर. राजस्थान में जीएसटी चोरी और कर से जुड़ी गड़बड़ियों के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. विभाग की टीमों ने 9 और 10 अक्टूबर को जयपुर, अलवर, कोटा, हनुमानगढ़ और दौसा में 9 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच, सर्वे और तलाशी की. इस दौरान करीब 3 करोड़ 15 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितताएं सामने आईं. जांच के दौरान संबंधित कारोबारियों ने लगभग 2 करोड़ 21 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा कराए हैं.

कार्रवाई कपड़ा, मिठाई, रेस्टोरेंट, तेल उद्योग, ट्रांसपोर्ट, फर्नीचर और मोबाइल कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर की गई. विभागीय टीमों ने दुकानों और कारोबारी इकाइयों में मौजूद स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, लेखा दस्तावेज और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी की जांच की. कुछ मामलों में दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं. संबंधित कारोबारियों को समन जारी कर आगे की जांच शुरू की गई है.

कोटा के तेल उद्योग में 1.60 करोड़ की संभावित कर अनियमितता
कोटा में मैसर्स रिद्धि सिद्धि ऑयल इंडस्ट्रीज की जांच के दौरान करमुक्त आपूर्ति के खिलाफ इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं. विभाग ने इस मामले में करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपये की संभावित कर राशि आंकी है. जांच के दौरान कारोबारी ने 10 अक्टूबर तक 1 करोड़ 21 लाख 38 हजार रुपये स्वेच्छा से जमा करा दिए. इस मामले में रिकॉर्ड की जांच और आगे की कार्रवाई जारी है.

जयपुर में कपड़ा और मिठाई कारोबार की जांच
जयपुर के बगरू स्थित मैसर्स बगरू हस्तकला प्रिंटर्स में जांच के दौरान कपड़ों की बिक्री पर जीएसटी दर से जुड़ी गड़बड़ी सामने आई. आरोप है कि अलग-अलग उत्पादों पर निर्धारित दर के बजाय सभी उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी जमा कराया जा रहा था. इसके अलावा दुकान के वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक के बीच अंतर मिला. इस मामले में करीब 15 लाख रुपये की संभावित कर राशि आंकी गई. कारोबारी ने 13 लाख 17 हजार 74 रुपये जमा कराए. सी-स्कीम स्थित गोपाल सिंह पतासी भंडार में भी कर देयता से जुड़ी अनियमितताओं की जांच की गई. यहां करीब 20 लाख रुपये की संभावित कर राशि सामने आई, जबकि प्रतिष्ठान ने 3 लाख 32 हजार रुपये जमा कराए.

बॉम्बे मिष्ठान भंडार पर 40 लाख की अनियमिततावहीं, बॉम्बे मिष्ठान भंडार में रेस्टोरेंट सेवाओं से जुड़े ऐसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के इस्तेमाल की जांच की गई, जिसके लिए पात्रता नहीं होने की आशंका थी. वित्तीय वर्ष 2021-22 से संबंधित लेनदेन और दस्तावेजों की जांच में करीब 40 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता सामने आई. कारोबारी ने डीआरसी-03 के माध्यम से 25 लाख 4 हजार रुपये जमा कराए.

अलवर में दो ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर कार्रवाई
अलवर में शबीर खान ट्रांसपोर्ट कंपनी और राजस्थान गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी की जांच इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर की गई. विभाग के अनुसार, 5 प्रतिशत कर दर या करमुक्त आपूर्ति के तहत परिवहन सेवाएं देने के बावजूद आईटीसी का लाभ लेने से जुड़े मामले सामने आए. शबीर खान ट्रांसपोर्ट कंपनी में करीब 21.85 लाख रुपये की संभावित कर राशि के मुकाबले 21.29 लाख रुपये जमा कराए गए. राजस्थान गोल्डन ट्रांसपोर्ट कंपनी के मामले में करीब 22.83 लाख रुपये की संभावित कर राशि बताई गई है. विभाग की ओर से जारी जानकारी में इस राशि के जमा होने की बात कही गई है. अलवर में ही राहुल डेकोर और संबंधित फर्म निखिल फोम एंड फर्निशिंग की जांच की गई. इन प्रतिष्ठानों पर बिना वैध दस्तावेजों के खरीद-बिक्री की आशंका के आधार पर कार्रवाई हुई. टीम ने वास्तविक स्टॉक का मिलान किया और कारोबारी रिकॉर्ड की जांच की. इस मामले में करीब 12 लाख रुपये की संभावित कर राशि आंकी गई है.

हनुमानगढ़ में मिठाई की दुकान से 7 लाख रुपये जमा
हनुमानगढ़ जिले के नोहर स्थित श्री हरि स्वीट्स में वास्तविक कारोबार कम दिखाने और संभावित कर चोरी की आशंका पर जांच की गई. शुरुआती जांच में करीब 7 लाख 30 हजार रुपये की संभावित कर देयता सामने आई. कारोबारी ने मौके पर ही 7 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा करा दिए.

दौसा में मोबाइल कारोबारी के प्रतिष्ठान और घर पर तलाशीदौसा जिले के महुवा स्थित मैसर्स खंडेलवाल टेलीकॉम सेंटर पर कर देयता का भुगतान नहीं करने से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई. जांच दल ने दुकान के साथ संचालक के आवास पर भी तलाशी ली. इस दौरान मौके पर मौजूद स्टॉक का मिलान किया गया और संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए. कारोबारी ने 7 लाख रुपये जमा कराए.

खरीद-बिक्री और आईटीसी की जांच आगे भी जारी रहेगीवाणिज्यिक कर विभाग का कहना है कि राज्य में कर चोरी रोकने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए ऐसे जांच अभियान चलाए जा रहे हैं. टीमों की ओर से कारोबारियों के खरीद-बिक्री विवरण, वास्तविक स्टॉक, जीएसटी रिटर्न और इनपुट टैक्स क्रेडिट की जांच की जा रही है. विभाग का उद्देश्य कर व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना, ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले कारोबारियों के हितों की रक्षा करना और राजस्व के नुकसान को रोकना है. जांच में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर संबंधित कारोबारियों से दस्तावेज और जवाब मांगे जा रहे हैं. विभाग ने साफ किया है कि कारोबार छिपाने, गलत जीएसटी दर लगाने और अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने जैसे मामलों में नियमों के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल इन जांचों में सामने आई करीब 3.15 करोड़ रुपये की संभावित कर अनियमितताओं के मामलों में आगे की प्रक्रिया जारी है. विभागीय जांच पूरी होने और रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही संबंधित मामलों में अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी.

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