राजस्थान के ‘अमरनाथ’ में विदेशी मेहमानों ने अपनाई हिंदू परंपरा, भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते आए नजर

Last Updated:October 18, 2026, 16:20 IST
Pali Hindi News: राजस्थान के पाली जिले में स्थित ऐतिहासिक परशुराम महादेव मंदिर में विदेशी सैलानी हिंदू रीति-रिवाजों और नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित इस गुफा मंदिर को राजस्थान का अमरनाथ भी कहा जाता है.
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पाली। कहते हैं आस्था की कोई सीमा और कोई देश नहीं होता, और इसका जीवंत उदाहरण इन दिनों राजस्थान के पाली में देखने को मिल रहा है. अरावली की दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित ऐतिहासिक ‘परशुराम महादेव मंदिर’ में विदेशी पर्यटकों का तांता लगा हुआ है. खास बात यह है कि ये सैलानी केवल घूमने नहीं आए हैं, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों और नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए महादेव का आशीर्वाद ले रहे हैं. अरावली की हरी-भरी वादियों के बीच स्थित इस ‘अमरनाथ ऑफ राजस्थान’ में विदेशी सैलानियों की यह अगाध श्रद्धा हर किसी को प्रभावित कर रही है. आखिर क्या है इस प्राकृतिक गुफा मंदिर का पौराणिक इतिहास और क्यों यह वादियों का सफर विदेशी मेहमानों की पहली पसंद बना हुआ है.
हाथों में जल-अक्षत, माथे पर त्रिपुंड चंदन और जुबां पर ‘हर-हर महादेव’ यह नजारा पाली जिले में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर ‘परशुराम महादेव’ का है. इन दिनों अरावली की चोटियों में स्थित इस पवित्र धाम में विदेशी सैलानियों का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. समंदर पार से आए ये मेहमान केवल मंदिर की खूबसूरती देखने नहीं पहुंचे हैं, बल्कि पूरी तरह सनातन संस्कृति के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं. धोती-कुर्ता और पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनकर ये सैलानी मंदिर के सभी धार्मिक नियमों और मर्यादाओं का पालन करते हुए भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर रहे हैं.
राजस्थान का अमरनाथ है यह मंदिरसमुद्र तल से करीब 3,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित परशुराम महादेव मंदिर को ‘राजस्थान का अमरनाथ’ भी कहा जाता है.
पौराणिक इतिहास: मान्यता है कि भगवान विष्णु के छठे अवतार महर्षि परशुराम ने अपने फरसे (परशु) से इस विशाल चट्टान को काटकर इस प्राकृतिक गुफा का निर्माण किया था. इसी गुफा में बैठकर उन्होंने वर्षों तक भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें अक्षय धनुष और दिव्यास्त्र प्रदान किए थे.
मंदिर की अलौकिक खासियत: यह पूरा मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित है. गुफा में जाने के लिए करीब 500 से अधिक सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं. गुफा के भीतर मुख्य शिवलिंग के ठीक ऊपर एक प्राकृतिक गोमुख बना हुआ है, जिससे अनवरत जल की बूंदें शिवलिंग पर टपकती रहती हैं.
एडवेंचर के शौकिनो के लिए स्वर्गधार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए स्वर्ग समान है. मारवाड़ और मेवाड़ की सीमा पर फैली अरावली की घुमावदार चोटियां, घने जंगल और शांत वातावरण यहाँ आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेते हैं. कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के पास स्थित होने के कारण यहाँ का सफर बेहद रोमांचक रहता है. पैदल चढ़ाई के दौरान अरावली की पहाड़ियों का विहंगम नजारा विदेशी मेहमानों को एक अद्भुत शांति और ऊर्जा का अहसास कराता है.
विदेशियों पर्यटकों को भा रही यह जगहसनातनी परंपराओं की सरलता और अरावली के इस प्राकृतिक गुफा मंदिर का आध्यात्मिक माहौल विदेशी पर्यटकों को इतना भा रहा है कि वे यहाँ से एक अमिट याद लेकर लौट रहे हैं. पाश्चात्य संस्कृति को छोड़कर भारतीय संस्कृति को अंगीकार करते इन विदेशी मेहमानों की यह तस्वीरें साबित करती हैं कि महादेव की भक्ति और सनातन संस्कृति का जादू सीमाओं से परे पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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October 18, 2026, 16:20 IST



