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Tariff Waiver : 60 दिन तक जितना मर्जी रूस से तेल खरीदो, ट्रंप की इस छूट का भारत के लिए क्या मतलब?

Last Updated:October 18, 2026, 18:21 IST

Tariff Waiver : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित उन सभी देशों पर टैरिफ का जोखिम हटा दिया है, जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं. इससे पहले अमेरिका ने रूसी क्रूड खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. अब टैरिफ से राहत मिली है तो इसका भारत के लिए क्या मायने है और कितना दूसर तक इसका असर पड़ेगा.60 दिन तक जितना मर्जी रूस से तेल खरीदो, इस छूट का भारत के लिए क्या मतलब?Zoomभारत को रूस से 60 दिन तक बिना टैरिफ तेल आयात की छूट मिली है.

नई दिल्ली. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया और जब खुद को तेल की जरूरत पड़ी तो रूस पर प्रतिबंध हटा दिया. ट्रंप ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट (ग्राहम एक्ट) के कुछ प्रावधानों को अस्थायी रूप से हटा दिया है. इससे भारत और चीन जैसे देश बिना किसी रोक टोक के 60 दिन तक रूस से तेल खरीद सकते हैं. अमेरिका की इस छूट का भारत के लिए क्या मायने है, क्योंकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि ट्रंप प्रशासन के अगला कदम तय करने तक यह छूट जारी रहेगी.

अमेरिका ने पिछले दिनों ही ग्राहक एक्ट को पास कराया है, जिसके तहत रूसी क्रूड और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले 5 बड़े देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी. यह टैरिफ 18 अक्टूबर से ही प्रभावित होना था, लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने कानून को टाल दिया है. प्रशासन ने इसे 60 दिनों की समीक्षा अवधि के रूप में पेश किया है, लेकिन हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि ये छूट तब तक लागू रहेंगी जब तक कि राष्ट्रपति या विदेश मंत्री यह तय न कर लें कि आगे कोई कार्रवाई आवश्यक है अथवा नहीं.

अमेरिका में हो रहा फैसले का विरोधइस फैसले ने वाशिंगटन में काफी खींचतान पैदा कर दी है. दोनों राजनीतिक दलों के सांसदों ने इस रोक की आलोचना की है. उनका तर्क है कि आर्थिक दबाव कम करने से मॉस्को की सैन्य फंडिंग को रोकने के पश्चिमी देशों के प्रयासों को कमजोर किया जा रहा है. मैसाचुसेट्स से डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने सीधे तौर पर ट्रम्प पर आरोप लगाया कि उन्होंने कांग्रेस की अनदेखी की है और रूस की आक्रामकता को बढ़ावा दिया है. उन्होंने सांसदों से इस फैसले को पलटने की मांग की. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रतिबंधों में ढील देने से सीधे तौर पर रूस को फायदा होता है.

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

तत्काल टैरिफ से राहत : भारत को अमेरिका के भारी अतिरिक्त टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों से कुछ समय के लिए राहत मिल गई है. नए कानून के तहत एक तय समय-सीमा के करीब आने पर ये प्रतिबंध लागू होने वाले थे.ऊर्जा आयात पर राहत: रुबियो ने माना कि भले ही भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए काम किया है, लेकिन वह अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाले बिना रातों-रात रूसी कच्चे तेल से पूरी तरह मुंह नहीं मोड़ सकता. इस छूट से भारतीय रिफाइनरियों को फिलहाल रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल गई है.
ग्लोबल बाजार से तालमेल : अमेरिका का यह फैसला सप्लाई में आ रही व्यापक रुकावटों से काफी प्रभावित है. इनमें ईरान से जुड़े संघर्ष, सऊदी अरब के पास हूती हमले और यूक्रेन में चल रहा युद्ध शामिल है. इन हालात में रूसी तेल पर अचानक रोक लगाना ग्लोबल ईंधन की कीमतों के लिए बड़ा जोखिम भरा हो सकता है.
लंबे समय की गारंटी नहीं : व्यापार विश्लेषकों और ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ का मानना ​​है कि यह कोई स्थायी नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि एक अस्थायी और वापस ली जा सकने वाली राहत है. 60 दिनों की समीक्षा पूरी होने के बाद फिर से संकट आ सकता है.
ट्रेड डील पर असर : यह कदम दिखाता है कि अमेरिका ने फिलहाल ग्लोबल ट्रेड को लेकर नरम रुख अपनाया है और इस छूट का असर भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी दिख सकता है.

भारत के लिए क्या है भविष्यभारतीय रिफाइनरों के लिए यह कार्यकारी आदेश उन्हें बिना किसी तत्काल व्यापार दंड के रियायती रूसी तेल का आयात जारी रखने की अस्थायी छूट देता है. हालांकि, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) और उद्योग के अन्य विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह राहत कोई दीर्घकालिक गारंटी नहीं देती है. इससे ऊर्जा आयातकों के सामने नीतिगत अनिश्चितता बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन के पास किसी भी समय निलंबित शुल्कों (टैरिफ) में बदलाव करने या उन्हें फिर से लागू करने का पूरा अधिकार है. जाहिर है कि इससे भारत को आने वाले समय में फिर से तेल आयात पर संकट का सामना करना पड़ सकता है.

About the AuthorPramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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New Delhi,Delhi

First Published :

October 18, 2026, 18:21 IST

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