आखिर कब थमेगा मौत का ये सिलसिला? कोटा की नदियों-नहरों में समा गई 1000 से ज्यादा जिंदगियां, सिस्टम पर उठ रहे सवाल

Last Updated:October 25, 2026, 14:07 IST
कोटा में चंबल नदी, नहरों और तालाबों में डूबने से पिछले एक दशक में 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. हर साल 100 से ज्यादा लोग जान गंवा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजाम अब भी सवालों के घेरे में हैं. कोटड़ी नहर हादसे में चार लोगों की मौत के बाद भी लापरवाही जारी है. आखिर कब थमेगा मौत का यह सिलसिला?
कोटा. चंबल नदी, नहरें और तालाब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, शहर से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक पानी में डूबने से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में कोटा और आसपास के क्षेत्रों में नदी, नहरों और तालाबों में डूबने से 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बावजूद कई जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आते. दशहरे के दिन कोटड़ी नहर में मूर्ति विसर्जन के दौरान नाव पलटने से चार लोगों की मौत के बाद भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं. ऐसे में नदी-नहरों के किनारे सुरक्षा व्यवस्था और हादसों की रोकथाम को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
कोटा और आसपास के इलाकों में नदी, नहरों और तालाबों में डूबने से हर साल 100 से अधिक लोगों की मौत हो जाती है. वहीं, नगर निगम की रेस्क्यू टीम 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहती है. इन डरावने आंकड़ों के बावजूद पानी के तेज बहाव और गहराई वाले स्थानों पर लोगों की आवाजाही जारी है. चंबल नदी, नहरों और वितरिकाओं में कई लोग तैरना नहीं जानते हुए भी नहाने उतर जाते हैं. फिसलन, तेज बहाव और पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने के कारण बच्चे और युवा हादसों का शिकार हो रहे हैं. कई बार प्रशासन की ओर से लोगों को नहरों में नहाने से रोका जाता है और नियमों की अनदेखी करने पर कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन इसका असर स्थायी रूप से दिखाई नहीं दे रहा है.
चार मौतों के बाद भी लापरवाही जारी
दशहरे के दिन कोटड़ी नहर में मूर्ति विसर्जन के दौरान नाव पलटने से चार लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था. इसके बावजूद कई इलाकों में लोग नहरों और नदी के किनारे जोखिम उठाते नजर आ रहे हैं. कहीं मूर्ति विसर्जन के दौरान सावधानी नहीं बरती जा रही, तो कहीं लोग नहाने और मछली पकड़ने के लिए पानी में उतर रहे हैं, ऐसे में हादसों की आशंका बनी हुई है. वर्तमान में चंबल की दायीं और बायीं मुख्य नहरों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है. जल प्रवाह के दौरान भी स्थानीय लोग नहाने के लिए नहरों में उतर जाते हैं, तेज बहाव के कारण कई बार उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिलता.
नहरों के किनारे कई स्थानों पर घाट बने हुए हैं, जहां लोग नहाने पहुंचते हैं, इसके अलावा कई जगह नहरों की दीवारें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए भी खतरा बना रहता है. पुरानी और अवैध रूप से संचालित नावों के इस्तेमाल को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आती रही हैं. लगातार हो रहे हादसों के बीच सवाल यह है कि आखिर नदी, नहरों और तालाबों के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कब होंगे? चेतावनी बोर्ड, संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग, नियमित निगरानी और सुरक्षित विसर्जन व्यवस्था जैसे कदम उठाना जरूरी है, ताकि लापरवाही के कारण होने वाली मौतों पर अंकुश लगाया जा सके.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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October 25, 2026, 14:07 IST



