‘TMC ने मेरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं किया’, ममता बनर्जी के सबसे करीबी रहे शख्स फिरहाद हकीम का क्यों छलका दर्द?

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने ममता बनर्जी को लेकर बड़ा बयान दिया है. हकीम ने पार्टी में अपनी भूमिका और ममता बनर्जी के नेतृत्व को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि पार्टी ने पिछले पांच साल में उनकी क्षमताओं का इस्तेमाल नहीं किया. साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी पर समर्थकों के बजाय अपने परिवार के लोगों पर अधिक भरोसा करने का आरोप लगाया. हकीम ने यह भी साफ किया कि अब वह नगर निगम का चुनाव नहीं लड़ेंगे. के साथ एक विशेष बातचीत में फिरहाद हकीम ने अपने राजनीतिक सफर, ममता बनर्जी के साथ अपने रिश्तों, कोलकाता के मेयर के रूप में अपने कार्यकाल और राजनीति में युवा पीढ़ी की भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की.
फिरहाद हकीम ने कहा कि वह हमेशा ममता बनर्जी के साथ खड़े रहे, लेकिन उन्हें लगता है कि पार्टी नेतृत्व ने उन समर्थकों को वह महत्व नहीं दिया, जो लंबे समय से उनके साथ थे. उन्होंने कहा, ‘हमने कभी ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा. समस्या तब शुरू हुई, जब उन्होंने अपने समर्थकों से ज्यादा अपने परिवार के लोगों पर भरोसा करना शुरू कर दिया. हम सब उनके साथ थे, लेकिन उन्होंने एक नेता को हेलीकॉप्टर से लाने का फैसला किया.’
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हकीम ने आगे कहा कि यदि समर्थकों को अधिक महत्व दिया गया होता, तो पार्टी के नेतृत्व की तस्वीर अलग हो सकती थी. उन्होंने कहा, ‘अगर समर्थकों को महत्व दिया गया होता, तो शायद आज हम सुवेंदु अधिकारी को TMC के मुख्यमंत्री के रूप में देखते.’ उनकी यह टिप्पणी पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भूमिका तथा नेतृत्व के फैसलों को लेकर उनकी नाराजगी को सामने लाती है.
पिछले पांच साल में पार्टी ने मेरा इस्तेमाल नहीं किया-हकीम
फिरहाद हकीम ने पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर निराशा जाहिर की. उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान पार्टी ने उनकी राजनीतिक क्षमताओं का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘पार्टी ने पिछले पांच साल में मेरा इस्तेमाल नहीं किया.’ हकीम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वह नगर निगम की राजनीति से चुनावी दूरी बनाने का संकेत दे रहे हैं.
हालांकि, उन्होंने अपने बयान में पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को लेकर निराशा जताई, लेकिन भविष्य में पार्टी के साथ अपने संबंधों को पूरी तरह खत्म करने की कोई घोषणा नहीं की.
दुर्गा पूजा में ममता बनर्जी की कमी खली, मुलाकात पर करेंगे बात
ममता बनर्जी के साथ अपने रिश्तों पर बात करते हुए हकीम ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान उन्हें ममता बनर्जी की कमी महसूस हुई. उन्होंने कहा कि जब दोनों की मुलाकात होगी, तब वह उनसे बात करेंगे. हकीम ने कहा, ‘हां, दुर्गा पूजा के दौरान मुझे ममता बनर्जी की कमी खली. हालांकि, जब हमारी मुलाकात होगी, तो मैं उनसे बात करूंगा.’
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मेयर रहते पानी की समस्या दूर करना बताई सबसे बड़ी उपलब्धि
उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर नाराजगी के बावजूद वह ममता बनर्जी से बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं. कोलकाता के मेयर के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए फिरहाद हकीम ने पानी की किल्लत दूर करने और जलभराव की समस्या से निपटने को अपनी प्रमुख उपलब्धियां बताया. उन्होंने कहा कि उत्तर कोलकाता के बड़े हिस्से में पानी की समस्या को दूर करने और जलभराव से राहत दिलाने के लिए उन्होंने काम किया.
हालांकि, अपने कार्यकाल के सबसे बड़े अफसोस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इमारत ढहने की घटना का जिक्र किया. हकीम ने कहा कि मेयर के रूप में यह उनके लिए सबसे बड़ा अफसोस रहा, हालांकि यह घटना सीधे तौर पर उनके नियंत्रण में नहीं थी.
इस तरह उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों के साथ उस घटना को भी याद किया, जिसे वह अपने लिए एक दुखद अनुभव मानते हैं. युवाओं को चुनाव लड़ने की सलाह, ईंट-बालू-सीमेंट के कारोबार के लिए राजनीति में न आएं. फिरहाद हकीम ने युवा पीढ़ी से चुनावी राजनीति में उतरने की अपील की. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम की राजनीति में आने का उद्देश्य लोगों की सेवा करना होना चाहिए, न कि कारोबार करना.
उन्होंने कहा, ‘युवा पीढ़ी को चुनाव लड़ना चाहिए. लेकिन लोग ऐसे पार्षद चाहते हैं, जो उनकी पहुंच में हों और उनकी जरूरतों के प्रति संवेदनशील हों. उन्हें ईंट, बालू और सीमेंट का कारोबार करने के लिए राजनीति में नहीं आना चाहिए.’
हकीम की यह टिप्पणी स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जनता से उनके सीधे जुड़ाव पर जोर देती है. उनके मुताबिक, पार्षदों को लोगों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए उपलब्ध रहना चाहिए.
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परिवार पर नहीं थोपेंगे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा
राजनीति में परिवार की भूमिका पर भी फिरहाद हकीम ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार के किसी सदस्य पर राजनीति में आने का दबाव नहीं डालेंगे. उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपने परिवार पर नहीं थोपूंगा और न ही परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आने के लिए मजबूर करूंगा.’
उनका यह बयान ममता बनर्जी के परिवार को लेकर की गई टिप्पणी के संदर्भ में भी चर्चा में है. हालांकि, हकीम ने अपने परिवार के भविष्य को लेकर स्पष्ट किया कि राजनीति में प्रवेश करना हर सदस्य का अपना फैसला होना चाहिए. फिरहाद हकीम का नगर निगम चुनाव नहीं लड़ने का फैसला और पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर उनकी नाराजगी, दोनों ही उनके राजनीतिक सफर के एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर संकेत करते हैं. उन्होंने एक तरफ ममता बनर्जी के प्रति अपनी पुरानी निष्ठा का जिक्र किया, तो दूसरी तरफ समर्थकों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने की शिकायत भी की.



