Why Parrots Eat Clay : तोते मिट्टी क्यों चाटते हैं? देखने के लिए दुनिया के कोने-कोने से आते हैं लोग

होमदुनियाअन्य देश
तोते मिट्टी क्यों चाटते हैं? देखने के लिए दुनिया के कोने-कौने से आते हैं लोग
Last Updated:October 29, 2026, 23:57 IST
दक्षिण अमेरिका के अमेजन में रंग-बिरंगे तोते नदियों के किनारे जमा होकर बड़े चाव से मिट्टी चाटते हैं. विज्ञान की भाषा में इस अजीब आदत को ‘जियोफैगिया’ कहते हैं. रिसर्च बताती है कि ये पक्षी कच्चे और जहरीले बीजों का असर खत्म करने के लिए मिट्टी खाते हैं. साथ ही, इससे उनके शरीर में नमक और सोडियम की कमी भी पूरी होती है. ये मिट्टी उनके लिए किसी प्राकृतिक सुरक्षा कवच से कम नहीं है, जो उन्हें जिंदा रहने में मदद करती है.
दक्षिण अमेरिका के अमेजन बेसिन में हर सुबह एक अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. सैकड़ों की संख्या में रंग-बिरंगे तोते, मैकाओ और पैराकीट्स नदियों के किनारे बनी मिट्टी की चट्टानों पर जमा होते हैं और बड़े चाव से मिट्टी चाटते हैं. इस घटना को देखने दुनिया भर से पर्यटक और वैज्ञानिक खिंचे चले आते हैं. लेकिन सवाल ये उठता है कि फल और बीज खाने वाले ये पक्षी आखिर मिट्टी क्यों खाते हैं?
मिट्टी खाने की पुरानी आदत : जानवरों और पक्षियों द्वारा मिट्टी या जमीन से जुड़ी चीजें खाने की इस आदत को विज्ञान की भाषा में ‘जियोफैगिया’ कहा जाता है. ये कोई नई बात नहीं है; ईसा पश्चात दूसरी सदी में यूनानी चिकित्सक गैलेन ने भी दर्ज किया था कि बीमार या घायल जानवर खुद को ठीक करने के लिए मिट्टी खाते हैं. तोतों में भी ये आदत सालों से देखी जा रही है.
पुरानी थ्योरीज क्यों हो गईं फेल : शुरुआत में वैज्ञानिकों ने अंदाजा लगाया था कि शायद तोते खाना पचाने, पेट का हाजमा दुरुस्त करने या भूख मिटाने के लिए मिट्टी के कंकड़-पत्थर निगलते हैं. लेकिन तोतों की चोंच इतनी मजबूत होती है कि वे कड़े से कड़े अखरोट और बीज भी आसानी से तोड़ लेते हैं. इसलिए पाचन के लिए कंकड़ खाने वाली थ्योरी खारिज हो गई.
Add as Preferred Source on Google
टॉक्सिन और जहर बेअसर करने का फॉर्मूला : साल 2000 के आसपास वैज्ञानिक जेम्स गिलार्डी ने एक नई थ्योरी दी. अमेजन के तोते अक्सर कच्चे फल और जहरीले बीज खाते हैं, जिनमें स्ट्रिकनिन, क्विनिन और टैनिन जैसे खतरनाक और कड़वे टॉक्सिन्स होते हैं. जेम्स के मुताबिक, मिट्टी में मौजूद बेहद बारीक कण इन जहरीले तत्वों से चिपक जाते हैं और तोतों के पेट में एक सुरक्षा परत बना देते हैं, जिससे जहर का असर खत्म हो जाता है.
लैब टेस्ट में साबित हुआ मिट्टी का जादू : वैज्ञानिकों ने इस ‘डिटॉक्सिफिकेशन थ्योरी’ को साबित करने के लिए लैब में प्रयोग भी किए. जब झींगों को जहरीले बीजों के अर्क में रखा गया तो वे मर गए, लेकिन जब उसी अर्क में मिट्टी मिला दी गई तो जहर का असर 70% तक कम हो गया. इसी तरह तोतों को दवा देने के बाद जब मिट्टी खिलाई गई, तो उनके खून में जहर का स्तर 60% तक गिर गया.
पौधों और तोतों के बीच का ‘इवोल्यूशनरी युद्ध’ : विकासक्रम के नजरिए से देखें तो पौधे अपने बीजों को बचाने के लिए उनमें कड़वा जहर पैदा करते हैं ताकि जानवर उन्हें पकने से पहले न खाएं. लेकिन अमेजन के तोतों ने इस डिफेंस सिस्टम को मात देने का तोड़ निकाल लिया. उन्होंने मिट्टी चाटकर जहर को पचाने की कला सीख ली, जिससे उन्हें जंगल में दूसरों के मुकाबले ज्यादा खाना मिलने का फायदा हुआ.
नमक और सोडियम की भारी कमी की थ्योरी : डिटॉक्स थ्योरी के बावजूद एक सवाल बचा रह गया कि दुनिया भर के तोते कच्चे फल खाते हैं, लेकिन मिट्टी सिर्फ अमेज़न के तोते ही क्यों चाटते हैं? 2017 में वैज्ञानिक एलिजाबेथ हॉबसन और डोनाल्ड ब्राइटस्मिथ ने पाया कि अमेज़न की मिट्टी में सोडियम (नमक) की मात्रा सामान्य पौधों से 40 गुना ज्यादा होती है. अमेज़न के भारी बारिश वाले इलाकों में जमीन से नमक बह जाता है, इसलिए तोते शरीर में सोडियम की कमी पूरी करने के लिए मिट्टी चाटते हैं.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। लेटेस्ट कॉमर्स डील्स, खास डिस्काउंट और बेहतरीन शॉपिंग ऑफर देखने के लिए कंपेयर इंडिया देखें.First Published :
October 29, 2026, 23:57 IST



