‘किताबों से नहीं, मैदान में सीखा आतंकवाद से निपटना’: राजनाथ सिंह ने दुनिया को याद दिलाया ‘ऑपरेशन सिंदूर’

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मैदान में सीखा आतंकवाद से निपटना: राजनाथ ने याद दिलाया ‘ऑपरेशन सिंदूर’
Last Updated:October 29, 2026, 10:17 IST
Rajnath Singh News: राजनाथ सिंह ने आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर दुनिया को भारत के सख्त तेवर और ताकतवर रुख का अहसास कराया है. उन्होंने दो टूक कहा कि आतंकवाद से निपटने का भारत का अनुभव किसी क्लासरूम या किताबों की थ्योरी का मोहताज नहीं है, बल्कि यह दशकों तक सीमा पार से मिले जख्मों और उनसे निपटने के लिए जमीन पर चलाए गए खूंखार अभियानों से उपजा है.राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति जमीन पर परखी हुई है.
Rajnath Singh Address in Cebu: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अक्टूबर को कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का अनुभव केवल क्लासरूम या सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दशकों तक जमीनी स्तर पर सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने से हासिल हुआ है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की हर रणनीति वास्तविक अभियानों में परखी गई है और अपनी सफलता साबित कर चुकी है.
फिलीपींस के सेबू में हो रही आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण का उदाहरण देते हुए पिछले वर्ष चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में आतंकवादी ढांचे को नष्ट किया गया. रक्षा मंत्री के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत के स्पष्ट रुख की घोषणा भी था.
रक्षा मंत्री ने समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों की केवल वकालत नहीं करता, बल्कि उनका दृढ़ता से पालन भी करता है. उन्होंने कहा कि नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और वैश्विक समुद्री संचार मार्गों (Sea Lines of Communication) की सुरक्षा करना भारत की प्रतिबद्धता है, जो दशकों के अनुभव पर आधारित है.
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) जैसे अत्यधिक संवेदनशील समुद्री गलियारों में लगातार सक्रिय रही है. इस दौरान भारत ने दूसरे देशों के हितों को कमजोर करने वाले किसी भी तरह के बल प्रयोग का सहारा नहीं लिया. उन्होंने कहा कि अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की तैनाती के जरिए भारतीय नौसेना ने हजारों वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की है और समुद्र में जहाजों के अपहरण की कई कोशिशों को नाकाम किया है.
‘एडीएमएम-प्लस’ 11 सदस्यीय आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन) और उसके आठ संवाद साझेदारों – भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका – का मंच है. भारत 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना था. ‘एडीएमएम-प्लस’ की पहली बैठक 12 अक्टूबर, 2010 को हनोई में हुई थी. फिलीपींस 2026 में ‘एडीएमएम-प्लस’ का अध्यक्ष है. ‘एडीएमएम-प्लस’ के तहत भारत 2024-2027 की अवधि के लिए मलेशिया के साथ आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है.
About the Authorराकेश रंजन कुमार
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
October 29, 2026, 10:01 IST



