शेखावाटी के स्वाद का दुनिया में बजेगा डंका, सीकर के बाजरे के चूरमे को मिली वैश्विक पहचान

Last Updated:October 30, 2026, 09:40 IST
Sikar ODOP Bajra Churma: शेखावाटी की माटी का पारंपरिक जायका ‘बाजरे का चूरमा’ अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपना परचम फहराने के लिए तैयार है. केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत सीकर जिले की तरफ से बाजरे के चूरमे को मुख्य पहचान के तौर पर चुना गया है. इस पहल के बाद राज्य सरकार इस स्वादिष्ट व्यंजन की वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार करेगी. इससे शेखावाटी की खान-पान परंपरा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ यहाँ आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को भी इस खास स्वाद का लुत्फ मिलेगा.
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Sikar ODOP Bajra Churma: शेखावाटी के स्वाद का दुनिया में बजेगा डंका, सीकर के बाजरे के चूरमे को मिली वैश्विक पहचान
Sikar: राजस्थान के शेखावाटी अंचल का सदियों पुराना और लजीज भोजन ‘बाजरे का चूरमा’ अब राष्ट्रीय सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी महक बिखेरने जा रहा है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के अंतर्गत सीकर जिले के प्रतिनिधित्व के लिए बाजरे के चूरमे का आधिकारिक रूप से चयन किया गया है. इस उपलब्धि के बाद प्रदेश सरकार सीकर के इस पारंपरिक व्यंजन को विशिष्ट पहचान दिलाने और वैश्विक पटल पर इसकी ब्रांडिंग करने के लिए विशेष अभियान चलाएगी. इस कदम से शेखावाटी की समृद्ध कला, संस्कृति और खान-पान की परंपरा को नया आयाम मिलेगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन विकास को भी रफ्तार मिलेगी.
सीकर में बाजरे के चूरमे का प्रचलन केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्राचीन काल की युद्ध परंपराओं से भी गहरा जुड़ा रहा है. मरुस्थल में पानी की कमी और कम बारिश के चलते यहाँ गेहूं की तुलना में बाजरे की पैदावार हमेशा से अधिक होती रही है. युद्ध और लंबी यात्राओं के दौरान सैनिक और राहगीर बाजरे की सोगरी को भूनकर, कूटकर और उसमें देशी घी व गुड़ मिलाकर चूरमा तैयार करते थे. शुद्ध घी और गुड़ के मिश्रण के कारण यह चूरमा महीनों तक खराब नहीं होता था. आज भी धार्मिक त्यौहारों और मांगलिक अवसरों पर शेखावाटी के हर घर में बाजरे का चूरमा बड़े चाव से बनाया जाता है.
‘पंच गौरव’ में सीकर के कई उत्पाद पहले से ही शामिलसीकर जिला अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए जाना जाता है. ‘पंच गौरव’ और ओडीओपी योजना के तहत सीकर से इससे पहले भी कई प्रमुख उत्पादों को जगह मिल चुकी है. इनमें गौरव व्यंजन और कृषि उत्पाद के रूप में ‘प्याज’, विशेष प्रजाति में ‘अमरूद’, हस्तशिल्प में ‘लकड़ी का फर्नीचर’, धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में ‘खाटूश्यामजी मंदिर’ तथा खेल श्रेणी में ‘बास्केटबॉल’ का चयन हो चुका है. अब बाजरे के चूरमे को जिले का प्रमुख व्यंजन घोषित किए जाने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कारीगरों व रसोइयों को नया प्रोत्साहन मिलेगा.
शेखावाटी के अन्य शहरों के खास व्यंजनों का भी हो रहा चयनसीकर के बाद अब शेखावाटी के पड़ोसी जिलों में भी स्थानीय पहचान वाले उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभारने की कवायद तेज हो गई है. योजना के अगले चरण में झुंझुनूं जिले के प्रसिद्ध और स्वादिष्ट ‘पेड़ों’ का चयन किया गया है. वहीं चूरू जिले से विशिष्ट पहचान के तौर पर ‘लहसुन’ को चुने जाने की संभावना है, जिस पर पर्यटन विकास समिति की आगामी बैठक के बाद अंतिम मोहर लगाई जाएगी. इस पूरी पहल से शेखावाटी के पारंपरिक स्वाद और उत्पादों को एक नया वैश्विक मंच मिलना तय है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
October 30, 2026, 09:40 IST



