अकाल से राहत के लिए खोदा था बांध, आज उसी किनारे 80 बीघा में विराज रहे हैं बंधे के बालाजी

Last Updated:October 30, 2026, 11:14 IST
Bandhe Ke Balaji Temple History: चूरू बाइपास मार्ग पर कान्हा पहाड़ की तलहटी में स्थित श्री बंधे के बालाजी मंदिर संघर्ष और गहरी आस्था की अनोखी मिसाल है. वर्ष 1956 के भीषण ‘छप्पनिया अकाल’ के दौरान अकाल पीड़ितों को राहत देने के लिए तत्कालीन नाजिम हरिनारायण ने बांध की खुदाई शुरू करवाई थी. इसी बांध के मुहाने पर बालाजी महाराज की स्थापना की गई. जयपुर राजघराने से जुड़ी इस पावन जगह का विकास वर्ष 1987 के बाद मंदिर कमेटी द्वारा कराया गया, जो आज 80 बीघा में फैले एक विशाल और भव्य धार्मिक परिसर का रूप ले चुका है.
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झुंझुनूं: इतिहास के पन्नों में कुछ जगहें ऐसी होती हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनके निर्माण से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी संघर्ष और आस्था की कहानी से बनती है. शहर के चूरू बाइपास मार्ग पर कान्हा पहाड़ की तलहटी में स्थित श्री बंधे के बालाजी मंदिर भी ऐसी ही एक जगह है. आज जहां श्रद्धालुओं की भीड़, भव्य मंदिर और विशाल परिसर नजर आता है, वहां कभी अकाल की मार से जूझते लोगों को राहत देने के लिए बांध की खुदाई कराई गई थी. इसी बांध के मुहाने पर वर्ष 1956 में बालाजी की स्थापना हुई और देखते ही देखते यह स्थान लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.
वर्ष 1956 में राजस्थान ने भीषण अकाल का सामना किया था. इस अकाल की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों को दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया था. हालात ऐसे थे कि कई लोगों को भूख मिटाने के लिए खेजड़ी की छाल तक खानी पड़ी. इतिहास में इस भीषण अकाल को ‘छप्पनिया काल’ के नाम से जाना जाता है. उस दौर में तत्कालीन नाजिम हरिनारायण ने लोगों को रोजगार और राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बांध की खुदाई शुरू करवाई थी. इसी दौरान बांध के मुहाने पर बालाजी महाराज की स्थापना करवाई गई. तभी से यह स्थान श्री बंधे के बालाजी के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
जयपुर राजघराने ने दी थी बांध के लिए जमीनइस बांध के निर्माण के लिए जयपुर के महाराजा मानसिंह की ओर से भूमि उपलब्ध करवाई गई थी. मंदिर की स्थापना के बाद जयपुर राजघराने की ओर से हर साल हनुमान जन्मोत्सव पर सवा रुपया, नारियल और ध्वज भेंट किए जाने की परंपरा रही. यह परंपरा मंदिर के पुराने इतिहास और राजघराने की आस्था से जुड़ी रही है. शुरुआती दौर में स्वामी निर्भयदास महाराज यहां रहकर बालाजी की सेवा और पूजा-अर्चना करते थे. वर्ष 1977 में निर्भयदास महाराज की हत्या के बाद यह स्थान करीब एक दशक तक उपेक्षित और वीरान रहा. उस समय शहर के गिने-चुने दो-चार श्रद्धालु ही यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे.
1987 में मंदिर कमेटी ने संभाली जिम्मेदारी, बदलती गई तस्वीरलंबे समय तक उपेक्षित रहने के बाद वर्ष 1987 में मंदिर कमेटी ने इसकी जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद मंदिर परिसर के विकास का सिलसिला शुरू हुआ. मंदिर ट्रस्टी नरेशचंद्र गाडिया की अगुवाई में करीब 80 बीघा में फैले इस विशाल परिसर में कई निर्माण कार्य करवाए गए. चारदीवारी से लेकर बालाजी के शिखरयुक्त मंदिर, शिवालय और स्वामी निर्भयदास महाराज की कुटिया का निर्माण कराया गया. धीरे-धीरे स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ प्रवासी भक्तों की आवाजाही भी बढ़ने लगी. भक्तों की सुविधा के लिए धर्मशाला का निर्माण करवाया गया. समय के साथ मंदिर परिसर को और सुविधाजनक व आकर्षक बनाने पर ध्यान दिया गया. हाल ही में आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रधान कार्यालय तैयार करवाया गया. परिसर की सुंदरता बढ़ाने के लिए पांच पार्क विकसित किए गए हैं. बच्चों के मनोरंजन के लिए लाइट वाले फव्वारे और झूले भी लगाए गए हैं. कभी अकाल के दौर में राहत कार्य के लिए खोदे गए बांध के किनारे शुरू हुई यह आस्था आज एक विशाल धार्मिक परिसर का रूप ले चुकी है.
हनुमान जन्मोत्सव पर लगता है दो दिवसीय मेलाश्री बंधे के बालाजी मंदिर में हर साल हनुमान जन्मोत्सव पर दो दिवसीय मेले का आयोजन होता है. इस दौरान दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं और बालाजी महाराज को ध्वज निशान अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इसके अलावा हर पूर्णिमा को मंदिर परिसर में कीर्तन का आयोजन होता है. धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यह स्थान लगातार श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है. छप्पनिया काल की भूख और बदहाली से जुड़ी इस जगह की कहानी आज सेवा, श्रद्धा और विकास की मिसाल बन चुकी है. जिस बांध की खुदाई कभी अकाल पीड़ितों को राहत देने के लिए हुई थी, उसी के तट पर स्थापित बालाजी आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
October 30, 2026, 11:14 IST



