कड़वाहट के पीछे छिपे हैं कई गुण, रेगिस्तान में उगने वाला तुम्बा क्यों है इतना खास, जानें इसके उपयोग और खूबियां

Last Updated:October 30, 2026, 13:12 IST
Medicinal Properties of Tumba: बॉटनी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमनलता त्रिपाठी ने बताया कि इन दिनों खुले मैदानों और रेगिस्तानी क्षेत्रों में तुम्बा काफी मात्रा में उग रहा है. इसका वैज्ञानिक नाम सिट्रुलस कोलोसिंथिस (Citrullus colocynthis) है. यह बेल परिवार का पौधा है. देखने में यह सामान्य फल जैसा दिखाई देता है, लेकिन स्वाद में बहुत कड़वा होता है.
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बीकानेर. रेगिस्तान की धरती पर प्रकृति ने कई ऐसी वनस्पतियां दी हैं, जिनका पारंपरिक जीवन और औषधीय ज्ञान में खास महत्व रहा है. इन्हीं में एक है तुम्बा. दिखने में सामान्य फल जैसा नजर आने वाला तुम्बा स्वाद में बेहद कड़वा होता है, लेकिन अपनी पारंपरिक उपयोगिता के कारण इसकी अलग पहचान है. इसे इंद्रायण और कड़वा कद्दू के नाम से भी जाना जाता है. रेतीली जमीन और गर्म वातावरण में आसानी से पनपने वाला यह फल बारिश के मौसम में खेतों और खुले मैदानों में अपने आप उग जाता है. इसकी खास बात यह है कि फल से लेकर बीज और बेल तक का पारंपरिक रूप से अलग-अलग उपयोग किया जाता रहा है.
बॉटनी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमनलता त्रिपाठी ने बताया कि इन दिनों खुले मैदानों और रेगिस्तानी क्षेत्रों में तुम्बा काफी मात्रा में उग रहा है. इसका वैज्ञानिक नाम सिट्रुलस कोलोसिंथिस (Citrullus colocynthis) है. यह बेल परिवार का पौधा है. देखने में यह सामान्य फल जैसा दिखाई देता है, लेकिन स्वाद में बहुत कड़वा होता है. बारिश के दिनों में इसकी बेल तेजी से फैलती है और सर्दी के मौसम तक फल बने रहते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे बेल और फल खराब होने लगते हैं.
बारिश होने पर खाली खेतों में भी तुम्बा की बेलउन्होंने बताया कि रेगिस्तानी इलाकों में खरीफ के सीजन में ग्वार, मोठ, मूंग और बाजरे की फसल के साथ तुम्बा की बेल भी उग आती है. इसकी खेती के लिए किसानों को अलग से कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता. बारिश के पानी से ही इसकी बेल फैलने लगती है. कम बारिश होने पर खाली खेतों में भी तुम्बा की बेल दिखाई देती है. पीले रंग का इसका फल बेहद कड़वा होता है. इसका सीजन करीब चार महीने तक रहता है. सर्दी शुरू होने के साथ ही इसकी बेल और फल धीरे-धीरे सूखने लगते हैं.
रेगिस्तानी वनस्पतियों में अपनी अलग जगह रखतात्रिपाठी ने बताया कि तुम्बा के फल के अंदर गूदा और बीज होते हैं. पारंपरिक रूप से इसके अलग-अलग हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. फल को सुखाने के बाद उससे बीज निकाले जाते हैं. इसके बीजों का भी पारंपरिक औषधीय उपयोग बताया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसके छिलके और बेल को भी उपयोगी माना जाता है. यही वजह है कि तुम्बा केवल एक जंगली फल नहीं, बल्कि रेगिस्तानी वनस्पतियों में अपनी अलग जगह रखता है.
छिलके का उपयोग भी पारंपरिक पशु औषधियों में बतायावे बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में तुम्बा का उपयोग पशुओं से जुड़ी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी किया जाता रहा है. गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट आदि पशुओं के लिए तैयार की जाने वाली कुछ देशी औषधियों में इसके विभिन्न हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके छिलके का उपयोग भी पारंपरिक पशु औषधियों में बताया जाता है. देशी और आयुर्वेदिक औषधियों में भी इसका उल्लेख मिलता है. उन्होंने बताया कि तुम्बा की पूरी बेल और फल पारंपरिक रूप से उपयोगी माने जाते हैं. इसका इस्तेमाल पेट से जुड़ी बीमारियों की पारंपरिक औषधियों में भी किया जाता रहा है. इसके प्राकृतिक तत्वों के कारण औषधीय क्षेत्र में इसकी पहचान है.
तुम्बा को औषधीय गुणों वाला फल माना जाताडॉ सुमनलता ने बताया कि तुम्बा को औषधीय गुणों वाला फल माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे सामान्य फल की तरह खाया जा सकता है. इसका गूदा अत्यधिक कड़वा और विषाक्त हो सकता है. इसे खाने से गंभीर पेट संबंधी समस्याएं और विषाक्त प्रभाव हो सकते हैं. इसलिए इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधीय उपयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूरी है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
October 30, 2026, 13:12 IST



