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Guava Farming: अमरूद के बागों में दिखें ये कीट तो हो जाएं सतर्क, वरना खराब हो सकती है फसल, ऐसे करें बचाव

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अमरूद की खेती करने वाले सावधान, ये दो कीट खराब कर सकते हैं फसल, ऐसे करें बचाव

Last Updated:October 30, 2026, 12:21 IST

Guava Farming Tips: अमरूद की खेती करने वाले किसानों के लिए फल पकने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसी दौरान फल मक्खी और फल चूसक कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. भरतपुर में अमरूद के बागों में इन कीटों के खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. फल मक्खी के प्रकोप से अमरूद खराब हो सकते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. कृषि विभाग के मुताबिक, बागों में गिरे हुए और सड़े फलों को नहीं छोड़ना चाहिए. फल मक्खी की निगरानी और नियंत्रण के लिए फ्रूट फ्लाई ट्रैप उपयोगी हो सकते हैं. वहीं, फल चूसक कीटों के प्रकोप पर नियमित नजर रखना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से नीम आधारित कीटनाशक इस्तेमाल किया जा सकता है. सही समय पर रोकथाम के उपाय अपनाने से अमरूद की गुणवत्ता और किसानों की संभावित आमदनी को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.

भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले में अमरूद के बागों में फल आने के साथ ही अब फल मक्खी और फल चूसक कीटों का खतरा बढ़ने लगा है. इन कीटों के प्रकोप से अमरूद की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को लेकर किसान चिंतित हैं. खासकर फल पकने की अवस्था में इन कीटों का हमला फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए कृषि विभाग ने अमरूद की फसल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सलाह जारी की है.

कृषि विभाग के अनुसार अमरूद के बागों में समय-समय पर पेड़-पौधों और फलों की नियमित देखभाल करना बेहद जरूरी है. किसानों को बागों में खराब और गिरे हुए फलों को इकट्ठा करके नष्ट कर देना चाहिए ताकि फल मक्खी का प्रकोप बढ़ने से रोका जा सके. इसके साथ ही बागों में साफ-सफाई बनाए रखना भी जरूरी है. फल मक्खी से बचाव के लिए किसान बाजार में उपलब्ध उपयुक्त फ्रूट फ्लाई ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं.

नीम आधारित जैविक कीटनाशक का भी कर सकते हैं छिड़काव

फ्रूट फ्लाई ट्रैप के माध्यम से फल मक्खियों को आकर्षित करके उनकी संख्या नियंत्रित करने में मदद मिलती है. वहीं फल चूसक कीटों की नियमित निगरानी करना भी जरूरी है. शुरुआती अवस्था में ही इनके प्रकोप को नियंत्रित किया जा सके इसके अलावा किसान नीम आधारित जैविक कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में छिड़काव भी कर सकते हैं. नीम आधारित घोल कीटों के नियंत्रण में सहायक हो सकता है. हालांकि इसका इस्तेमाल कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.

छिड़काव के समय दवा की मात्रा का रखें विशेष ख्याल

छिड़काव करते समय फलों की अवस्था और दवा की उचित मात्रा का विशेष ध्यान रखें. समय रहते फसल की देखभाल और कीटों की रोकथाम के उपाय अपनाने से अमरूद को नुकसान से बचाया जा सकता है. इससे फलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Bharatpur,Rajasthan

First Published :

October 30, 2026, 12:21 IST

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