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गाय के कृत्रिम गर्भाधान में अच्छे सीमेन से ही नहीं होगा काम, हीट में है या नहीं जांच जरूरी

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गाय के कृत्रिम गर्भाधान में अच्छे सीमेन से ही नहीं होगा काम, जांच जरूरी

Last Updated:October 30, 2026, 18:58 IST

Cow AI Process: गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराने जा रहे हैं, तो केवल अच्छे सीमेन का चुनाव करना ही पर्याप्त नहीं है. गाय हीट में है या नहीं, सीमेन स्ट्रॉ को किस तापमान पर तैयार करना है और AI गन के सही इस्तेमाल सहित कई चीजों की जानकारी बहुत जरूरी है. गर्भाधान के बाद कब जांच करानी है और किसी भी तरह के संक्रमण को लेकर सजग रहने सहित कई बातों का ध्यान रखना होता है.

गर्भाधान की प्रक्रिया के दौरान लापरवाही होने पर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है और गर्भधारण की सफलता भी प्रभावित हो सकती है. बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु विशेषज्ञ डॉ. दुष्यंत यादव ने लाइव डेमो के जरिए कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया समझाते हुए पशुपालकों और AI वर्करों के लिए कई जरूरी सावधानियां बताई.

डॉ. दुष्यंत यादव ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान की शुरुआत गाय की सही स्थिति की जांच से होती है. AI वर्कर को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गाय वास्तव में हीट में है और गर्भवती नहीं है. बिना उचित जांच के गर्भाधान की प्रक्रिया शुरू करने से बचना चाहिए. पशु की स्थिति की पुष्टि होने के बाद ही अगला कदम उठाना चाहिए.

कृत्रिम गर्भाधान में इस्तेमाल होने वाले सीमेन स्ट्रॉ को सुरक्षित रखने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन टैंक का उपयोग किया जाता है. जरूरत पड़ने पर स्ट्रॉ को टैंक से निकालकर थॉइंग यूनिट की मदद से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार किया जाता है. डॉ. दुष्यन्त यादव ने बताया कि थॉइंग यूनिट में पानी का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रखा जाता है. सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के लाइव डेमो में उन्होंने लगभग एक मिनट तक थॉइंग की प्रक्रिया दिखाई.

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सीमेन स्ट्रॉ को तैयार करने के बाद AI गन में लोड किया जाता है. इस दौरान स्ट्रॉ को साफ करना, उसका सिरा सही तरीके से काटना और शीथ लगाना जरूरी है. डॉ दुष्यन्त यादव ने बताया कि शीथ के उस हिस्से को हाथ से छूने से बचना चाहिए, जो गर्भाधान के दौरान इस्तेमाल होता है. ऐसा करने से बैक्टीरिया के संपर्क और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है.

गर्भाधान से पहले गाय के पिछले हिस्से और वल्वा के आसपास सफाई भी जरूरी है. कॉटन की गंदी सतह को बार-बार इस्तेमाल करने के बजाय उसकी साफ सतह का उपयोग करना चाहिए. पूरी प्रक्रिया ट्रेन्ड AI वर्कर द्वारा स्वच्छता और निर्धारित तकनीक के अनुसार की जानी चाहिए.

कृत्रिम गर्भाधान के बाद पशुपालकों को इसकी तारीख और इस्तेमाल किए गए सीमेन का डिटेल्स अपनी रजिस्टर में दर्ज करना चाहिए. सीमेन स्ट्रॉ पर सांड का नाम, नस्ल, सीमेन उपलब्ध कराने वाली संस्था और अन्य जानकारियां लिखी होती हैं. यह रिकॉर्ड भविष्य में पशु की निगरानी और प्रजनन संबंधी जानकारी के लिए उपयोगी होता है.

डॉ. दुष्यन्त यादव ने गर्भाधान के लगभग दो महीने बाद गाय की गर्भावस्था की जांच कराने की सलाह दी. अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध होने पर पशु चिकित्सक की सलाह से पहले भी जांच कराई जा सकती है. सीमेन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन टैंक की स्थिति पर नियमित नजर रखना आवश्यक है. टैंक में नाइट्रोजन का स्तर बनाए रखना और जरूरत के अनुसार उसे भरवाना चाहिए. इसके साथ ही सीमेन की क्वालिटी और शुक्राणुओं की मूवमेंट की जांच भी संबंधित संस्था के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार करानी चाहिए.

कृत्रिम गर्भाधान की सफलता केवल सीमेन की क्वालिटी पर निर्भर नहीं करती. गाय की सही पहचान, उचित समय पर गर्भाधान, सीमेन की सही हैंडलिंग, उपकरणों की स्वच्छता और गर्भाधान के बाद गर्भावस्था की जांच भी महत्वपूर्ण हैं. पशुपालकों को चाहिए कि वे प्रशिक्षित AI वर्कर की मदद लें और पशु के प्रजनन से जुड़ी सभी जानकारियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें

First Published :

October 30, 2026, 18:58 IST

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