मेजर सर्जरी के बाद भी नहीं तोड़ पाई हौसला, श्रद्धा ठाकुर ने फिर शुरू की तैराकी, महिलाओं के लिए मिसाल

Last Updated:October 31, 2026, 15:23 IST
Kota News: कोटा की समाजसेवी श्रद्धा ठाकुर ने अपने मजबूत इरादों और हौसले से मुश्किलों को मात देकर नई मिसाल पेश की है. हाथ और पैर में फ्रैक्चर तथा बड़ी मेजर सर्जरी से गुजरने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. अब वह दोबारा तैराकी कर रही हैं. उनका यह प्रेरणादायक सफर बताता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से दोबारा शुरुआत की जा सकती है.
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कोटा: कहते हैं कि इरादे मज़बूत हों तो मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं. समाजसेवी श्रद्धा ठाकुर ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. पैर और हाथ के फ्रैक्चर और एक बड़ी मेजर सर्जरी के बाद भी वह आज फिर से तैराकी कर रही हैं. उनकी हिम्मत शहर की ओर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
श्रद्धा की तैराकी का सफ़र साल 2009-10 में शुरू हुआ. वे अपने बेटे को नयापुरा स्थित तरणताल में तैराकी सिखाने ले जाया करती थीं. इसी दौरान उनके पति अमित ठाकुर ने उन्हें खुद भी पानी में उतरने के लिए प्रेरित किया. पति और बेटे के साथ श्रद्धा पूल में उतरीं और यहीं से तैराकी उनका शौक और फिर जुनून बन गई.
उम्र की कई महिलाएं 25 मीटर तैरने में ही करीब एक मिनट50 मीटर लंबे और 30 मीटर चौड़े इस ओलंपिक पूल में श्रद्धा 50 मीटर की दूरी फ्रीस्टाइल में सिर्फ़ 1 मिनट 40 सेकंड में पूरी कर लेती हैं। उनका कहना है कि उनकी उम्र की कई महिलाएं 25 मीटर तैरने में ही करीब एक मिनट लगा देती हैं। श्रद्धा के लिए तैराकी केवल खेल नहीं, बल्कि मेडिटेशन है। वे कहती हैं कि पानी में उतरकर उन्हें सुकून मिलता है और खाली समय का सही उपयोग भी होता है।
एक हादसे में उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गयाश्रद्धा का सफ़र आसान नहीं रहा. मार्च में हुए एक हादसे में उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया, जिससे तैराकी बंद करनी पड़ी. दो-तीन महीने में सुधार होने पर मई-जून में उन्होंने दोबारा पूल का रुख किया, लेकिन अगस्त में हाथ में फ्रैक्चर हो गया और तैराकी एक बार फिर रुक गई.
5 अप्रैल को उनकी एक बहुत बड़ी मेजर सर्जरी हुईइसके बाद 5 अप्रैल को उनकी एक बहुत बड़ी मेजर सर्जरी हुई. श्रद्धा बताती हैं कि उस समय उन्हें लगा कि शायद अब वे सालों तक तैराकी नहीं कर पाएंगी. तीन महीने बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर डॉक्टर से पूछा कि क्या वे तैर सकती हैं. डॉक्टर ने हौसला बढ़ाते हुए जवाब दिया, “हाँ, बिल्कुल, आप क्यों नहीं कर सकतीं?”
श्रद्धा ने मई से नियमित तैराकी फिर शुरू कर दीडॉक्टर से हरी झंडी मिलने के बाद श्रद्धा ने मई से नियमित तैराकी फिर शुरू कर दी. वे कहती हैं कि जहाँ लोग इतनी बड़ी सर्जरी के बाद सालों तक बेडरेस्ट करते हैं, वहीं उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया. आज वे अपने डॉक्टरों के सहयोग से लगातार तैराकी कर रही हैं. श्रद्धा की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए मैसेज है जो मुश्किलों के सामने हार मान लेते हैं. उनका हौसला साबित करता है कि सही सोच और मज़बूत इरादों के साथ हर चुनौती को पार किया जा सकता है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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October 31, 2026, 15:23 IST



