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बड़े हमले से पहले हुआ ‘ट्रायल ब्लास्ट’? न बारूद, न डेटोनेटर… श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक धमाके का पैटर्न बना पहेली

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न बारूद, न डेटोनेटर… श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक धमाके का पैटर्न बना पहेली

Last Updated:November 04, 2026, 21:44 IST

Sri Ganganagar Railway Track Blast: श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए रहस्यमयी विस्फोट ने देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. घटनास्थल से किसी आम विस्फोटक, केमिकल, तार या डेटोनेटर का न मिलना और धमाके के वक्त किसी ट्रेन का ट्रैक पर न होना जांच अधिकारियों के लिए एक उलझी हुई पहेली बन गया है.न बारूद, न डेटोनेटर... श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक धमाके का पैटर्न बना पहेलीZoomNIA और मिलिट्री इंटेलिजेंस रेलवे ट्रैक पर धमाके की जांच में जुटी है.

Sri Ganganagar Railway Track Blast: राजस्थान के श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच के लिए देश की कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं. राजस्थान ATS, इंटेलिजेंस टीम, NIA, IB और मिलिट्री इंटेलिजेंस के अधिकारी फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर जांच में जुटे रहे. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस भी अपने स्तर पर इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं.

ब्लास्ट का तरीका एजेंसियों के लिए बना पहेलीइस ब्लास्ट को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके तरीके को लेकर है. शुरुआती जांच में घटनास्थल से ऐसा कोई सामान्य विस्फोटक सामान बरामद नहीं हुआ है, जो आमतौर पर इस तरह के धमाकों में इस्तेमाल होता है. मौके से न कोई पाउडर मिला है, न कोई दूसरा केमिकल, न तार, न डेटोनेटर और न ही कील जैसी कोई चीज बरामद हुई है. यही वजह है कि जांच एजेंसियां इस ब्लास्ट के पैटर्न को समझने में जुटी हैं. क्या विस्फोट के लिए किसी अलग तकनीक का इस्तेमाल किया गया? क्या विस्फोटक का कोई ऐसा तरीका अपनाया गया, जिसके निशान घटनास्थल पर आसानी से नहीं मिले? फिलहाल इन सवालों के जवाब फॉरेंसिक जांच और तकनीकी पड़ताल के बाद ही सामने आ सकेंगे.

रेलवे ट्रैक की टाइमिंग ने खड़े किए कई सवालजिस जगह रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट हुआ, वहां की भौगोलिक स्थिति भी जांच का अहम हिस्सा है. ट्रैक के एक तरफ सड़क है, जबकि दूसरी तरफ कुछ दूरी पर एक किसान परिवार का घर मौजूद है. आसपास कोई CCTV कैमरा नहीं है. जांच में सामने आया है कि जिस ट्रैक पर ब्लास्ट हुआ, वहां आखिरी ट्रेन धमाके से करीब 40 मिनट से एक घंटे पहले गुजरी थी. इसके बाद अगली ट्रेन अगले दिन सुबह गुजरनी थी. यानी धमाके के वक्त उस ट्रैक पर कोई ट्रेन मौजूद नहीं थी. यहीं से जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर मकसद किसी पैसेंजर ट्रेन को निशाना बनाना था, तो ट्रेन के गुजरने के वक्त विस्फोट क्यों नहीं किया गया? क्या धमाके का मकसद ट्रेन को उड़ाना नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाना या किसी बड़ी साजिश का परीक्षण करना था?

क्या ट्रायल ब्लास्ट था या किसी नए स्लीपर सेल को दिया गया टास्क?जांच एजेंसियां इस संभावना समेत कई पहलुओं की पड़ताल कर सकती हैं कि कहीं यह किसी बड़े हमले से पहले किया गया ट्रायल ब्लास्ट तो नहीं था. क्या किसी नए स्लीपर सेल को अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या किसी संगठन का भरोसा जीतने के लिए इस तरह का टास्क दिया गया था? क्या इस धमाके के जरिए सुरक्षा एजेंसियों को कोई संदेश देने की कोशिश की गई? हालांकि, फिलहाल इन संभावनाओं की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि धमाके का मकसद क्या था और इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है.

ISI और शहजाद भट्टी नेटवर्क की पुरानी साजिशों की भी जांचरेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश का एंगल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश रचने के आरोप सामने आ चुके हैं. इसके अलावा आतंकी फरतुल्लाह गौरी भी पहले रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी दे चुका है. ऐसे में जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि श्रीगंगानगर ब्लास्ट का कहीं पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क या किसी पुराने मॉड्यूल से कोई कनेक्शन तो नहीं है.

खुरासान मॉड्यूल का एंगल भी जांच के दायरे मेंपिछले साल खुरासान मॉड्यूल से जुड़े लोगों की ओर से भी रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिशों का मामला सामने आया था. इस मॉड्यूल के सिलसिले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कई गिरफ्तारियां हुई थीं. तेलंगाना पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर भी इस नेटवर्क की जांच की गई थी. अब श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए ब्लास्ट के बाद एजेंसियां इस पुराने नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों के कनेक्शन की भी पड़ताल कर सकती हैं.

About the Authorराकेश रंजन कुमार

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…

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New Delhi,Delhi

First Published :

November 04, 2026, 21:42 IST

ISI और शहजाद भट्टी नेटवर्क की पुरानी साजिशों की भी जांचरेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश का एंगल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिश रचने के आरोप सामने आ चुके हैं. इसके अलावा आतंकी फरतुल्लाह गौरी भी पहले रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी दे चुका है. ऐसे में जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि श्रीगंगानगर ब्लास्ट का कहीं पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क या किसी पुराने मॉड्यूल से कोई कनेक्शन तो नहीं है.

खुरासान मॉड्यूल का एंगल भी जांच के दायरे मेंपिछले साल खुरासान मॉड्यूल से जुड़े लोगों की ओर से भी रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की साजिशों का मामला सामने आया था. इस मॉड्यूल के सिलसिले में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कई गिरफ्तारियां हुई थीं. तेलंगाना पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर भी इस नेटवर्क की जांच की गई थी. अब श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए ब्लास्ट के बाद एजेंसियां इस पुराने नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों के कनेक्शन की भी पड़ताल कर सकती हैं.

पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स भेजने वाले नेटवर्क पर नजरइस मामले में जांच एजेंसियों ने कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की है. सूत्रों के मुताबिक, ये लोग पहले पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए राजस्थान में हथियार, ड्रग्स और गोला-बारूद की खेप पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़े रहे हैं. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन स्थानीय लोगों का किसी ऐसे नेटवर्क से संपर्क था, जो रेलवे ट्रैक पर ब्लास्ट करने की साजिश में शामिल हो सकता है.

पंजाब पुलिस गिरफ्तार कुलवंत सिंह से भी कर रही पूछताछपंजाब पुलिस हाल ही में गिरफ्तार किए गए कुलवंत सिंह से भी पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां उससे पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाली हथियारों और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई को लेकर इनपुट जुटाने की कोशिश कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर महीने में ड्रोन के जरिए श्रीगंगानगर में RDX और तुर्किये में बनी जिगाना पिस्टल की खेप पहुंचने की जानकारी भी जांच के दायरे में है. एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस खेप का रेलवे ट्रैक ब्लास्ट से कोई संबंध है या नहीं. क्या हथियारों और विस्फोटक सामग्री की सप्लाई करने वाला नेटवर्क किसी बड़ी साजिश की तैयारी में लगा हुआ था?

पंजाब में सेना और अर्धसैनिक बलों को लेकर जारी हुआ अहम अलर्टसूत्रों के मुताबिक, दीपावली से पहले पंजाब में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा इनपुट जारी किया गया था. इस इनपुट में आशंका जताई गई थी कि पाकिस्तान की ISI सेना और अर्धसैनिक बलों के बड़े प्रतिष्ठानों के साथ-साथ उनके वाहनों और काफिलों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकती है. इस इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं. अब श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट के बाद राजस्थान और पंजाब से जुड़े सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नेटवर्क की भी गहन जांच की जा रही है.

सबसे बड़ा सवाल: आखिर ब्लास्ट का मकसद क्या था?श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक ब्लास्ट की जांच में फिलहाल कई सवाल अहम हैं.– क्या यह किसी बड़ी आतंकी साजिश से पहले किया गया ट्रायल ब्लास्ट था?– क्या किसी नए स्लीपर सेल को यह टास्क दिया गया था?– क्या रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाकर सुरक्षा एजेंसियों को कोई संदेश देने की कोशिश हुई?– क्या पाकिस्तान से संचालित ISI नेटवर्क या शहजाद भट्टी ग्रुप का इससे कोई कनेक्शन है?– क्या पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार और RDX भेजने वाले नेटवर्क की इसमें कोई भूमिका है?– क्या आने वाले दिनों में रेलवे, सेना या अर्धसैनिक बलों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोई बड़ी योजना थी?

फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे. लेकिन जिस तरह से राजस्थान ATS, NIA, IB, मिलिट्री इंटेलिजेंस, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस की टीमें इस मामले की पड़ताल में जुटी हैं, उससे साफ है कि एजेंसियां इस घटना को गंभीर सुरक्षा चुनौती के तौर पर देख रही हैं. लोकल पुलिस ने विस्फोटक एक्ट रेलेव एक्ट सरकारी प्रोपर्टी को नुकसान पहचाने और BNS की अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. श्रीगंगानगर रेलवे ट्रैक पर हुआ यह धमाका सिर्फ एक रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने की घटना था या किसी बड़ी साजिश का शुरुआती संकेत, इसका खुलासा जांच के बाद ही होगा.*

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