Agriculture: 8वीं पास किसान संजय का कमाल, उगा रहे 5 रंगों का मक्का, खेती से कमाई का बनाया अनोखा मॉडल

सीकर: आमतौर पर खेत में पीले या सफेद रंग का मक्का ही दिखाई देता है, लेकिन सीकर के किसान संजय यादव के खेत में पांच अलग-अलग रंगों का मक्का उगता है. आठवीं तक पढ़ाई करने वाले संजय ने खेती को सिर्फ परंपरा के तौर पर नहीं अपनाया, बल्कि प्रयोगशाला की तरह खेत में लगातार प्रयोग किए. प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, देसी बीज और घरेलू कीटनाशकों के प्रयोग से उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे देखने और सीखने के लिए अब दूसरे राज्यों से भी किसान उनके खेत तक पहुंच रहे हैं.
संजय यादव ने प्राकृतिक खेती और मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने के बाद अपने खेत में प्रयोग शुरू किए. करीब दो साल तक अलग-अलग तकनीकों और बीजों पर रिसर्च करने के बाद उन्होंने पांच रंगों का मक्का उगाना शुरू किया. रंग-बिरंगे मक्के की गुणवत्ता और आकर्षक स्वरूप ने लोगों का ध्यान खींचा. होटलों और रेस्टोरेंट से भी इसकी मांग आने लगी. अब संजय ने पांच रंगों वाले मक्के के लिए पेटेंट का आवेदन भी किया है.
रसायन छोड़े तो खेती की बचत 70 फीसदी तक पहुंची
संजय बताते हैं कि पहले एक हेक्टेयर खेत में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल करते थे. उस समय खेती की लागत में करीब 30 प्रतिशत तक बचत हो पाती थी. बाद में उन्होंने रसायनों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर प्राकृतिक खेती की तकनीक अपनाई. देसी संसाधनों से खाद और कीटनाशक तैयार करने के कारण खेती की लागत काफी कम हो गई और बचत करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई. अब खेत उनके लिए कम लागत में ज्यादा उत्पादन का मॉडल बन चुका है.
पीएम मोदी को भी बताया अपना खेती मॉडल
अक्टूबर 2025 में धनधान्य योजना के उद्घाटन के मौके पर संजय यादव को दिल्ली बुलाया गया था. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने मॉडल की जानकारी दी. संजय ने बताया कि उनके फार्म में देसी बीज, देसी गाय के गोमूत्र और गोबर से जीवामृत, घनजीवामृत, वर्मी कंपोस्ट, सरल कंपोस्ट और अन्य जैविक संसाधन तैयार किए जाते हैं. इनका इस्तेमाल खेत में करने से बाहर से खाद और दवाइयां खरीदने का खर्च काफी घट गया.
घर में बनाते हैं अग्नि अस्त्र और ब्रह्मास्त्र
फसल में कीट नियंत्रण के लिए भी संजय बाजार से महंगे कीटनाशक खरीदने के बजाय घर पर ही जैविक घोल तैयार करते हैं. अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. उनका कहना है कि खेत में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने से लागत घटती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है.
एक ही खेत में सब्जी, मसाले और हल्दी उगाते हैं
दुर्गापुरा पिपराली स्थित उनके कृषि फार्म पर मिर्च, टमाटर, भिंडी, लौकी, करेला, बैंगन, फूलगोभी, ब्रोकली, मूली और मौसम के अनुसार दूसरी सब्जियां भी उगाई जाती है. मिश्रित खेती के तहत हल्दी और काली हल्दी का उत्पादन भी किया जा रहा है.0मसाला फसलों में राई और सौंफ भी शामिल हैं. संजय अपने फार्म पर बीज उत्पादन करते हैं और इन्हें दूसरे किसानों को भी उपलब्ध करवाते हैं.
सब्जियां बेचकर 4 लाख और मशरूम से 5 लाख करते हैं कमाई
संजय सप्ताह में रविवार और बुधवार को सीकर शहर में अपनी खेत की सब्जियां सीधे ग्राहकों को बेचते हैं. इससे सालाना करीब तीन से चार लाख रुपए की आय हो रही है. उनके पास पांच देसी गायें हैं. इनके दूध से घी तैयार कर सालाना तीन से चार लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होती है. वहीं बटन, ओयस्टर और मिल्की मशरूम के उत्पादन से सालाना पांच लाख रुपए से अधिक की कमाई हो रही है. संजय का फार्म अब सिर्फ उत्पादन का केंद्र नहीं रहा, बल्कि किसानों के प्रशिक्षण का केंद्र भी बन गया है. वह करीब 150 किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखा चुके हैं. उनके मॉडल को देखने के लिए राजस्थान के अलावा दूसरे राज्यों से भी किसान पहुंच रहे हैं.



