प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है बेसन और मूंगदाल का चीला, जानिये ज्यादा सही विकल्प

भारतीय नाश्ते में चीला एक ऐसा व्यंजन है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है. आमतौर पर इसे बेसन या मूंगदाल से बनाया जाता है. दोनों ही विकल्प प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. लेकिन जब बात स्वास्थ्य लाभों की आती है, तो अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि बेसन का चीला ज्यादा फायदेमंद है या मूंगदाल का. आइए जानते हैं दोनों के गुण और उनके फायदे.
बेसन के चीले के फायदे
बेसन चने की दाल से तैयार किया जाता है, इसलिए इसमें प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं. बेसन का चीला लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती. यही वजह है कि वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा नाश्ता माना जाता है.
बेसन में आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. इसका सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है. साथ ही, इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है, जिसके कारण यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देता.
मूंगदाल के चीले के फायदे
मूंगदाल का चीला प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है. इसमें आवश्यक अमीनो एसिड, फोलेट, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं. मूंगदाल आसानी से पच जाती है, इसलिए यह बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है.
फिटनेस और मसल्स बिल्डिंग करने वाले लोग अक्सर मूंगदाल के चीले को अपनी डाइट में शामिल करते हैं क्योंकि यह शरीर की मांसपेशियों की रिकवरी और विकास में मदद करता है. मूंगदाल में मौजूद पोटैशियम हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है.
दोनों में कौन है बेहतर?
अगर केवल प्रोटीन की बात करें तो मूंगदाल का चीला थोड़ा आगे माना जाता है. वहीं, फाइबर की मात्रा और लंबे समय तक पेट भरे रखने के मामले में बेसन का चीला बेहतर विकल्प हो सकता है.
वजन घटाने वाले लोगों के लिए बेसन का चीला अधिक लाभकारी साबित हो सकता है, जबकि अधिक प्रोटीन की जरूरत वाले लोगों, जिम जाने वालों और खिलाड़ियों के लिए मूंगदाल का चीला बेहतर माना जाता है. पाचन संबंधी समस्याओं वाले लोगों को भी मूंगदाल का चीला ज्यादा सूट करता है.



