Agriculture: पपीते की खेती करने वाले किसान हो जाएं सावधान, जलभराव से फैल रहा ये रोग, ऐसे करें बचाव

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पपीते की खेती करने वाले किसान सावधान! जलभराव से फैल रहा ये रोग, ऐसे करें बचाव
Last Updated:August 20, 2026, 06:05 IST
Papaya Crop Diseases Prevention Tips: सिरोही में पपीते की खेती बड़े स्तर पर होती है और यहां रेड लेडी समेत कई किस्मों की पैदावार ली जाती है. मानसून के दौरान पपीते की फसल में जड़ और तना गलन रोग किसानों के लिए बड़ी समस्या बन जाता है. सिरोही कृषि विज्ञान केंद्र की विषय विशेषज्ञ डॉ. कामिनी पाराशर के अनुसार खेत में लंबे समय तक जलभराव रहने से यह रोग तेजी से फैलता है. इससे पौधे की जड़ और तना प्रभावित होते हैं, जिसके चलते पौधे सूखने लगते हैं और फल भी ठीक से नहीं लग पाते. इससे उत्पादन घटने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. विशेषज्ञ ने किसानों को खेत में पानी की निकासी की पुख्ता व्यवस्था करने और पौधों के तने के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी है. रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से निकालकर नष्ट करना चाहिए. जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोडर्मा युक्त खाद या कंपोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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सिरोही: राजस्थान में पपीते की खेती के मामले में सिरोही जिला अग्रणी माना जाता है. यहां रेड लेडी किस्म के अलावा अन्य कई वैरायटी की पपीते की खेती होती है. मानसून में पपीते की फसल में सबसे ज्यादा जड़ और तना गलन रोग की वजह से नुकसान होता है. यह बीमारी पौधे में खास तौर पर पौधे के आसपास जलभराव की वजह से फैलती है. जड़ और तने को होने वाले नुकसान की वजह से इसका उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ता है.
सिरोही कृषि विज्ञान केंद्र की विषय विशेषज्ञ डॉ. कामिनी पाराशर ने इस रोग से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों और उपचार के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बारिश के समय में पपीते की फसल में जड़ और तना गलन रोग का कारण लंबे समय तक पानी के खेत में भराव होना है. यह न सिर्फ पौधे पर प्रतिकूल असर डालता है बल्कि उत्पादन को भी बरी तरह से प्रभावित कर सकता है.
जल निकासी की करें पुख्ता व्यवस्था
बारिश में पपीते के पौधों को रोग से बचाने के लिए बगीचे में बारिश के पानी की निकासी की पुख्ता व्यवस्था करें. पौधों के तने के आस-पास पानी जमा नहीं होने दें. वहीं बारिश में ज्यादा सिंचाई की जरुरत भी नहीं होती हैं. मिट्टी के सूखने के बाद ही पौधों की सिंचाई की जानी चाहिए. अगर किसी पौधे में रोग फैल जाता है तो उसे तुरंत खेत से निकालकर नष्ट कर देना चाहिए. इससे अन्य पौधों में यह रोग नहीं फैलता है. किसान को पपीते के पौधरोपण के समय स्वस्थ और रोगमुक्त पौधे लगाने चाहिए.
इस तरह करें उपचार
जड़ और तना गलन रोग के जैविक तरीके से नियंत्रण के लिए ट्राईकोडर्मा वाली खाद या कंपोस्ट खाद का उपयोग करना चाहिए. वहीं रोग का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर फफूंदनाशक दवाइयां का छिड़काव करना चाहिए. इससे समय रहते इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है. रोग के फैलने से पौधे जल्दी सूखने लगते हैं और फल भी ठीक से नहीं लग पाते हैं. ऐसे में कम उत्पादन से किसान को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Sirohi,Rajasthan
First Published :
August 20, 2026, 06:05 IST



