Agriculture News: कम बारिश और मौसम के उतार-चढ़ाव का फसलों पर असर, पिछले साल के मुकाबले भाव हुए कम

भीलवाड़ा. भीलवाड़ा की कृषि उपज मंडी में इन दिनों अलग-अलग फसलों की आवक तेजी से हो रही है. मंडी में प्रतिदिन करीब 500 से 600 बोरियां फसल पहुंच रही हैं. इसके बावजूद किसानों को अपनी उपज के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं. इस बार मानसून के दौरान कम बारिश और मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण फसलों पर असर पड़ा है. वहीं, पिछले साल के मुकाबले इस बार कई फसलों के भाव कम मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसानों का कहना है कि खेती में बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर लगातार खर्च बढ़ रहा है. इसके बावजूद जब वे फसल बेचने मंडी पहुंचते हैं, तो उम्मीद के मुताबिक भाव नहीं मिलते. ऐसे में किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. एक तरफ मौसम की मार और दूसरी तरफ कम भाव मिलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है.
भीलवाड़ा मंडी में इन फसलों के रहे भावअगर बात करें भीलवाड़ा की कृषि उपज मंडी में फसलों के भाव की, तो गेहूं के भाव 2631 से 2703 रुपए प्रति क्विंटल, मक्का (हाइब्रिड) के 2651 से 2661 रुपए, मूंगफली के 5000 से 5010 रुपए, साबुत चना दाल के 5750 से 6195 रुपए, मक्का (देसी लाल) के 2904 से 2914 रुपए, सरसों के 7200 से 7210 रुपए, ज्वार के 2000 से 2010 रुपए, जौ के 2125 से 2135 रुपए, ग्वार के 5950 से 5960 रुपए, साबुत उड़द दाल (काली दाल) के 8000 से 8910 रुपए, सोयाबीन के 4200 से 4210 रुपए, साबुत मूंग दाल के 8505 से 8515 रुपए और मक्का (देसी सफेद) के भाव 2010 से 2110 रुपए प्रति क्विंटल रहे.
मौसम की मार और कम भाव से किसान परेशान
भीलवाड़ा के आसींद क्षेत्र के रहने वाले किसान नारायण लाल ने बताया कि इस बार मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर असर पड़ा है. वहीं, मंडी में उपज बेचने पर पिछले साल जैसे भाव नहीं मिल रहे हैं. खेती में बीज, खाद, दवाई और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है. फसल तैयार करने में काफी मेहनत लगती है, लेकिन मंडी में सही भाव नहीं मिलने से खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है.
कम बारिश ने पहले से ही किया नुकसानकम बारिश और मौसम में बदलाव ने पहले ही नुकसान पहुंचाया है. ऐसे में अगर फसल के अच्छे दाम नहीं मिलेंगे, तो किसान की आर्थिक स्थिति और खराब होगी. आने वाले दिनों में फसलों के भाव में सुधार होगा, जिससे उन्हें राहत मिल सकेगी. फिलहाल, मंडी में फसलों की आवक जारी है, लेकिन उचित दाम नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं. किसानों की मांग है कि उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिले, ताकि खेती पर होने वाला खर्च निकल सके और उन्हें अपनी मेहनत का सही लाभ मिल सके.



