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तुलसी के पत्ते चबाने से दांतों को नुकसान? एक्सपर्ट से जानिए क्या है सच

Last Updated:October 26, 2026, 21:00 IST

तुलसी का पौधा भारतीय घरों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा में भी खास महत्व रखता है. लोग मौसम बदलने पर तुलसी के पत्तों से चाय, काढ़ा और गुनगुना पानी तैयार करते हैं. वहीं, कई घरों में बड़े-बुजुर्ग तुलसी के पत्तों को सीधे दांतों से चबाने से मना करते हैं. इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ धारणाएं भी प्रचलित हैं. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल ने तुलसी के पत्तों के इस्तेमाल और सेवन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी है.

तुलसी का पौधा भारतीय घरों में आमतौर पर देखने को मिलता है. लोग इसकी पूजा करते हैं और पारंपरिक रूप से इसके पत्तों का इस्तेमाल चाय, काढ़ा और गुनगुना पानी तैयार करने में भी करते हैं.

कई परिवारों में तुलसी के पत्तों को सीधे दांतों से चबाने से बचने की परंपरा है. इसका एक कारण धार्मिक मान्यता है. हालांकि, दांतों से तुलसी के पत्ते चबाने से नुकसान होने के दावे को स्थापित वैज्ञानिक तथ्य के रूप में पेश नहीं करना चाहिए.

आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, तुलसी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से औषधीय पौधे के रूप में किया जाता रहा है. उन्होंने पत्तों को सीधे चबाने के बजाय पानी के साथ लेने का सुझाव दिया है. सेवन का तरीका और मात्रा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय करना बेहतर है.

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तुलसी के पत्ते इस्तेमाल करने से पहले उन पर लगी धूल, गंदगी या कीड़ों की जांच कर लें. खराब, सड़े या गले हुए पत्तों का इस्तेमाल न करें. साफ और स्वस्थ पत्तों को पानी से अच्छी तरह धोने के बाद ही उपयोग में लें.

तुलसी के पत्तों को धोकर चाय, काढ़े या गुनगुने पानी में मिलाया जा सकता है. हालांकि, तुलसी का सेवन जरूरत से ज्यादा करने से बचें. किसी भी घरेलू नुस्खे को बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए.

हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है. अगर आप किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं या नियमित रूप से तुलसी का सेवन शुरू करना चाहते हैं, तो पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लें. तुलसी को किसी बीमारी के इलाज का विकल्प न बनाएं.

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October 26, 2026, 21:00 IST

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