Rajasthan

Agriculture News I sikar news I मूंग-मोठ की फसल में रोग का खतरा बढ़ा, समय रहते करें ये 5 जरूरी उपाय

होमफोटोकृषि

जीवाणु झुलसा बिगाड़ सकता है मूंग-मोठ की पैदावार, बचाव के लिए करें ये काम

Last Updated:August 17, 2026, 11:07 IST

Agriculture News: बारिश के मौसम में मूंग और मोठ की फसल में जीवाणु झुलसा रोग का खतरा बढ़ जाता है. पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखना इसका शुरुआती संकेत है. समय रहते छिड़काव, जल निकासी, स्वस्थ बीज, खरपतवार नियंत्रण और खेत की नियमित निगरानी से किसान फसल को रोग से बचाकर बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.

बारिश के मौसम में मूंग और मोठ की फसलों में रोगों का प्रकोप कई गुना अधिक बढ़ जाता है. खेतों में जीवाणु झुलसा रोग प्रकोप भी अधिक नजर आता है. ऐसे में अगर किसान समय रहते अपनी फसल के बचाव का उपाय नहीं करेंगे तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इस रोग की शुरुआत पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे धब्बों के रूप में होती है. धीरे-धीरे धब्बे बढ़ने से पत्तियां कमजोर होकर सूखने लगती हैं और इसका सीधा असर फसल की बढ़वार व उत्पादन पर पड़ सकता है.

साफ मौसम में करें छिड़काव: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि जीवाणु झुलसा रोग की रोकथाम के लिए मौसम साफ होने पर किसान स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 1 ग्राम और कॉपर आधारित फफूंदनाशक 20 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. छिड़काव करते समय ध्यान रखें की पत्तियों के दोनों तरफ घोल अच्छी तरह पहुंचना चाहिए. वहीं, ये भी ध्यान रखें कि तेज धूप, बारिश या तेज हवा के दौरान छिड़काव न करे.

खेत में जलभराव न होने दें: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि मूंग और मोठ अन्य फसलों की तुलना में कम अवधि में तैयार होने वाली दलहनी फसलें हैं, लेकिन लगातार बारिश और खेत में पानी रुकने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचता है, तो किसी भी किमत पर खेत में पानी जमा नहीं होने दे. समय रहते पहले ही जल निकासी की व्यवस्था कर ले. यानी, जहां पानी जमा हो रहा है, वहां नालियां बनाकर पानी बाहर निकालें. अच्छी जल निकासी से जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है और कई तरह के रोगों का खतरा भी कम हो जाता है.

Add as Preferred Source on Google

बीज की गुणवत्ता पर दें ध्यान: मूंग और मोठ की अच्छी पैदावार के लिए स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. किसान बुवाई से पहले बीज की साफ-सफाई और उचित बीज उपचार करें. स्वस्थ बीज से पौधों का अंकुरण बेहतर होता है और शुरुआती अवस्था में फसल मजबूत रहती है. खेत में बहुत घनी बुवाई करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि अधिक नमी और हवा का कम संचार रोगों के फैलाव को बढ़ा सकता है.

बारिश के बाद करें खेत की निगरानी: मानसून के दौरान खेत में नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करना किसानों के लिए सबसे जरूरी कामों में से एक है. पत्तियों पर भूरे, पीले या असामान्य धब्बे दिखाई देने पर तुरंत पहचान करें. रोगग्रस्त पौधों को अनदेखा करने से संक्रमण आसपास के पौधों तक फैल सकता है. विशेष रूप से बारिश के बाद खेत का निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षण मिलते ही इसका तुरंत समाधान करें.

मूंग-मोठ में खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी: फसल के शुरुआती 20 से 30 दिनों में खरपतवार खेत में तेजी से बढ़ते हैं. इससे मुख्य फसल को पानी, पोषक तत्व और धूप के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए समय पर निराई-गुड़ाई या खरपतवार नियंत्रण उपाय अपने चाहिए. खेत को बहुत अधिक खरपतवार से मुक्त रखने पर फसल की बढ़वार बेहतर होती है और पौधों के बीच हवा का संचार भी बना रहता है.

संतुलित पोषण से बढ़ेगी फसल की ताकत: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि मूंग और मोठ दलहनी फसलें होने के कारण इनके लिए संतुलित पोषण प्रबंधन जरूरी है. किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए. जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से अनावश्यक हरी बढ़वार हो सकती है. ऐसे में सिंचाई, पोषण, खरपतवार नियंत्रण और रोग प्रबंधन को एक साथ अपनाकर किसान फसल को स्वस्थ रख सकते हैं और मौसम की मार के बीच बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

First Published :

August 17, 2026, 11:07 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj