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Opinion: जिसे जनता ने दिया आशीर्वाद, उसके लिए ऐसी भाषा? अपने मुद्दे उठाएं, BJP को गाली देकर क्या हासिल करेंगे नसीरुद्दीन शाह?

Last Updated:October 24, 2026, 14:30 IST

मशहूर एक्टर नसीरुद्दीन शाह अपनी अदाकारी के लिए जितने जाने जाते हैं, उससे कहीं ज्यादा वे अपने बयानों और राजनीतिक टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद की राजनीति और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों से जुड़े एक मुद्दे को उठाया. नसीरुद्दीन शाह ने बीजेपी को ‘बेहद झूठी पार्टी’ और प्रतिशोध की राजनीति करने वाला करार दिया.

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Amazon Prime DayTop Deals InsideOpinion: अपने मुद्दे उठाएं, BJP को गाली देकर क्या हासिल करेंगे नसीरुद्दीन शाह?Zoomनसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बीजेपी के खिलाफ फिर जहर उगला है.

नई दिल्ली. भारत में लोकतंत्र है. यहां चुनाव में जनता तय करती है कि शासन कौन करेगा. देश के करोड़ों लोगों ने वोट देकर बीजेपी को पहले देश की सत्ता सौंपी फिर बंगाल में भी सत्ता परिवर्तन भी जनता ने ही किया. लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सबको है. सवाल पूछना भी जरूरी है. सरकार की आलोचना करना भी किसी नागरिक का अधिकार है. लेकिन सवाल यह है कि क्या अपनी बात रखने के लिए अपमानजनक भाषा ही सबसे सही रास्ता है? शायद नसीरुद्दीन शाह को अपमानजनक भाषा और सवाल में अंतर नहीं पता. अगर ऐसा होता तो शायद फिर वह ये गलती नहीं करते.

दरअसल, नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो में बीजेपी को लेकर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने पार्टी को ‘झूठी’ बताया. साथ ही आरोप लगाया कि जो लोग उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं, उनसे बदला लिया जा रहा है. उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों का मुद्दा भी उठाया. मुद्दा उठाना गलत नहीं है. अगर छात्रों के साथ अन्याय हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए. जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. लेकिन जब किसी राजनीतिक दल के लिए ऐसी भाषा इस्तेमाल होती है, जिसे करोड़ों लोगों ने वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया है, तब बहस मुद्दों से हटकर शब्दों पर आ जाती है.

मुद्दे उठाएं, व्यक्तिगत और राजनीतिक नफरत क्यों?

नसीरुद्दीन साहब अगर सत्यजीत रे इंस्टीट्यूट के छात्रों के साथ कोई नाइंसाफी हुई है तो उस पर बात होनी चाहिए. प्रशासन से पारदर्शिता की मांग करना छात्रों का लोकतांत्रिक हक है. इस मामले पर एक जिम्मेदार नागरिक की तरह बहस की जा सकती थी. लेकिन आपने अपनी बात रखने के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया. उसने पूरे मामले को एक राजनीतिक रंग दे दिया. बीजेपी को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करना और उसे गालियों से नवाजना सिर्फ आपकी व्यक्तिगत नाराजगी को दिखा रहा है. इससे असल मुद्दे पीछे छूट रहे हैं.

ये पहली बार थोड़ी है

वैसे ये पहले बार नहीं है. इससे पहले भी नसीरुद्दीन शाह बीजेपी की नीतियों और फैसलों की आलोचना करते रहे हैं. यह उनका अधिकार है लेकिन हर बार इतनी कड़ी भाषा अपनाने से क्या उनकी बात ज्यादा असरदार बनती है? या फिर असली मुद्दा पीछे छूट जाता है? लोकतंत्र में शब्दों की ताकत बहुत होती है. एक सम्मानजनक भाषा विरोध को मजबूत बनाती है. जबकि कड़वे शब्द अकसर लोगों को दो हिस्सों में बांट देते हैं. जो लोग पहले से सहमत हैं, वे ताली बजाते हैं. जो असहमत हैं, वे पूरी बात सुनना ही छोड़ देते हैं.

आप कलाकार हैं आपकी भूमिका भी अहम है

नसीरुद्दीन साहब आपकी पहचान आपकी अदाकारी और गंभीर भूमिकाओं से रही है. उनके पास अनुभव है और उनकी बात सुनी जाती है. इसलिए उनकी जिम्मेदारी भी कम नहीं है. दरअसल, फिल्मी हस्तियों का समाज में एक बड़ा प्रभाव होता है. लोग उनकी बात को सुनते और देखते हैं. ऐसे में, अगर देश का कोई वरिष्ठ कलाकार इस तरह की बयानबाजी करेगा तो समाज में गलत मैसेज जाता है. मुद्दों को तार्किक तरीके से उठे तो बहस में भी मजा आता है. लेकिन आपकी भाषा में तो नफरती जहर उगलता दिखाई दे रहे है. राजनीतिक विरोध का मतलब ये नहीं है कि हर बहस को बीजेपी बनाम विरोधी दल बना दिया जाए.

कड़वे सवाल पूछे, लेकिन शब्दों की मर्यादा भी न छोड़े

अगर संस्थानों में कोई समस्या है तो उसे तथ्यों के साथ सामने रखा जाए. अगर छात्रों के साथ गलत हुआ है तो उसके सबूत पेश किए जाएं. इससे बहस मजबूत होगी. आखिरकार, लोकतंत्र में सबसे प्रभावी आवाज वही होती है, जो कड़वे सवाल पूछे, लेकिन शब्दों की मर्यादा भी न छोड़े. क्योंकि गुस्सा कुछ देर तक सुर्खियां बना सकता है, मगर सम्मानजनक भाषा से संवाद लंबे समय तक असर छोड़ता है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए Hindi उत्तरदायी नहीं है.)

About the AuthorShikha Pandey

15 साल पहले पत्रकारिता से शुरू हुआ शिखा पाण्डेय का सफर आज भी उसी जुनून के साथ जारी है. दिसंबर 2019 में न्यूज18 हिंदी से जुड़ने के बाद वह चीफ सब एडिटर के रूप मे…

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Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh

First Published :

October 24, 2026, 14:30 IST

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