‘अमेरिका की धौंस नहीं चलेगी, भारत में रहना है तो हमारा संविधान मानना होगा!’ सरकार ने मेटा को चेताया

Agency:एजेंसियां
Last Updated:August 06, 2026, 19:19 IST
सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) को सरकार ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर भारत की सरजमीं पर व्यापार करना है, तो भारत के कानून और संविधान के आगे सिर झुकाना ही होगा. विदेशी नियमों की आड़ में मनमानी करने का दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है.मेटा को सरकार ने चेताया.
फेसबुक- इंस्टाग्राम चलाने वाली कंपनी मेटा (Meta) को सरकार ने दो टूक समझा दिया है कि अगर आपको भारत में काम करना है तो भारत के संविधान के हिसाब से चलना होगा. यहां अमेरिका कानून लागू करने की कोशिश न करें. गुरुवार को मेटा के अधिकारी फिर सरकार के सामने पेश हुए. उन्हें साफ साफ समझा दिया गया कि जो नियम कानून कायदे हमारे हैं, उसके हिसाब से ही आपको सभी कंपनियों को व्यवहार करना होगा.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच गंभीर चर्चा चल रही है. सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी सोशल मीडिया नेटवर्क खुद को देश के कानूनसे ऊपर नहीं मान सकता. मेटा को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि उसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के ढांचे के भीतर रहकर काम करना होगा और इसके तहत तय किए गए उचित प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन करना होगा.
मेटा का एल्गोरिदम छान रही सरकार
सरकार अब मेटा के काम करने के तरीके की गहरी जांच कर रही है. सूत्रों का कहना है कि सरकार मेटा की टीम से उनके एल्गोरिदम, कंप्लायंस मैकेनिज्म और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले उपायों को लेकर सीधे सवाल कर रही है. इसके साथ ही, सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके द्वारा दिखाए जाने वाले पेड कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए या नहीं.
मेटा के खिलाफ यह सख्त कदम तब उठाया गया, जब प्लेटफॉर्म ने किसी अज्ञात कारण से प्रधानमंत्री से जुड़ी एक पोस्ट को हटा दिया था. इस मामले पर संचार और आईटी मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य और सांसद अनूप संजय धोत्रे ने अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि समिति के अध्यक्ष ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मेटा से माफी की मांग की थी, जिसके बाद मेटा के प्रमुख ने इस पर माफी मांग ली है.
फ्रीडम ऑफ स्पीच की भी सीमाएं
धोत्रे ने मामले को स्पष्ट करते हुए कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच का पूरा सम्मान है, लेकिन इसकी भी कुछ सीमाएं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल मेटा ही नहीं, बल्कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा, ताकि लोगों को उनके प्लेटफॉर्म्स की वजह से कोई व्यक्तिगत नुकसान न उठाना पड़े.
About the Authorज्ञानेंद्र मिश्रDeputy News Editor
ज्ञानेंद्र कुमार मिश्रा हिंदी पत्रकारिता का एक जाना-पहचाना नाम हैं. उन्हें मीडिया में करीब 20 साल का एक्सपीरियंस है. वर्तमान में वह हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं …
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First Published :
August 06, 2026, 19:14 IST



