Nagaur Mandi Price: नागौर मंडी में बदले फसलों के भाव, जीरा-सौंफ हुए सस्ते, सरसों ने पकड़ी रफ्तार

नागौर. राजस्थान के नागौर जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में अगस्त के पहले पांच दिनों के दौरान कृषि जिंसों के भाव में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है. यहां सबसे ज्यादा दबाव मसाला वाले फसलों पर नजर आया है. नागौर मंडी में जीरा, सौंफ, मूंग और तिल के भाव में नरमी दर्ज की गई. दूसरी ओर सरसों ने हल्की मजबूती आई है. इसके अलावा इसबगोल, चना, ज्वार और दाणा मेथी जैसी प्रमुख फसलों के भाव लगभग स्थिर बने रहे. व्यापारियों का मानना है कि फिलहाल बाजार में नई आवक और सीमित खरीदारी का असर दिखाई दे रहा है, लेकिन मांग बढ़ते ही कीमतों में फिर से सुधार आने की संभावना है.
मंडी के व्यापारियों के अनुसार, 1 अगस्त को जीरे का अधिकतम भाव 21,800 रुपए प्रति क्विंटल था, जो 5 अगस्त तक घटकर 21,500 रुपए प्रति क्विंटल रह गया. इसी तरह सौंफ के अधिकतम भाव में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई और इसमें 1,250 रूपए की गिरावट आई है. भाव घटकर अब 11,500 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गई. मूंग के अधिकतम भाव में करीब 200 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज की गई. वहीं काला और सफेद तिल के दामों में भी 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई, जिससे मसाला और तिलहन बाजार पर दबाव साफ दिखाई दिया.
तिलहन बाजार में मांग का आधार अभी भी मजबूत
हालांकि सभी फसलों में गिरावट का माहौल नहीं रहा. इसबगोल लगातार 13 हजार रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर बना हुआ है, जबकि चना करीब 5,600 रुपए, ज्वार 6,000 रुपए और दाणा मेथी भी लगभग 6,000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास कारोबार करती रही. सरसों (40 प्रतिशत तेल) के भाव में हल्की तेजी देखने को मिली. इसके अलावा 1 अगस्त को इसका औसत भाव 7,500 रुपए प्रति क्विंटल था, जो 5 अगस्त तक बढ़कर 7,600 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया. इससे संकेत मिल रहे हैं कि तिलहन बाजार में मांग का आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है.
जीरा और सौंफ जैसी फसलों में तेजी लौट सकती है
व्यापारियों का कहना है कि इस समय बाजार पर नई आवक का दबाव है, जबकि खरीदार भी सीमित मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं. यही वजह है कि मसाला फसलों में तेजी की बजाय हल्की नरमी बनी हुई है. हालांकि राहत की बात यह है कि गिरावट बहुत अधिक नहीं है और बाजार अभी संतुलित स्थिति में बना हुआ है. यदि आने वाले दिनों में घरेलू और निर्यात मांग में सुधार होता है तो जीरा और सौंफ जैसी फसलों में फिर से तेजी लौट सकती है.
सरसों के भाव में और सुधार देखने को मिल सकता है
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया सरसों की कीमतों में मजबूती का मुख्य कारण तेल मिलों की लगातार बनी हुई मांग है. यदि यह मांग आगे भी इसी तरह कायम रहती है तो सरसों के भाव में और सुधार देखने को मिल सकता है. वहीं किसान और व्यापारी दोनों की निगाह अब निर्यात ऑर्डर, नई खरीद और आगामी आवक पर टिकी हुई है. बाजार की मौजूदा स्थिति संकेत दे रही है कि फिलहाल मसाला फसलों पर दबाव जरूर है, लेकिन मांग बढ़ते ही कीमतों में सुधार की संभावनाएं भी मजबूत बनी हुई है.



