Date Palm Farming Bikaner | बीकानेर में खजूर की खेती और ऑफशूट प्लांटिंग तकनीक | Date Palm Farming in Bikaner Rajasthan

Last Updated:April 24, 2026, 06:04 IST
Date Palm Farming in Bikaner Rajasthan: बीकानेर में खजूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने ऑफशूट प्लांटिंग और कंट्रोल सीडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया है. जिले में 31 हजार पौधों की बढ़ती मांग को देखते हुए स्थानीय स्तर पर नर्सरी विकसित करने की रणनीति बनाई गई है. पश्चिमी राजस्थान की लवणीय जमीन को उपजाऊ बनाने के उद्देश्य से सरकार भी खजूर की खेती पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान कर रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की समय पर उपलब्धता और किसानों के प्रशिक्षण से बीकानेर को खजूर उत्पादन का वैश्विक हब बनाया जा सकता है. यह पहल किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी.
ख़बरें फटाफट

बीकानेर में खजूर की खेती और ऑफशूट प्लांटिंग तकनीक
बीकानेर. पश्चिमी राजस्थान की वह जमीन जिसे कभी बंजर, खाली या लवणीय मानकर छोड़ दिया जाता था, अब वही जमीन किसानों के लिए बम्पर कमाई का जरिया बनने वाली है. आधुनिक ‘कंट्रोल सीडलिंग’ और ऑफशूट प्लांटिंग तकनीकों के माध्यम से खजूर की खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बीकानेर में एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई है. जिले में खजूर के करीब 31 हजार पौधों की भारी मांग को देखते हुए विशेषज्ञों ने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की समयबद्ध आपूर्ति और स्थानीय स्तर पर नर्सरी तैयार करने पर विशेष जोर दिया है. यह पहल मरुस्थलीय कृषि की तस्वीर बदलने का माद्दा रखती है.
हाल ही में स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. इसमें केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH), काजरी बीकानेर, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर और उद्यानिकी विभाग के शीर्ष वैज्ञानिकों ने खजूर उत्पादन की बाधाओं और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की. विशेषज्ञों का एकमत से मानना है कि पश्चिमी राजस्थान की जलवायु और यहाँ की खारी मिट्टी खजूर की खेती के लिए दुनिया के सबसे अनुकूल क्षेत्रों में से एक है. हालांकि, उच्च गुणवत्ता वाले ‘प्लांटिंग मटेरियल’ की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे अब ऑफशूट प्लांटिंग तकनीक के जरिए दूर किया जाएगा.
तकनीक और संसाधनों का सही मेलकेन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक जगदीश राणे ने बैठक में स्पष्ट किया कि किसानों के बीच खजूर को लेकर भारी उत्साह है, लेकिन पौधों की सीमित उपलब्धता उनकी राह रोक रही है. यदि हम किसानों को खुद पौध तैयार करने की प्रक्रिया में साझीदार बनाएं, तो उत्पादन की गति तेज हो सकती है. अनुसंधान निदेशक डॉ. एन.के. शर्मा ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान के लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर की खेती हो रही है. इस रकबे को बढ़ाने के लिए विभिन्न सरकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि किसानों को भटकना न पड़े.
सरकारी सहायता और भविष्य की योजनाएंखजूर की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी खजाना खोल रही है. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत खजूर का बगीचा लगाने वाले किसानों को 75% तक का भारी अनुदान (Subsidy) दिया जा रहा है. इसके साथ ही विशेषज्ञ अब डीएनए फिंगरप्रिंट तकनीक के जरिए पौधों की शुद्धता सुनिश्चित करने और उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर काम कर रहे हैं. ‘कंट्रोल सीडलिंग’ तकनीक के माध्यम से अब वेस्टलैंड और लवणीय जल वाले क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार करना संभव होगा. यदि इन योजनाओं पर धरातल पर काम हुआ, तो बीकानेर जल्द ही देश में खजूर उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Bikaner,Bikaner,Rajasthan
First Published :
April 24, 2026, 06:04 IST



