Rajasthan

Aravali Mahadev Mandir: बारिश में स्वर्ग जैसा दिख रहा अरावली का महादेव मंदिर, देखने उमड़ रही भीड़

Last Updated:June 23, 2026, 16:23 IST

Aravali Mahadev Temple: राजस्थान की अरावली पर्वतमाला में स्थित महादेव मंदिर मानसून के दौरान विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहे हैं. बारिश के मौसम में पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं, झरने बहने लगते हैं और बादलों से घिरी प्राकृतिक वादियां इन मंदिरों की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं. आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मानसून के दौरान मंदिरों के आसपास का वातावरण बेहद शांत, मनमोहक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है. अरावली की गोद में बसे ये प्राचीन महादेव मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण हैं. सप्ताहांत और छुट्टियों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है. यदि आप बारिश के मौसम में प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करना चाहते हैं.

जालोर जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर नारणावास क्षेत्र के ऐसराणा पर्वत पर स्थित श्री जागनाथ महादेव मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक आस्था स्थल है. नारणावास कस्बे से लगभग साढ़े चार किलोमीटर पूर्व दिशा में अरावली पर्वत श्रृंखला की उपशाखा ऐसराणा पहाड़ी पर बसे इस मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को बरबस आकर्षित करती है. चारों ओर फैले सुनहरे रेतीले धोरे, ऊंचे-ऊंचे हरे-भरे पहाड़ और उन पर उगी विभिन्न प्रकार की झाड़ियां इस स्थान को अद्भुत बनाती हैं. खासकर मानसून के दौरान यहां हरियाली और बहती जलधाराएं इस स्थल की खूबसूरती को और बढ़ा देती हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण बन जाता है.

सिरे मंदिर, जिसे रत्नेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन और ऐतिहासिक आस्था स्थल है जो योगी जालंधरनाथ से जुड़ा हुआ माना जाता है. मान्यता है कि योगी जालंधरनाथ ने पास स्थित भंवर गुफा में कठोर तपस्या की थी और उनके चमत्कारों से प्रभावित होकर जालोर के राजा रतन सिंह ने उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हुए विक्रम संवत 1708 (1651 ईस्वी) में इस शिव मंदिर का निर्माण करवाया. पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर मानसून के दौरान बेहद आकर्षक नजर आता है, जब चारों ओर बादल, हरियाली और पहाड़ियों से बहता पानी एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं. यहां तक पहुंचने का मार्ग ट्रैकिंग जैसा अनुभव देता है, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ युवाओं और पर्यटकों को भी खासा आकर्षित करता है.

झरणेश्वर (झणेश्वर) महादेव मंदिर राजस्थान के जालोर जिले में भेटाला के पास एसरणा की पहाड़ियों, जिसे स्वर्णगिरि पर्वत भी कहा जाता है, पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और प्राकृतिक गुफा मंदिर है. यह स्थान अपने शांत वातावरण, मनमोहक झरनों और कठिन लेकिन रोमांचक ट्रैकिंग मार्ग के लिए प्रसिद्ध है. मानसून के दौरान यह स्थल अपने नाम के अनुरूप पूरी तरह जीवंत हो उठता है, जब यहां प्राकृतिक जलधाराएं तेज बहाव के साथ बहती हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है. मंदिर के आसपास का पवित्र और सुकून भरा वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, वहीं प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान भीड़-भाड़ से दूर भक्ति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम बन जाता है.

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सुरेश्वर महादेव मंदिर राजस्थान के जालोर जिले के अहोर क्षेत्र के पास ऐसराना पहाड़ियों में स्थित एक प्राचीन और पूजनीय तीर्थ स्थल है, जो अपने स्वयंभू शिवलिंग और लगभग 700 वर्ष पुराने पौराणिक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है. सुरम्य पहाड़ियों के बीच बसा यह मंदिर मानसून के दौरान जालौर का सबसे लोकप्रिय आकर्षण बन जाता है, जब यहां पहाड़ियों से गिरते झरने और चारों ओर फैली हरियाली एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करते हैं. बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन और पिकनिक के लिए पहुंचते हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन जाता है.

चितहरणी महादेव, जिसे “चिंताओं को हरने वाली चितहरणी” के नाम से भी जाना जाता है, जालोर से करीब 16 किमी दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक शांत और प्राकृतिक आस्था स्थल है. मानसून सक्रिय होते ही यह पूरा इलाका हरियाली से घिर जाता है और पहाड़ियों व मरुस्थल के बीच बसा यह स्थान एक सुंदर पर्यटन स्थल का रूप ले लेता है. बारिश के दौरान यहां छोटे-छोटे झरने बहने लगते हैं, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देते हैं. यहां बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने और श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. खास बात यह है कि बारिश के बाद लगभग 8 महीनों तक यहां हरियाली बनी रहती है, जिससे यह स्थान लंबे समय तक प्रकृति प्रेमियों और भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है.

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