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senior living homes| where to live after retirement| रिटायरमेंट के बाद कहां रहें? फ्लैट या सीनियर लिविंग, बच्चों के बिना भी कहां रहना है बेस्ट?

Senior living: नौकरी से रिटायरमेंट के बाद हर किसी का जीवन बिताने की अपनी योजना होती है, हालांकि इस दौरान कई बार लोग परेशान भी होते हैं कि अब आगे का जीवन कहां बिताएं? फ्लैट में रहें, गांव के पुश्तेनी मकान में रहें या सीनियर लिविंग में रहें? वहीं कुछ लोगों के बच्चे भी बड़े हो चुके होते हैं तो वे या तो विदेशों में पहुंच गए होते हैं या देश में ही दूसरी लोकेशनों पर रहते हैं तो ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल ये ही है कि अब उनकी देखभाल कौन करेगा?

तो आपको बता दें कि आज के समय में भारत के कई परिवारों की यही कहानी है. हालांकि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बुजुर्ग माता-पिता अपने घर में रहें या किसी सीनियर लिविंग कम्युनिटी में जाएं. असली सवाल यह है कि आने वाले 20–30 वर्षों में उनकी रहने की जगह उन्हें स्वतंत्र जीवन, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा, सामाजिक जुड़ाव और मानसिक सुकून दे पाएगी या नहीं, खासकर तब जब बच्चे किसी आपात स्थिति में तुरंत उनके पास नहीं पहुंच सकते.

इस बारे में जेएलएल एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया की Senior Living Report 2025 कहती है कि भारत में 2024 में बुजुर्गों की संख्या 15.67 करोड़ थी, जो 2050 तक लगभग 34.6 करोड़ हो सकती है. ऐसे में बढ़ती उम्र, छोटे परिवार और विदेशों में बसते बच्चे अब रिटायरमेंट के बाद के जीवन को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर देते हैं.

बुजुर्गों के ल‍िए द‍िल्‍ली-एनसीआर में सीन‍ियर ल‍िव‍िंग कॉन्‍सेप्‍ट तेजी से बढ़ रहा है.

कई बुजुर्ग आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और अपने घर से भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं. फिर भी घर संभालना, स्टाफ मैनेज करना, अस्पताल जाना और आपात स्थिति से निपटना उम्र बढ़ने के साथ कठिन हो सकता है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत किए गए लॉन्गिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया के अनुसार, 60 की उम्र के बाद लंबे समय तक रहने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ता जाता है और लगातार देखभाल की जरूरत होती है. इसलिए यह फैसला कि बुजुर्ग कहां रहें, सिर्फ आराम का नहीं बल्कि बेहतर जीवन और सुरक्षित भविष्य का भी सवाल है.

आशियाना हाउसिंग के संयुक्त प्रबंध निदेशक अंकुर गुप्ता कहते हैं, ‘आज के समय में वरिष्ठ नागरिक सिर्फ रिटायरमेंट के बाद रहने की जगह नहीं ढूंढ़ रहे हैं. वे ऐसा जीवन चाहते हैं जो परेशानी से मुक्त हो, जहां वे अपनी शर्तों पर स्वतंत्र और संतुलित जीवन जी सकें. अब रिटायरमेंट को लोग जीवन के एक नए अध्याय के रूप में देख रहे हैं, जहां वे अपने शौक पूरे कर सकें, नई चीजें सीख सकें, अच्छे दोस्त बना सकें, लोगों से जुड़े रहें और हर दिन नए उद्देश्य के साथ जी सकें. जब घर की देखभाल, सुरक्षा और रोजमर्रा के प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां किसी प्रोफेशनल टीम द्वारा संभाली जाती हैं, तो वे अपने समय का आनंद लेने और अपनी पसंद की गतिविधियों पर ध्यान दे सकते हैं. जिन परिवारों के बच्चे विदेश में रहते हैं, उनके लिए भी यह भरोसे की बात होती है कि उनके माता-पिता एक सुरक्षित और अच्छी तरह संचालित माहौल में आत्मविश्वास के साथ रह रहे हैं. सीनियर लिविंग का उद्देश्य सिर्फ रहने की सुविधा देना नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी एक सक्रिय, स्वतंत्र और खुशहाल जीवन जीने का अवसर देना है.’

सीनियर लिविंग में आखिर क्या होता है खास?

आज की सीनियर लिविंग कम्युनिटीज पहले की तरह केवल आश्रय स्थल नहीं हैं. अब इन्हें सक्रिय और स्वतंत्र जीवन जीने वाले लोगों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है. बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, लंबी आयु और बेहतर आर्थिक योजना के कारण कई बुजुर्ग अब रिटायरमेंट के बाद भी यात्रा करना, नई चीजें सीखना, लोगों से मिलना और सम्मान के साथ जीवन जीना चाहते हैं.

सी‍न‍ियर ल‍िव‍िंग सोसायटीज खासतौर पर 60 के पार वाले लोगों के ल‍िए बनाई जा रही हैं.

इन आधुनिक परियोजनाओं में निजी घरों के साथ स्वास्थ्य सेवाएं, इमरजेंसी सहायता, भोजन, हाउसकीपिंग, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों की सुविधाएं होती हैं. इनका उद्देश्य जीवन को सीमित करना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की मुश्किलों को कम करना है.

फ्लैट या घर में रहना कैसे हो जाता है मुश्किल

विशेषज्ञ कहते हैं कि अपने घर या फ्लैट में रहना हर कोई चाहता है लेकिन इससे भी ज्यादा बड़ी जरूरत होती है आपात स्थिति में मिलने वाली सहायता और रोजाना की देखभाल की. अगर कोई घर में देखभाल करने वाला नहीं है तो फ्लैट में रहने पर वे सभी सुविधाएं बुजुर्गों को नहीं मिल पातीं, जिनकी उन्हें रोजाना जरूरत होती है. उन्हें तत्काल मदद नहीं मिल पाती. यही वजह है कि सीनियर लिविंग कॉन्सेप्ट तेजी पकड़ रहा है.

मनासम सीनियर लिविंग के के सह-संस्थापक अनंतराम वी. वर्यूर कहते हैं, “बुजुर्ग अपनी पसंद से जीवन जीना चाहते हैं, लेकिन उनके पास जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं और सहायता भी होनी चाहिए. विदेश में रहने वाले बच्चों को भी सुकून मिलता है कि उनके माता-पिता ऐसी कम्युनिटी में हैं जहां स्वतंत्रता और देखभाल दोनों साथ मिलते हैं.”

इन वजहों से जरूरी सीनियर लिविंग

. आज अकेलापन बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. पहले विदेश में रहने वाले बच्चे माता-पिता के लिए नौकर, कुक, ड्राइवर, केयरटेकर और अन्य व्यवस्थाएं अलग-अलग करते थे. रोजमर्रा का सामान, दवाइयां और दूसरी जरूरतें भी दूर बैठकर संभालनी पड़ती थीं. लेकिन आज अगर बुजुर्ग किसी अच्छी सीनियर लिविंग कम्युनिटी में रहते हैं, तो ये सभी सुविधाएं एक ही जगह मिल जाती हैं. इससे उनकी जिंदगी आसान होती है और कई बार खर्च भी कम हो जाता है.
. अक्सर लोग बुजुर्गों के साथ रहने को लेकर तब सोचते हैं जब कोई स्वास्थ्य समस्या या आपात स्थिति आ जाती है, लेकिन सीनियर लिविंग में रहते हुए आपके लिए ऐसी कोई भी इमरजेंसी स्थिति आसान हो जाती है और बेहतर सुविधा मिल सकती हैं.
. अक्सर बुजुर्ग पेरेंट्स के लिए घर देखते हुए अस्पतालों की दूरी, विशेषज्ञ डॉक्टर, इमरजेंसी सुविधा, प्रशिक्षित केयरगिवर्स, सुरक्षित डिजाइन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना होता है लेकिन सीनियर लिविंग में ये सभी चीजें एक छत के नीचे ही मिल जाती हैं.
. बुजुर्गों को सीनियर लिविंग में बेहतर सामाजिक जीवन भी मिलता है. समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, फिटनेस गतिविधियां, पुस्तक समूह, हॉबी क्लब और स्वयंसेवा जैसे अवसर बुजुर्गों को सक्रिय, खुश और आत्मविश्वासी बनाए रखते हैं.

अमाया वेरा वीटा के सह-संस्थापक ध्रुव बदरुका कहते हैं, “किसी भी रिटायरमेंट कम्युनिटी का चुनाव केवल उसकी आज की सुविधाओं को देखकर नहीं करना चाहिए. यह भी देखना जरूरी है कि समय के साथ बदलती जरूरतों में वह कितनी मदद कर सकती है. अच्छी स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा, आसान पहुंच और सामाजिक जुड़ाव ये सभी बातें साथ मिलकर बेहतर जीवन देती हैं. उद्देश्य बुजुर्गों की स्वतंत्रता छीनना नहीं, बल्कि उसे लंबे समय तक बनाए रखना है.”

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड की इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 भी बुजुर्गों को सहयोग की जरूरत पर जोर देती है जो बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और सक्रिय जीवन दे सकें. आने वाले समय में और भी अधिक परिवार ऐसे होंगे जहां बच्चे विदेश में रहेंगे और माता-पिता किसी और देश में होंगे, इसलिए समय रहते योजना बनाना जरूरी है.

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