सिर्फ पूजा ही नहीं, औषधि का भी खजाना है अशोक का पेड़! पत्तियां दिला सकती हैं कई समस्याओं से राहत

Last Updated:June 30, 2026, 13:01 IST
भारत में अशोक का पेड़ धार्मिक आस्था के साथ-साथ आयुर्वेद में भी विशेष महत्व रखता है. इसकी पत्तियों, छाल, फूल और बीज का उपयोग वर्षों से पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता रहा है. गोंडा की आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य मालती देवी के अनुसार अशोक की पत्तियों में सूजन कम करने, त्वचा को स्वस्थ रखने और घाव भरने जैसे कई प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं. हालांकि इसका सेवन या उपयोग हमेशा योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.
गोंडा: भारत में अशोक का पेड़ सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष भी माना जाता है. इसकी छाल, फूल, बीज और पत्तियों का उपयोग वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है. खासकर अशोक के पत्तों में कई ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार माने जाते हैं. हालांकि किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अशोक की पत्तियों या इसके किसी भी भाग का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
गोंडा की आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य मालती देवी बताती हैं कि अशोक के पत्तों में सूजन कम करने, दर्द से राहत देने और शरीर को संक्रमण से बचाने वाले कई प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं. इसी वजह से आयुर्वेद में इनका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है.
मालती देवी के अनुसार अशोक के पत्तों में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में होने वाली हल्की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इसकी पत्तियों का लेप बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाने की सलाह दी जाती रही है. इससे सूजन और दर्द में राहत मिलने की बात कही जाती है.
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यदि शरीर पर हल्का घाव या खरोंच हो जाए तो अशोक की पत्तियों का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार इसकी पत्तियों में मौजूद प्राकृतिक तत्व घाव को जल्दी भरने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि गहरे या गंभीर घाव की स्थिति में डॉक्टर से इलाज कराना ही सबसे जरूरी है.
अशोक के पत्तों में कुछ ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं जो बैक्टीरिया और फंगस के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं. यही कारण है कि आयुर्वेद में इन्हें त्वचा संबंधी कुछ सामान्य समस्याओं में भी उपयोग किया जाता है. हालांकि यह आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं है.
त्वचा की देखभाल में भी अशोक के पत्तों का महत्व बताया गया है. आयुर्वेद में इसकी पत्तियों का लेप चेहरे और त्वचा पर लगाने की परंपरा रही है. माना जाता है कि इससे त्वचा को प्राकृतिक पोषण मिलता है और हल्की जलन या खुजली जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है.
वैद्य मालती देवी बताती हैं कि अशोक का पेड़ महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद में विशेष स्थान रखता है. हालांकि इसके लिए मुख्य रूप से पेड़ की छाल का उपयोग किया जाता है, लेकिन पत्तियों का भी कुछ पारंपरिक औषधीय योगों में प्रयोग किया जाता है. माना जाता है कि यह महिलाओं की कुछ सामान्य समस्याओं में सहायक हो सकता है. इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए.
मालती देवी बताती है कि कुछ आयुर्वेदिक ग्रंथों में अशोक के पौधे को मानसिक शांति देने वाला भी माना गया है. इसकी पत्तियों और अन्य भागों का उपयोग कुछ पारंपरिक औषधियों में किया जाता है, जो तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक मानी जाती हैं.
मालती देवी बताती है कि आयुर्वेद में अशोक की पत्तियों का उपयोग अलग-अलग तरीकों से किया जाता है. कुछ लोग इसका लेप बनाकर बाहरी रूप से लगाते हैं, जबकि कुछ आयुर्वेदिक योगों में इसकी पत्तियों का काढ़ा या अन्य रूपों में प्रयोग किया जाता है. लेकिन इसकी मात्रा, उपयोग का तरीका और अवधि हमेशा किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए. वैद्य मालती देवी का कहना है कि प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि किसी भी औषधि का बिना जानकारी के सेवन किया जाए. गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को अशोक की पत्तियों का उपयोग बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए. यदि सेवन के बाद किसी प्रकार की एलर्जी, उल्टी, पेट दर्द या अन्य परेशानी महसूस हो तो तुरंत इसका उपयोग बंद कर डॉक्टर से संपर्क करें.
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