Barmer Handicraft: थार की सूखी रेत में नहीं, कपड़े पर उगा रहीं हरियाली, बाड़मेर की महिलाओं का हुनर पहुंचा जापान तक

Last Updated:September 26, 2026, 11:28 IST
सविता हस्तकला संस्थान से जुड़ी महिला कारीगरों की इस कला की मांग अब बाड़मेर और राजस्थान तक सीमित नहीं है. सविना हस्तकला के निदेशक केवलाराम मेघवाल बताते है कि हाथ से तैयार होने वाली इन कलाकृतियों ने देश के बाहर भी अपनी जगह बनाई है और जापान तक इनकी मांग पहुंच रही है.
बाड़मेर. थार की तपती रेत में जहां पेड़ उगाना किसी चुनौती से कम नहीं है, वहीं बाड़मेर की दस्तकार महिलाओं ने कपड़े पर पौधों को जीवंत उगा दिया है. रंग-बिरंगे धागों से जड़, तना, शाखाएं, पत्तियां, फूल और पक्षियों को उकेरकर ये महिलाएं कपड़े को जीवंत पेड़ का रूप दे रही है. इतना ही नही बाड़मेर की इन महिलाओं के हाथ की इस अनूठी कढ़ाई की खूबसूरती अब बाड़मेर से निकलकर जापान तक पहुंच रही है.
बाड़मेर की कारीगर महिलाएं अपने हुनर से कपड़ों पर हरियाली रच रही हैं. साधारण कपड़े पर रंग-बिरंगे धागों से जड़, तना, शाखाएं, पत्तियां, फूल और पक्षियों की आकृतियां उकेर रही है. सूई और रंग-बिरंगे धागों के सहारे कपड़े पर पहले जड़ें आकार लेती हैं फिर तना ऊपर उठता है और उसकी शाखाओं पर पत्तियां और फूल खिलने लगते हैं. कहीं डालियों पर चहचहाते पक्षी नजर आते हैं तो कहीं रंगों से सजे फूल और पत्तियां पूरे कपड़े को ऐसी जीवंतता देते हैं मानो थार की सूखी धरती पर अचानक कोई हरा-भरा पेड़ उग आया हो.
जापान में भी सविता हस्तकला के उत्पादों की है मांग
सविता हस्तकला संस्थान से जुड़ी महिला कारीगरों की इस कला की मांग अब बाड़मेर और राजस्थान तक सीमित नहीं है. सविना हस्तकला के निदेशक केवलाराम मेघवाल बताते है कि हाथ से तैयार होने वाली इन कलाकृतियों ने देश के बाहर भी अपनी जगह बनाई है और जापान तक इनकी मांग पहुंच रही है. महिलाएं महीन हाथ की कढ़ाई से बेड कवर, बेडशीट, साड़ी, दुपट्टे और तकियों पर पेड़-पौधों की पूरी दुनिया रच रही हैं. हर फूल, पत्ती, शाखा और पक्षी को धागों से अलग-अलग आकार देकर तैयार किया जाता है.
5-10 हजार रुपये में बिकती है एक बेडशीट
महिला दस्तकार अनिता के मुताबिक इस खास बेडशीट को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगता है. महीन सुई और रंग-बिरंगे धागों से कपड़े पर एक-एक फूल, पत्ती, शाखा और दूसरी आकृतियों को हाथ से उकेरा जाता है. हाथ की बारीक कढ़ाई और इसमें लगने वाले लंबे समय के चलते इसकी कीमत भी करीब 5 हजार से 10 हजार रुपये तक होती है. थार की जमीन पर भले ही हरियाली कम दिखाई दे रही है लेकिन यहां की महिलाओं के हाथों से निकले रंगीन धागे कपड़ों पर ऐसी हरियाली रच रहे हैं जो दूर देश तक बाड़मेर की कला और हुनर की कहानी गूंज रही है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Barmer,Rajasthan
First Published :
September 26, 2026, 11:28 IST



