गुलअब्बास (संध्याबेला) के फायदे और औषधीय उपयोग | Gulabbas Medicinal Benefits

Last Updated:August 18, 2026, 18:01 IST
Gulabbas Medicinal Benefits: बारिश के मौसम में खिलने वाला ‘गुलअब्बास’ (संध्याबेला) केवल अपनी खूबसूरती और शाम को खिलने वाले रंग-बिरंगे फूलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. पारंपरिक लोक चिकित्सा में इसके पत्तों और जड़ों का उपयोग सूजन, मोच, फोड़े-फुंसी, खुजली और बवासीर जैसी कई समस्याओं के घरेलू उपचार में किया जाता रहा है. हालांकि, किसी भी गंभीर बीमारी में खुद इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना बेहद जरूरी है.
गोंडा: बारिश के मौसम में घर के आंगन और बगीचे में कई तरह के फूल खिलने लगते हैं. इन्हीं में एक खूबसूरत पौधा गुलअब्बास भी है. इसके रंग-बिरंगे फूल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. खास बात यह है कि इसके फूल दिन में बंद रहते हैं और दोपहर बाद या शाम के समय खिलते हैं. इसी वजह से इसे कई जगह चार बजे का फूल या संध्याबेला भी कहा जाता है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि गुलअब्बास को आमतौर पर सजावटी पौधे के रूप में जाना जाता है, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में भी इसके पत्ते, जड़ और दूसरे हिस्सों का उपयोग किया जाता है. गांवों में पुराने समय से कई पौधों का इस्तेमाल घरेलू उपचार के लिए किया जाता रहा है. गुलअब्बास भी ऐसे पौधों में शामिल है. हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए.
गुलअब्बास के पत्तों का पारंपरिक इस्तेमाल शरीर में होने वाली हल्की सूजन और दर्द के लिए बताया जाता है. इसके पौधे से तैयार अर्क का इस्तेमाल करने से दर्द और सूजन कम होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गुलअब्बास हर तरह के दर्द या सूजन की दवा है. गठिया, गंभीर चोट या लंबे समय से चल रहे दर्द में इसे दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए.
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गुलअब्बास का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी बताया जाता है. इसके पत्ते या जड़ से तैयार लेप का उपयोग फोड़े-फुंसी, खुजली और कुछ छोटे त्वचा संबंधी घावों में बाहरी रूप से किया जाता है. हालांकि त्वचा पर पौधे का रस या लेप लगाने से पहले सावधानी जरूरी है. हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है. अगर त्वचा पर ज्यादा लालिमा, जलन, पस या सूजन है तो घरेलू उपचार के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
गांवों में मोच या हल्के मांसपेशियों के दर्द में कई तरह के घरेलू नुस्खे अपनाए जाते हैं. गुलअब्बास के पत्तों को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से कुछ आराम मिलता है. लेकिन अगर चोट गंभीर है, अंग में ज्यादा सूजन है या हड्डी में चोट का शक है तो केवल घरेलू लेप पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
गुलअब्बास का उपयोग बवासीर जैसी समस्या में भी किया जाता है. बवासीर में अगर लगातार खून आता है, तेज दर्द होता है या समस्या लंबे समय से बनी हुई है तो इसे सामान्य मानकर घरेलू उपचार नहीं करना चाहिए. डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि खून आने के पीछे दूसरी वजह भी हो सकती है.
गुलअब्बास के कुछ हिस्सों के पारंपरिक उपयोग में मूत्र संबंधी समस्याओं का भी उल्लेख मिलता है. कुछ लोक चिकित्सा पद्धतियों में इसका इस्तेमाल पेशाब से जुड़ी परेशानी और पथरी जैसी समस्या में किया जाता है. हालांकि पेशाब में जलन, खून, तेज दर्द या बार-बार पेशाब आने की समस्या होने पर खुद से गुलअब्बास की जड़ या पत्तियों का काढ़ा पीना सही नहीं है. इन लक्षणों के पीछे संक्रमण या पथरी समेत कई कारण हो सकते हैं. सही कारण जानने के लिए जांच जरूरी होती है.
वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार दर्द, सूजन, त्वचा की गंभीर समस्या, बवासीर, पेशाब में जलन या पथरी जैसी परेशानी है तो पहले डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. अगर कोई व्यक्ति आयुर्वेदिक तरीके से गुलअब्बास का इस्तेमाल करना चाहता है तो योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर रहेगा.
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August 18, 2026, 18:01 IST



