Bharatpur Bajra Crop Alert: आसमान से बरसी आफत, अब बाजरा की फसल में फैल रहा रोग; किसानों को किया गया अलर्ट

Last Updated:August 22, 2026, 08:50 IST
Bharatpur Bajra Crop Disease News: भरतपुर जिले में लगातार हो रही बारिश और अत्यधिक नमी के कारण बाजरा की फसल पर हरित बाली रोग सहित अन्य रोगों का खतरा बढ़ गया है. खेतों में जलभराव से फसल खराब होने की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने किसानों को खेतों से पानी निकालने, संक्रमित पौधों को नष्ट करने और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर ही मैलाथियान या डाइथेन एम-45 जैसी दवाओं का छिड़काव करने का सुझाव दिया है. बारिश के दौरान छिड़काव से बचने की सलाह दी गई है.
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Bharatpur: भरतपुर जिले में इन दिनों मौसम के बदले मिजाज और लगातार हो रही बारिश के कारण बाजरा की खेती करने वाले किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं. खेतों में लगातार पानी ठहरने और अत्यधिक नमी बने रहने के कारण बाजरा की फसल पर विभिन्न प्रकार के रोगों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है. कई इलाकों में बाजरा के पौधों पर बीमारियों के शुरुआती लक्षण भी दिखाई देने लगे हैं. इससे किसानों को फसल खराब होने के साथ-साथ उत्पादन में भारी गिरावट आने का डर सता रहा है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में खेतों में जमा पानी और वातावरण में मौजूद नमी फफूंद तथा अन्य जनित रोगों के तेजी से फैलाव के लिए सबसे मुफीद परिस्थितियां पैदा करते हैं.
कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि इस समय मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए बाजरा की फसल में हरित बाली रोग (Green Ear Disease) और अन्य फफूंद जनित बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा बना हुआ है. वातावरण में आर्द्रता अधिक होने की वजह से यह बीमारी बहुत ही कम समय में पूरे खेत को अपनी चपेट में ले सकती है. इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से अपने खेतों का दौरा करें और पौधों की पत्तियों तथा बालियों की बारीकी से जांच करते रहें. यदि शुरुआती स्तर पर ही रोग के लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो समय रहते सही प्रबंधन के जरिए फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.
फसल सुरक्षा के लिए कृषि विभाग की महत्वपूर्ण सलाहकृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी बाजरा की फसल को बचाने के लिए तुरंत निम्नलिखित उपाय अपनाएं:
जल निकासी का पुख्ता प्रबंध: खेतों में किसी भी स्थिति में अनावश्यक पानी जमा न होने दें. जिन खेतों में जलभराव की समस्या है, वहां से तुरंत पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करें.
संक्रमित पौधों का निपटारा: खेत में रोगग्रस्त या अस्वस्थ दिखने वाले पौधों को पहचानकर तुरंत उखाड़ दें और उन्हें स्वस्थ पौधों से दूर ले जाकर नष्ट कर दें ताकि बीमारी आगे न फैले.
अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग: रोग के लक्षण दिखने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से मैलाथियान का लगभग 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें.
फफूंदनाशी का इस्तेमाल: आवश्यकता पड़ने पर डाइथेन एम-45 जैसी अनुशंसित फफूंदनाशी दवा का छिड़काव किया जा सकता है. हालांकि दवा की सही मात्रा का निर्धारण कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श के बाद ही करें.
मौसम का ध्यान रखें: तेज बारिश के दौरान या जब बारिश होने की संभावना हो, तब किसी भी रसायन का छिड़काव करने से बचें, क्योंकि पानी के साथ दवा बह जाने से उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है.
कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे बिना सलाह किसी भी रासायनिक दवा का प्रयोग न करें और मौसम की स्थिति के अनुसार ही फसल का उचित प्रबंधन करें.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan
First Published :
August 22, 2026, 08:50 IST



