Rajasthan

Bikaner History: यहां के राजा स्वयं को नहीं, भगवान लक्ष्मीनाथ को मानते थे राज्य का वास्तविक शासक!

Last Updated:June 30, 2026, 18:20 IST

बीकानेर रियासत की स्थापना से ही यहां की शासकीय परंपरा अनूठी रही है. राव बीका ने राज्य की स्थापना के समय भगवान लक्ष्मीनाथ को राज्य का वास्तविक शासक मानते हुए उनका मंदिर स्थापित किया और स्वयं को केवल उनका प्रतिनिधि घोषित किया. इसी कारण बीकानेर के सभी राठौड़ शासक स्वयं को राजा नहीं, बल्कि भगवान लक्ष्मीनाथ के सेवक और प्रतिनिधि मानकर शासन करते थे.

बीकानेर. बीकानेर रियासत के इतिहास में एक ऐसी अनूठी परंपरा रही, जिसमें यहां के सभी राठौड़ शासक स्वयं को राजा नहीं, बल्कि भगवान लक्ष्मीनाथ का प्रतिनिधि मानते थे. इतिहासकार जानकी नारायण श्रीमाली के अनुसार राठौड़ों के कुलदेवता भगवान लक्ष्मीनाथ हैं और बीकानेर की स्थापना के समय राव बीका ने सबसे पहले भगवान लक्ष्मीनाथ की स्थापना कर उन्हें राज्य का वास्तविक शासक घोषित किया था.  इस नगर का नाम बीका और नेर यानी (नगर) शब्दों को मिलाकर बना है. यानी बीका का नगर ही आगे चलकर बीकानेर कहलाया. इतिहासकार बताते हैं कि बीकानेर के सभी शासकों ने भगवान लक्ष्मीनाथ को ही अपना राजा माना.

वे स्वयं केवल उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन चलाते थे. यही कारण था कि बीकानेर राज्य की मुद्रा और शाही आदेशों पर “राज लक्ष्मीनाथ रो” अंकित किया जाता था. इसके बाद ही किसी भी राजकीय आदेश को जारी किया जाता था. यह परंपरा इस बात का प्रतीक थी कि राज्य की सर्वोच्च सत्ता भगवान लक्ष्मीनाथ की मानी जाती थी.  राव बीका ने बीकानेर की स्थापना के दौरान सबसे पहले भगवान लक्ष्मीनाथ का मंदिर बनवाया. बाद में राव लूणकरण ने इस मंदिर का विस्तार कर इसे भव्य स्वरूप दिया. इसके अलावा चामुंडा माता और नागणेची माता के मंदिरों का भी निर्माण कराया गया, जिससे बीकानेर की नींव धार्मिक आस्था और कुल परंपराओं के साथ रखी गई.

इतिहासकारों के अनुसार भगवान लक्ष्मीनाथ के प्रति यही श्रद्धा बीकानेर राजघराने की सबसे बड़ी पहचान रही. पीढ़ी-दर-पीढ़ी सभी शासकों ने इस परंपरा का पालन किया और स्वयं को राज्य का स्वामी नहीं, बल्कि भगवान लक्ष्मीनाथ का सेवक एवं प्रतिनिधि माना. यही कारण है कि आज भी भगवान लक्ष्मीनाथ का मंदिर बीकानेर की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है. बीकानेर का स्थान उस समय व्यापारिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था. यह मध्य एशिया और गुजरात के व्यापार मार्गों के बीच पड़ता था, जिससे यह एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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