गर्मी में गाय-भैंस दे रही है कम दूध! जानिए पशुपालकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

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भीषण गर्मी में पशुओं का रखें खास ध्यान, नहीं तो आधा हो सकता है दूध उत्पादन
Last Updated:June 18, 2026, 12:10 IST
Animal Husbandry Tips: गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही भी दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. भीलवाड़ा पशुपालन विभाग के डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि हीट स्ट्रोक के कारण पशु सुस्त हो जाते हैं, तेजी से सांस लेते हैं और उनका दूध उत्पादन कम हो जाता है. पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए हवादार पशुशाला, ठंडे पानी की व्यवस्था और सही खान-पान बेहद जरूरी है. आहार में नमक, खनिज लवण और विटामिन शामिल करने की सलाह दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि सही प्रबंधन अपनाकर पशुओं को तापघात से बचाया जा सकता है और आर्थिक नुकसान रोका जा सकता है.
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भीलवाड़ा. गर्मी के मौसम में लगातार बढ़ते तापमान का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी पड़ता है. तेज गर्मी के कारण पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है. गर्मी के दिनों में यदि पशु अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में असफल रहता है, तो वह तापघात (हीट स्ट्रोक) का शिकार हो सकता है. ऐसी स्थिति में पशु बीमार पड़ जाता है और उसका दूध उत्पादन तेजी से घट जाता है. अधिक दूध देने वाली गाय और भैंसों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.
भीलवाड़ा पशुपालन विभाग के डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि गाय या भैंस दूध देना कम कर देती हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. गर्मी से बचाव के लिए पशुशाला को हवादार रखना बेहद जरूरी है. पशुशाला में टाट या बोरियों को भिगोकर लगाने से तापमान कम किया जा सकता है. इसके अलावा पंखों और पानी के फव्वारों का उपयोग भी लाभदायक रहता है. पशुशाला की छत को ठंडा रखने के उपाय करने चाहिए.
इस वजह से घट जाती है दूध उत्पादन
उन्होंने बताया कि पशुओं को सुबह और शाम के समय नहलाना चाहिए, जबकि दिन में उनके सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखी जा सकती है. भैंसों में तापघात का खतरा अधिक रहता है, इसलिए उन्हें दिन के समय तालाब या जोहड़ में छोड़ना फायदेमंद माना जाता है. तापघात से प्रभावित पशुओं में कई लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसे पशु सुस्त हो जाते हैं और सिर नीचे करके खड़े रहते हैं. पशु मुंह खोलकर तेजी से सांस लेते हैं तथा उनके मुंह से लगातार लार टपकती रहती है. शरीर का तापमान और सांस लेने की गति बढ़ जाती है. दूध उत्पादन अचानक कम हो जाता है और पेशाब की मात्रा भी घट जाती है. नाक और नथुने सूखने लगते हैं. समय पर उपचार नहीं मिलने पर अत्यधिक गर्मी का असर पशु के मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और गंभीर स्थिति में उसकी मौत भी हो सकती है.
पशुओं को चारा देने में टाइमिंग का करें पालन
डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पशुपालकों को गर्मी के मौसम में पशुओं के खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. चारा और दाना सुबह जल्दी तथा शाम को देना चाहिए, क्योंकि भोजन के बाद पशु के शरीर में गर्मी पैदा होती है. दोपहर के समय चारा-दाना देने से बचना चाहिए. पशुओं को अधिक मात्रा में हरा चारा खिलाना लाभकारी रहता है, क्योंकि इससे पानी और आवश्यक खनिज तत्वों की पूर्ति होती है. साथ ही सूखे चारे की मात्रा कम रखनी चाहिए.
पशुओं के आहार में ये करें शामिल
आहार में प्रतिदिन 40 से 50 ग्राम नमक तथा 40 से 50 ग्राम खनिज लवण और विटामिन मिलाने की सलाह दी गई है. पशुओं को हमेशा साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना चाहिए तथा दिन में कम से कम तीन से चार बार पानी पिलाना चाहिए. समय पर देखभाल और सही प्रबंधन से पशुओं को तापघात से बचाया जा सकता है और दूध उत्पादन में होने वाली कमी को भी रोका जा सकता है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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