BJP Nikay Chunav Ticket | पुराने कार्यकर्ताओं को तरजीह या जिताऊ चेहरे पर दांव? टिकट को लेकर लंबी बैठक

जयपुर. राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय में बैठकों का दौर लगातार जारी है. प्रदेशभर की 309 नगर निकायों में पार्षद के टिकट के लिए 50 हजार से ज्यादा दावेदार सामने आए हैं. ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जिताऊ और संगठन के लिहाज से मजबूत उम्मीदवार चुनने की है. इसी को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ संभागवार बैठकों में दावेदारों और तैयार किए गए पैनल की समीक्षा कर रहे हैं. शुक्रवार को भी प्रदेश मुख्यालय में मैराथन बैठकें चलती रहीं और निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर नेताओं ने लंबे समय तक मंथन किया.
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ राष्ट्रीय महामंत्री और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार भी मौजूद रहे. पार्टी की कोशिश है कि टिकट बंटवारे के बाद किसी तरह की नाराजगी या बगावत की स्थिति ज्यादा न बने. इसी वजह से दावेदारों के चयन में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में टिकट को लेकर तस्वीर तेजी से साफ होगी और चुनावी मैदान में उतरने वाले चेहरों की संख्या भी सामने आने लगेगी.
50 हजार से ज्यादा दावेदार, चार स्तर पर हो रही छंटनीबीजेपी के सामने 309 नगर निकायों में पार्षद पद के लिए 50 हजार से अधिक दावेदार हैं. इतनी बड़ी संख्या में नाम आने के बाद पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को कई स्तरों में रखा है. जानकारी के मुताबिक प्रत्याशियों के चयन में चार स्तर की स्क्रीनिंग की जा रही है. इसमें सर्वे रिपोर्ट, स्थानीय संगठन का फीडबैक, पर्यवेक्षकों की राय और आखिर में चुनाव समिति की भूमिका रहेगी. यानी किसी एक रिपोर्ट या एक नेता की राय के आधार पर ही टिकट तय नहीं किया जाएगा, बल्कि अलग-अलग स्तर से मिले फीडबैक को सामने रखकर नाम पर फैसला होगा.
इन लोगों की छंटनी की जा चुकी हैजिला स्तर पर पहले ही दावेदारों में से जिताऊ माने जा रहे लोगों की छंटनी की जा चुकी है. इसके बाद तीन-तीन नामों के पैनल तैयार किए गए हैं. अब इन्हीं पैनलों पर प्रदेश स्तर पर मंथन चल रहा है. पार्टी के सामने एक तरफ जीत की संभावना वाले उम्मीदवार को चुनने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय समीकरणों को भी ध्यान में रखना है. यही वजह है कि टिकट तय करने की प्रक्रिया को लेकर प्रदेश मुख्यालय में बैठकों का दौर लंबा चल रहा है.
पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर पार्टी का जोरबीजेपी की कोशिश इस बार टिकट वितरण में ऐसे चेहरों को आगे रखने की है जो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं. पार्टी को डर है कि टिकट नहीं मिलने पर कुछ दावेदार बागी तेवर अपना सकते हैं और निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं. इससे पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को नुकसान हो सकता है. इसी को देखते हुए मूल और पुराने कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है.
फीडबैक और रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसलाहालांकि अंतिम फैसला दावेदार की जीत की संभावना, स्थानीय संगठन के फीडबैक और बाकी रिपोर्ट के आधार पर ही होगा. तीन-तीन नामों के पैनल प्रदेश स्तर तक पहुंच चुके हैं और अब इन पर अंतिम मंथन किया जा रहा है. संभागवार बैठक में स्थानीय नेताओं से भी चुनावी स्थिति और दावेदारों को लेकर जानकारी ली जा रही है.
बीकानेर और अजमेर संभाग पर आज फैसला संभव
बीजेपी आज देर रात तक बीकानेर और अजमेर संभाग के प्रत्याशियों की पहली अधिकृत सूची जारी कर सकती है. अगर पार्टी की ओर से सूची जारी होती है तो इसके साथ ही कई दावेदारों का इंतजार खत्म होगा और चुनावी मैदान की तस्वीर भी कुछ हद तक साफ हो जाएगी. टिकट की घोषणा के साथ ही जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिलेगा, उनकी अगली रणनीति भी सामने आ सकती है. निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश मुख्यालय में चल रही बैठकों को इसी नजर से देखा जा रहा है. पार्टी एक तरफ जीतने वाले उम्मीदवारों पर फोकस कर रही है, वहीं संगठन के भीतर नाराजगी को संभालने की तैयारी भी कर रही है. आने वाले दिनों में टिकटों की घोषणा के साथ ही राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में राजनीतिक हलचल और तेज होने वाली है.



