नौकरी का सपना दिखाकर बनाते थे साइबर गुलाम, कंबोडिया-म्यांमार से करवाते थे ठगी, पुलिस ने 3 और आरोपी दबोचे

जयपुर. राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाना ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले इसी मामले में पांच आरोपियों को पकड़ा जा चुका था. अब इस संगठित गिरोह से जुड़े कुल आठ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं. राजस्थान पुलिस के साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई. साइबर क्राइम के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वी. के. सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से प्राप्त सूचना, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी नेटवर्क का लगातार खुलासा हो रहा है.
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य भारत के विभिन्न राज्यों, विशेषकर राजस्थान के युवाओं को 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन और आकर्षक विदेशी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड भेजते थे. वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र कब्जे में लेकर उन्हें साइबर स्कैम सेंटरों में बंधक बनाकर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, क्रिप्टो फ्रॉड और जॉब स्कैम जैसी साइबर ठगी करवाने के लिए मजबूर किया जाता था.
पुलिस ने तीन और साइबर ठक को किया गिरफ्तार
पुलिस ने बुधवार को इस नेटवर्क से जुड़े तीन और आरोपियों आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया को गिरफ्तार किया है. फिरोज काठात उर्फ ‘माफिया’ वर्ष 2025 के अंत में बैंकॉक के रास्ते कंबोडिया पहुंचा था. वहां 1 साल के एग्रीमेंट पर महिला बनकर सोशल मीडिया पर भारतीयों से दोस्ती करने और फर्जी क्रिप्टो योजनाओं में फंसाने की ट्रेनिंग ली. यह नेटवर्क के लिए म्यूल अकाउंट्स व फर्जी प्रोफाइल मैनेज करता था. कानू सिंह उर्फ ‘पायथन’ अप्रैल 2025 में होटल जॉब के नाम पर कंबोडिया गया. अंग्रेजी और चीनी अनुबंध पर हस्ताक्षर कर महिला प्रोफाइल से ठगी करने के साथ-साथ प्रति व्यक्ति कमीशन के लालच में 4 अन्य भारतीय युवाओं को कंबोडिया स्कैम कंपाउंड में सप्लाई किया.
ऐसे लोगों से मोटी रकम ऐंठता था ठग
आरिफ काठात उर्फ ‘दीपू’ फर्जी फेसबुक और व्हाट्सएप प्रोफाइल से निवेशकों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर नकली बढ़ा हुआ बैलेंस दिखाकर क्रिप्टो निवेश व “घर बैठे पैसे कमाएं” के नाम पर प्रोसेसिंग फीस के रूप में मोटी रकम ऐंठता था. पिछले दिनों कोलकाता से गिरफ्तार आरोपियों जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि उर्फ माही और अनिल उर्फ डेविल को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाकर की गई कड़ी पूछताछ और आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, वीपीएन, विदेशी संपर्क और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं. पुलिस अब मानव तस्करी, साइबर स्लेवरी और करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है.
आमजन के लिए पुलिस की एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के आकर्षक ऑफर स्वीकार करने से पहले एजेंसी और कंपनी का सत्यापन अवश्य करें. किसी भी अनजान व्यक्ति को पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेज न दें. सोशल मीडिया पर निवेश, क्रिप्टो या गारंटीड रिटर्न के झांसे में न आएं. किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या फाइल को डाउनलोड न करें और साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट या ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं.
कार्रवाई में ये पुलिस अधिकारी रहे शामिल
यह कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन व डीएसपी और थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में की गई. इस कार्रवाई में प्रोबेशनर आरपीएस चित्तौड़गढ़ मनीष शर्मा, पुलिस निरीक्षक स्टेट साइबर क्राइम थाना दामोदर, सहायक उप-निरीक्षक, डीएसबी प्रभारी, ब्यावर कमल किशोर, हेड कांस्टेबल साइबर थाना उदयपुर प्रदीप, कांस्टेबल किशन, विजय सिंह, महेंद्र व बृजमोहन स्टेट साइबर क्राइम थाना, जयपुर शामिल रहे.



