Cancer Update: दिन में बस 1 गोली और कैंसर पर वार: पैनक्रियाटिक कैंसर की लैंडमार्क दवा ‘Daraxonrasib’ को मिली हरी झंडी

Pancreatic Cancer Drug : कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है. अमरीकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) ने पैनक्रियाटिक (अग्न्याशय) कैंसर के इलाज के लिए दुनिया की पहली ऐसी मॉलिक्यूलर दवा को मंजूरी दे दी है, जो इस बीमारी के मूल कारण पर सीधा हमला करती है. रेवोल्यूशन मेडिसिन्स (Revolution Medicines) द्वारा तैयार की गई इस दवा का नाम Daraxonrasib है, जिसे अमेरिका के बाजारों में Rasonque ब्रांड नेम से बेचा जाएगा. यह दवा मौखिक रूप से (Oral Pill) दिन में केवल एक बार ली जाने वाली गोली है.
बता दें कि पैनक्रियाटिक कैंसर को चिकित्सा जगत में सबसे घातक और कठिन माना जाता है, क्योंकि अक्सर इसके लक्षणों का पता अंतिम चरणों में चलता है. पिछले कई दशकों में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की औसतन जीवित रहने की अवधि (Median Survival Rate) में कोई बड़ा सुधार नहीं देखा गया था. परंपरागत कीमोथेरेपी के मुकाबले यह नई दवा मरीजों की जिंदगी को लगभग दोगुना तक बढ़ाने में कारगर साबित हुई है.
परंपरागत कीमोथेरेपी के मुकाबले यह नई दवा मरीजों की जिंदगी को लगभग दोगुना तक बढ़ाने में कारगर साबित हुई है. (Canva)
ट्रायल के मिले प्रमुख परिणाम:जीवनकाल में बढ़ोतरी: क्लिनिकल ट्रायल के दौरान जिन मरीजों को सामान्य कीमोथेरेपी दी गई, उनकी औसतन सर्वाइवल दर 6.7 महीने थी. वहीं, Daraxonrasib की गोली लेने वाले मरीजों का जीवनकाल बढ़कर 13.2 महीने दर्ज किया गया.
ट्यूमर की रोकथाम: यह दवा कैंसर कोशिकाओं को तेजी से फैलने से रोकती है और ट्यूमर के आकार को सिकोड़ने में मदद करती है.
कैंसर पर कैसे काम करती है यह दवा?अधिकांश पैनक्रियाटिक कैंसर के पीछे RAS (विशेषकर KRAS) नाम के प्रोटीन का म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) जिम्मेदार होता है. यह म्यूटेशन कैंसर कोशिकाओं को लगातार बढ़ने और विभाजित होने का संकेत देता रहता है.
Daraxonrasib सीधे जाकर इस RAS प्रोटीन सिग्नल को ब्लॉक कर देती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को मिलने वाली ऊर्जा और निर्देश रुक जाते हैं और ट्यूमर की बढ़त थम जाती है.
किन मरीजों को मिलेगा इसका फायदा?FDA ने इस दवा को उन वयस्क मरीजों के लिए स्वीकृति दी है जिन्हें मेटास्टैटिक पैनक्रियाटिक डक्टल एडेनोकार्सिनोमा (Metastatic Pancreatic Ductal Adenocarcinoma) है. सरल शब्दों में बताएं तो ऐसे मरीज जिनका कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है, जो मरीज कम से कम एक बार पहले कीमोथेरेपी या अन्य सिस्टमिक इलाज करा चुके हैं, लेकिन उन्हें फायदा नहीं हुआ और वे मरीज जो अत्यधिक दुष्प्रभाव के कारण भारी कीमोथेरेपी सहन करने में असमर्थ हैं. उनके लिये ये दवा फायदेमंद हो सकती है.
भारत के संदर्भ में यह खबर क्यों है अहम?अमेरिका में पैनक्रियाटिक कैंसर के मरीजों की 5 साल की सर्वाइवल दर लगभग 13% है. वहीं, भारत में हर साल इस कैंसर के लगभग 10,000 नए मामले सामने आते हैं और यहाँ 5 साल की सर्वाइवल दर महज 7 से 10% के आसपास बनी हुई है.
भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्षित थेरेपी (Targeted Therapy) के आने से भविष्य में भारत में भी पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज के तौर-तरीके बदलेंगे, जिससे गंभीर मरीजों को दर्दनाक कीमोथेरेपी डोज़ के बजाय एक आसान गोली का विकल्प मिल सकेगा.



