Rajasthan

45°C की गर्मी में भी AC जैसा सुकून! हर मौसम में चलती हैं बर्फ जैसी ठंडी हवाएं, राजस्थान का है स्विट्जरलैंड

Last Updated:July 05, 2026, 13:11 IST

Pali Famous Tourist Place: पाली के सुमेरपुर क्षेत्र में जवाई बांध के सामने स्थित हवा महल, जिसे जवाई कोठी या रॉयल रिट्रीट भी कहा जाता है, इतिहास और प्रकृति का अनोखा संगम है. वर्ष 1946 में जवाई बांध के निर्माण के दौरान महाराजा उम्मेद सिंह ने इसे अपने ठहरने और निर्माण कार्य की निगरानी के लिए बनवाया था. आज यह महल शानदार व्यू पॉइंट के रूप में प्रसिद्ध है. यहां से जवाई बांध, अरावली की वादियां, पैंथर और विदेशी पक्षियों का नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है. ठंडी हवाओं के कारण यह जगह सालभर सुकूनभरा अनुभव देती है.

ख़बरें फटाफट

पाली. राजस्थान का नाम सुनते ही दिमाग में क्या आता है? तपती धूप, रेतीले धोरे और भयंकर गर्मी… मगर आज आपको राजस्थान की एक ऐसी जादुई जगह पर लेकर आए हैं, जो आपके इस नजरिये को पूरी तरह से बदलने का काम करती है. यहां मौसम चाहे मई-जून की भीषण गर्मी का हो, या फिर कड़ाके की सर्दी का… आपको गर्मी तो भूलकर भी नहीं लगने वाली! गर्मियों में यहां एसी से भी ज्यादा सुकून भरी ठंडी हवाएं चलती हैं और जब यहां सर्दी और बारिश का मौसम आता है, तो माहौल ऐसा हो जाता है मानो आप राजस्थान में नहीं, बल्कि कश्मीर या स्विट्जरलैंड की बर्फीली हवाओं के बीच खड़े हों!

जी हां, हम बात कर रहे हैं पाली जिले में जवाई बांध के पास स्थित ऐतिहासिक ‘हवा महल’ की! इस अद्भुत जगह को जोधपुर के पूर्व महाराजा उम्मेद सिंह ने बनवाया था. आज यहां पर्यटकों की ऐसी भारी भीड़ उमड़ रही है कि पैर रखने की जगह नहीं है और अब जब मानसून की बारिशें दस्तक देने वाली हैं, तो यहां का नजारा किसी विदेशी कंट्री से कम नहीं होने वाला!

जोधपुर दरबार ने कराया था इसका निर्माण

स्थानीय निवासी हरीराम बताते है कि आप यहां पर किसी भी समय आ जाइए बाहर का तापमान चाहे कितना भी क्यों न हो यहां का आपमान आपको सुकून देने का ही काम करेगा. यहां पर हवा कभी नहीं रूकती बांध के पानी से होकर गुजरने वाली हवा जब इस महल पर पहुंचती है तो इतना सुकून मिलता है कि उसको आप बया नहीं कर सकते. जवाई डेम का निर्माण पूर्व महाराजा उम्मेदसिंह ने बनवाया था. यहां पर ठंडक महसूस होती है कि लोगा को एसा लगता है कि मनाली में बैठे है.

पर्यटकों ने कहा- यहां आने के बाद जाने का नहीं करता मन

अहमदाबाद से आए नीतिन ने कहा कि हम जब यहां आए तो ऐसा कुछ नहीं लगा था कि यह छोटा सा महल इतना खास हो सकता है. मगर जब यहां आए तो इतना सुकून मिल रहा है कि अहमदाबाद में भी ऐसी जगह हमने कभी नहीं देखी. जब हम जवाई डेम घूमकर यहां पहुंचे तो बस ऐसा लग रहा है कि जैसे मनानी या कश्मीर आ गए हैं, बस यहां से कही जाए ही नहीं.

1946 में रखी गई थी जवाई की नींव

पाली जिले के सुमेरपुर उपखंड में स्थित जवाई बांध के पास बने इस खूबसूरत ‘हवा महल’ (जिसे जवाई कोठी या रॉयल रिट्रीट भी कहा जाता है) का निर्माण जोधपुर के तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह जी ने करवाया था. पूर्व महाराजा उम्मेद सिंह ने साल 1946 में पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े बांध ‘जवाई बांध’ के निर्माण की नींव रखी थी. इसी बांध के काम की निगरानी रखने और अपने ठहरने के लिए उन्होंने बांध के ठीक सामने एक ऊंची पहाड़ी पर इस आलीशान महल का निर्माण करवाया था. देखते ही देखते आज यह महल बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में उभरकर सामने आया है.

क्या है इसकी खासियत

इस महल की सबसे बड़ी खासियत इसका भौगोलिक स्थान और वहां से दिखने वाला अद्भुत नजारा है. ग्रेनाइट की ऊंची पहाड़ियों के बीच बने इस महल की खिड़कियों और झरोखों से जवाई बांध का पूरा बैकवाटर (पानी) और अरावली की वादियां साफ नजर आती है. पहाड़ी पर ऊंचाई पर होने के कारण यहां हर समय ठंडी और सुहावनी हवा चलती रहती है, इसीलिए इसे स्थानीय स्तर पर लोग हवा महल भी कहते हैं. वर्तमान में यह स्थान न केवल जवाई बांध की खूबसूरती को देखने का सबसे बेहतरीन व्यू पॉइंट है, बल्कि इसके आस-पास के इलाके में पैंथर्स और विदेशी पक्षियों की मौजूदगी के कारण यह पर्यटकों और वाइल्डलाइफ लवर्स के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj