Dholpur Independence Day 1947 | 15 अगस्त 1947 धौलपुर का इतिहास

Last Updated:August 15, 2026, 08:13 IST
Dholpur Independence Day 1947: 15 अगस्त 1947 को धौलपुर रियासत में आजादी का जश्न बड़े उत्साह के साथ मनाया गया. हल्की बारिश के बीच लोगों ने जुलूस निकाले, तिरंगा फहराया और मिठाइयां बाँटीं. क्रांतिकारी पंडित चंद्रशेखर ने पहला लड्डू कलूटी पहलवान को खिलाया. 14 अगस्त को महाराज राणा उदयभान सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. सरकारी पाबंदी के बावजूद जन-जन ने ‘जय हिंद संघ’ के बैनर तले जश्न मनाया. बाद में धौलपुर का विलय मत्स्य संघ में हुआ. इतिहासकार अरविंद शर्मा ने इस इतिहास पर शोध किया.
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Dholpur Independence Day 1947: 15 अगस्त 1947 का दिन समूचे भारतवर्ष के साथ-साथ धौलपुर रियासत के लिए भी अत्यंत गौरवमयी और ऐतिहासिक रहा. देश के आजाद होते ही धौलपुर में क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों और आम नागरिकों में असीम खुशी की लहर दौड़ गई थी. रियासत के कोने-कोने में लोगों ने भव्य जुलूस और रैलियाँ निकालीं, एक-दूसरे का मुँह मीठा कराया और तिरंगा फहराकर स्वाधीनता का जश्न मनाया. धौलपुर की गलियाँ ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष से गूँज उठी थीं.
धौलपुर के प्रसिद्ध इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार धौलपुर रियासत का स्वाधीनता संग्राम राजस्थान की अन्य रियासतों की तुलना में काफी अलग और खास था. यहाँ के जन आंदोलन में स्थानीय जनता की सहभागिता बेहद व्यापक थी. आर्य समाज की पृष्ठभूमि ने यहाँ के आंदोलनों को मजबूत वैचारिक आधार दिया था. ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए रक्षा दल बनाए गए थे, वहीं क्रांतिकारियों ने संगठित होकर ‘जय हिंद संघ’ की स्थापना की थी. तिरंगे और मातृभूमि की रक्षा के लिए धौलपुर के जन-जन में अद्भुत समर्पण था.
महाराज राणा उदयभान सिंह और विलय पत्र का इतिहासआजादी के इस दौर में धौलपुर रियासत के शासक महाराज राणा उदयभान सिंह की भूमिका भी काफी चर्चा में रही. इतिहासकार बताते हैं कि महाराज राणा उदयभान सिंह प्रारंभ में धौलपुर को एक स्वतंत्र रियासत के रूप में बनाए रखने का प्रयास कर रहे थे और किसी संघ में शामिल होने से हिचकिचा रहे थे. हालाँकि परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने 14 अगस्त 1947 को विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर कर दिए. वी.पी. मेनन की सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘इंटीग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स’ में भी धौलपुर के इस नाजुक दौर का विशेष उल्लेख मिलता है.
बारिश के बीच उल्लास और पहला लड्डू खिलाने का किस्सा14 अगस्त को रियासत के आला अधिकारियों द्वारा आदेश जारी किए गए थे कि सरकारी इमारतों पर तिरंगा न फहराया जाए. इसके बावजूद 15 अगस्त की सुबह हल्की रिमझिम बारिश के बीच आम जनता का उत्साह ज़रा भी कम नहीं हुआ. धौलपुर के विभिन्न चौराहों पर जुलूस निकले और देश भक्ति के गीत गूँजते रहे. इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि आजादी की घोषणा होते ही क्रांतिकारी पंडित चंद्रशेखर ने खुशी में पहला लड्डू क्रांतिकारी कलूटी पहलवान को खिलाया था. इसके बाद पूरे शहर में मिठाइयां बाँटी गईं. जहाँ एक ओर आम जनता सड़कों पर जश्न मना रही थी, वहीं सरकारी इमारतों पर सन्नाटा पसरा हुआ था.
मत्स्य संघ में विलय और इतिहास लेखनधौलपुर के लोगों के लिए यह ऐतिहासिक दिन उन अमर शहीदों को नमन करने का भी था, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. आगे चलकर धौलपुर रियासत का विलय मत्स्य संघ में हुआ और यह भारतीय संघ का अभिन्न अंग बन गया. वर्ष 1985 में इतिहासकार अरविंद शर्मा ने धौलपुर के स्वतंत्रता संग्राम पर पहली बार मौलिक शोध कार्य किया, जिसके लिए उन्हें विशिष्ट नागरिक सम्मान से नवाजा गया. उन्होंने उस समय जीवित स्वतंत्रता सेनानियों के साक्षात्कार लेकर इस ऐतिहासिक विरासत को दस्तावेजों में सहेजा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
August 15, 2026, 08:13 IST



