Diwali | Mewar Royal Family Diwali

Last Updated:November 06, 2026, 21:00 IST
Mewar Royal Family Diwali: उदयपुर में दीपावली का पर्व मेवाड़ राजपरिवार के लिए सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी है. दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ के बाद उनके बेटे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ इस परंपरा को निभा रहे हैं. दीपावली पर वे शाही लवाजमे के साथ सिटी पैलेस से भट्टियानी चौहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर पहुंचते हैं. खास बात यह है कि लक्ष्यराज सिंह अपने बेटे हरितराज सिंह को भी इस परंपरा में शामिल करते हैं और नंगे पांव मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं. तीन पीढ़ियों की यह परंपरा मेवाड़ के राजसी वैभव और आस्था की झलक दिखाती है.
उदयपुर. भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने पर दीपावली का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व भगवान श्रीराम के वंशज भी पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं. देश के प्रमुख राजघरानों में शामिल और श्रीराम के वंशज मेवाड़ राजपरिवार में भी दीपावली का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है. यहां पीढ़ी-दर-पीढ़ी परंपराओं का निर्वहन होता नजर आता है और नई पीढ़ी को भी पौराणिक परंपराओं से अवगत कराया जाता है. दीपावली के मौके पर मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की तीन पीढ़ियों की तस्वीरों में राजसी वैभव की झलक देखने को मिलती है.
दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ भी अपने पुरखों की परंपरा का निर्वहन करते हुए दीपावली के मौके पर उदयपुर के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में दर्शन के लिए जाते थे. उस दौरान उनके पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ भी उनके साथ होते थे. पूरा शाही लवाजमा सिटी पैलेस के प्रांगण से निकलकर भट्टियानी चौहट्टा स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर पहुंचता था. मेवाड़ राजपरिवार महालक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करने के साथ ही समूचे मेवाड़ की खुशहाली की कामना करता है.
मेवाड़ का पूर्व राजपरिवार जब दीपावली की दोपहर को माता महालक्ष्मी के दर्शन के लिए सिटी पैलेस से शाही लवाजमे के साथ निकलता है, तो शहरवासियों में शाही वैभव को देखने और राजपरिवार के सदस्यों का अभिवादन करने की होड़ मच जाती है. शहरवासी मेवाड़ राजपरिवार के सदस्यों का स्वागत और अभिवादन करते हैं. वहीं, उनकी एक झलक पाने के लिए भी बेताब नजर आते हैं. मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी महालक्ष्मी दर्शन के समय पूरे राजसी वेशभूषा, मेवाड़ी पगड़ी और शाही लवाजमे के साथ नजर आते हैं.
Add as Preferred Source on Google
मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन के बाद उनके बेटे डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस परंपरा का निर्वहन जारी रखा और इसमें अपने बेटे हरितराज सिंह मेवाड़ को भी शामिल किया. इतना ही नहीं, बेटे को परंपराओं के निर्वहन का महत्व समझाने और महालक्ष्मी के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने नंगे पांव सिटी पैलेस से महालक्ष्मी मंदिर तक जाने की परंपरा शुरू की. इस दौरान उनके साथ शाही लवाजमा भी मौजूद रहता है. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और हरितराज सिंह मेवाड़ एक जैसी वेशभूषा में स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित होकर माता महालक्ष्मी के दर्शन करते हैं.
उदयपुर में माता महालक्ष्मी की प्रतिमा अनूठी है. यहां माता महालक्ष्मी कमल के फूल पर विराजमान न होकर गजराज पर बैठी हैं. गजराज पर विराजमान यह प्रतिमा वैभव, समृद्धि, ऐश्वर्य, शक्ति और शुभता का प्रतीक मानी जाती है. दीपावली पर माता महालक्ष्मी के दर्शन के लिए लाखों भक्त मंदिर पहुंचते हैं. वहीं, मंदिर में भी दीपावली के इन पांच दिनों में भव्य आयोजन किए जाते हैं.
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ मेवाड़ राजवंश के 77वें संरक्षक हैं. महाराणा प्रताप के वंशज होने के चलते इस राजवंश का वैभव पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इसके साथ ही मेवाड़ राजवंश ने अपने वैभव और राजवंश की मर्यादा को परंपराओं के निर्वहन के साथ जीवंत रखा है. मेवाड़ राजवंश के वंशजों की कर्तव्यनिष्ठा और परंपराओं के प्रति आस्था के चलते ही इस राजवंश और पूर्व राजपरिवार के सदस्यों का शाही परिवारों में एक अलग और महत्वपूर्ण स्थान है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :
November 06, 2026, 21:00 IST



