Rajasthan

पारंपरिक खेती छोड़ किसान ने अपनाई स्ट्रॉबेरी की राह, कम जमीन में मुनाफे की नई कहानी लिखने को हो रहे तैयार

Last Updated:January 01, 2026, 06:53 IST

Alwar Strawberry Farming: राजस्थान के अलवर जिले में किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. खैरथल-तिजारा क्षेत्र के किसान ने 5 बिस्वा जमीन में करीब 2000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाकर पहली बार सफल खेती की है. इस प्रयास से किसान को बेहतर उत्पादन और मुनाफा मिल रहा है. सामाजिक संस्था के सहयोग से कृषि तकनीक और विशेष किट की मदद लेकर खेत तैयार किए गए. यह नवाचार अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है.

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अलवर: राजस्थान के अलवर जिला अंतर्गत मेवात क्षेत्र में किसान कृषि के क्षेत्र में नए-नए नवाचार कर रहे हैं. जहां पहले किसान पारंपरिक रूप से सरसों, गेहूं, चना और प्याज की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब वे ठंडे प्रदेशों की फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं. खास बात यह है कि यहां के किसानों ने स्ट्रॉबेरी जैसी उन्नत और लाभकारी फसल की खेती शुरू की है. जिले के विभिन्न किसानों ने करीब 5 बीघा भूमि में स्ट्रॉबेरी की खेती की है, जिससे उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिल रहा है. यह नवाचार अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है.

खैरथल-तिजारा जिले के गांव खानपुर मेवान के एक किसान ने इस बार परंपरागत खेती से हटकर स्ट्रॉबेरी की खेती कर एक नई मिसाल पेश की है. किसान ने बताया कि उन्होंने पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती की है, जिसमें अब फल लगकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं और जल्द ही उन्हें मंडी में भेजने की तैयारी की जा रही है. किसान के अनुसार 5 बिस्वा जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती करने पर करीब 30 हजार रुपये का खर्च आया है, जबकि इससे अच्छी आमदनी की उम्मीद है.

खेत में बेड तैयार कर लगाएं है स्ट्रॉबेरी के दो हजार पौधे

किसान ने बताया कि एक सामाजिक संस्था के सदस्यों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए प्रेरित किया. इसी संस्था से उन्होंने पैसे देकर स्ट्रॉबेरी के पौधे मंगवाए. खेती की शुरुआत से पहले जमीन को 3 से 4 बार अच्छी तरह जुताई की गई, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो सके. इसके बाद खेत में वर्मी कम्पोस्ट खाद डाली गई. संस्था की ओर से किसान को एक विशेष किट भी उपलब्ध कराई गई, जिसमें सल्फर सहित अन्य जरूरी दवाइयां शामिल थीं. दवाइयों के उपयोग के बाद खेत में बेड तैयार किए गए, जिनमें करीब 2000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए गए.

अधिकतर किसान प्याज की ही करते हैं खेती

किसान ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत अक्टूबर माह में की जाती है और यह फसल दो से ढाई महीने में तैयार हो जाती है. उन्होंने अन्य किसानों को सलाह दी कि वे परंपरागत खेती के साथ-साथ स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलों की ओर भी ध्यान दें, जिससे कम जमीन में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. किसान ने कहा कि क्षेत्र में अधिकतर किसान प्याज की खेती करते हैं, लेकिन सही दाम नहीं मिलने से नुकसान उठाना पड़ता है. इसी कारण उन्होंने नवाचार अपनाते हुए स्ट्रॉबेरी की खेती का रास्ता चुना, जो अब उनके लिए लाभदायक साबित हो रही है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

Location :

Alwar,Rajasthan

First Published :

January 01, 2026, 06:53 IST

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अलवर के किसान ने शुरू की है स्ट्रॉबेरीकी खेती, कम लागत में मिलती है बंपर उपज

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