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Fetal Cardiology Jaipur | Dr Prerna Bhat cardiologist | Supraventricular Tachycardia fetus

Last Updated:June 25, 2026, 06:06 IST

Fetal Heart Treatment Success at Mahatma Gandhi Hospital Jaipur: जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में डॉक्टरों ने गर्भ में पल रहे शिशु का दुर्लभ इलाज कर उसकी जान बचाई है. गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में भ्रूण में सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) नामक गंभीर हृदयगति विकार मिला था, जिससे बच्चे को हार्ट फेलियर का खतरा था. फीटल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने गर्भवती महिला को ट्रांसप्लेसेंटल एंटी-अरिदमिक थैरेपी देकर भ्रूण की धड़कन सामान्य की. 35वें सप्ताह में सिजेरियन प्रसव के बाद अब जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं.

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जयपुर के डॉक्टरों का कमाल, जन्म से पहले ही बचा ली बच्चे की जिंदगीZoomजयपुर में डॉक्टरों का चमत्कार, गर्भ में ही ठीक किया बच्चे का बीमार दिल

Jaipur: राजधानी जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के फीटल कार्डियोलॉजी डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ और जीवन-रक्षक उपचार कर गर्भस्थ शिशु की जान बचाई है. दरअसल, गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में भ्रूण में सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) नामक गंभीर हृदयगति विकार का पता चला था. इस गंभीर हृदयगति विकार के कारण गर्भ में पल रहे शिशु का हृदय अत्यधिक तेज गति से धड़क रहा था. हृदय की इस असामान्य और अनियंत्रित तेज गति के कारण गर्भस्थ बच्चे को हार्ट फेलियर होने और गर्भ में ही मौत का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था. यह स्थिति जच्चा और बच्चा दोनों के लिए बेहद नाजुक थी.

महात्मा गांधी अस्पताल की फीटल एंड पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने शिशु की इस गंभीर बीमारी का सटीक पता लगाकर तुरंत ही विशेष उपचार शुरू किया. इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए गर्भवती महिला को ट्रांसप्लेसेंटल एंटी-अरिदमिक थैरेपी दी गई. इस अत्याधुनिक थैरेपी के माध्यम से दी गई दवाओं के असर से महज 72 घंटे के भीतर ही गर्भस्थ भ्रूण की हृदय गति सामान्य स्तर पर आ गई. डॉक्टरों की देखरेख में इलाज के बाद यह सामान्य स्थिति अगले 10 सप्ताह तक लगातार बनी रही, जिससे बच्चे का गर्भ में सुरक्षित विकास हो सका.

35वें सप्ताह में डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को किया गया डिस्चार्जइसके बाद गर्भावस्था के 35वें सप्ताह में डॉक्टरों की टीम द्वारा महिला का सुरक्षित सिजेरियन प्रसव करवाया गया. डिलीवरी होने के बाद भी नवजात शिशु को दोबारा एंटी-अरिदमिक थैरेपी के तहत जरूरी दवाएं दी गईं ताकि उसकी हृदय गति को पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सके. इस नवजात शिशु की हृदय-गति सामान्य होने के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा जच्चा-बच्चा दोनों को सकुशल डिस्चार्ज कर दिया गया है. डॉ. प्रेरणा भट द्वारा किया गया यह इलाज बेहद सफल रहा और अब नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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