खेती से लेकर किचन गार्डन तक, यह देसी खाद क्यों बन रही है पहली पसंद? घर पर करें ऐसे तैयार

होमफोटोकृषि
खेती से लेकर किचन गार्डन तक, यह देसी खाद क्यों बन रही है पहली पसंद?
Last Updated:July 05, 2026, 06:17 IST
How to Make Organic Manure at Home: भीलवाड़ा में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोबर की खाद बनाने के आसान तरीके पर जोर दिया जा रहा है. रासायनिक खादों के नुकसान से बचने के लिए किसान और बागवानी प्रेमी घर पर ही गोबर, सूखी पत्तियों, भूसा और सब्जियों के छिलकों से बेहतरीन खाद तैयार कर सकते हैं. गड्ढे या ड्रम में जैविक कचरा और गोबर मिलाकर 45 से 60 दिन में यह खाद आसानी से तैयार हो जाती है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल धारण क्षमता में सुधार करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अत्यंत मददगार है, जिससे लागत कम होती है.
भीलवाड़ा में रासायनिक खादों के बढ़ते उपयोग के बीच अब किसान और बागवानी के शौकीन लोग फिर से जैविक खेती की ओर लौट रहे हैं. ऐसे में गोबर की खाद को सबसे सस्ता, सुरक्षित और असरदार विकल्प माना जाता है, जिसे गाय या भैंस के गोबर की मदद से घर पर ही बेहद आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है. यह जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पौधों की अच्छी बढ़वार में मदद करती है, जो खेतों, किचन गार्डन, गमलों तथा फलदार पौधों के लिए बिना किसी बड़े खर्च के एक बेहतरीन और लाभकारी साधन साबित हो रही है.
गोबर की खाद बनाने के लिए सबसे पहले एक गड्ढा या बड़ा प्लास्टिक ड्रम चुनकर उसमें ताजा गोबर, सूखी पत्तियां, भूसा, घास और रसोई का जैविक कचरा मिलाएं. इसके बाद मिश्रण में थोड़ा पानी छिड़ककर उसे नम रखें और ध्यान रहे कि इसमें प्लास्टिक, कांच या रासायनिक कचरा बिल्कुल न हो. अंत में, खाद को जल्दी तैयार करने और उसमें हवा का संचार बनाए रखने के लिए समय-समय पर इसे फावड़े से पलटते रहें.
आमतौर पर 45 से 60 दिनों के भीतर यह मिश्रण पूरी तरह सड़कर अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदल जाता है, जिसकी पहचान इसका गहरा भूरा या काला रंग होना, बदबू का खत्म होना और मिट्टी जैसी खुशबू आना है. इस तैयार खाद को कुछ दिन छांव में सुखाकर किसी सुरक्षित स्थान पर रख लें, जिसके बाद इसे जरूरत के अनुसार खेतों, सब्जियों, फूलों या गमलों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है.
Add as Preferred Source on Google
गोबर की खाद का नियमित उपयोग करने से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, लाभकारी सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं और पौधों की जड़ें मजबूत होने से फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में सुधार होता है. इसके अलावा, रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत भी घटती है, यही कारण है कि जैविक खेती करने वाले किसान गोबर की खाद को सबसे अधिक महत्व देते हैं.
गोबर की खाद का नियमित उपयोग करने से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ने और लाभकारी सूक्ष्म जीवों के सक्रिय रहने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता व उत्पादन में बेहतरीन सुधार होता है. इसके अतिरिक्त, रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत भी घटती है, यही वजह है कि जैविक खेती करने वाले किसान गोबर की खाद को सबसे अधिक महत्व देते हैं.



