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from old scorpio to england tour know the story of vaibhav sooryavanshi struggle lifestyle

Last Updated:June 27, 2026, 14:34 IST

Vaibhav Sooryavanshi: बिहार के लाल और समस्तीपुर का बेटा 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आज पहचान के मोहताज नहीं है. बेबी यूनिवर्सल बॉस से नाम से क्रिकेट जगत में फेसम वैभव की एक और कहानी है. आज उनके संघर्ष के दिनों के एक ऐसे साथी के बारे में बताने जा रहे हैं जो 2014 से उनके संघर्ष में हर पल साथ निभाया. इसी पुरानी स्कॉर्पियो से वह पटना प्रैक्टिस करने जाते थे. जानिए BR 33 M 4992 की अनोखी कहानी.

आज भारत के क्रिकेट जगत में एक ऐसा नाम तेजी से चमक रहा है, जिस पर पूरे बिहार ही नहीं बल्कि देश को गर्व महसूस हो रहा है. समस्तीपुर का 15 साल का बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी आज अपनी शानदार बल्लेबाजी की वजह से देश-दुनिया में पहचान बना रहा है. लेकिन इस चमक के पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है. आज के इस खास एपिसोड में हम आपको उस गाड़ी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने वैभव के क्रिकेट करियर की बुनियाद रखी. यह सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि उस संघर्ष का साथी है जिसने एक छोटे शहर के लड़के को बड़े मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

वैभव सूर्यवंशी को लेकर अक्सर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं. कुछ लोग कहते थे कि उनके पिता उन्हें स्कूटर से पटना या दिल्ली प्रैक्टिस कराने ले जाते थे. लेकिन जब स्थानीय टीम वैभव के घर पहुंची और परिवार से बातचीत की, तब इस कहानी की असली तस्वीर सामने आई. वैभव के चाचा ने साफ बताया कि स्कूटर वाली बात सही नहीं है. उन्होंने घर के सामने खड़ी पुरानी स्कॉर्पियो की ओर इशारा करते हुए कहा कि यही वह गाड़ी है, जिससे वैभव अपने पिता और परिवार के लोगों के साथ पटना जाया करते थे. इसी गाड़ी में बैठकर रोज लंबा सफर तय होता था और वहीं से क्रिकेट का सपना धीरे-धीरे आकार ले रहा था.

रोजाना घंटों सफर करके पटना पहुंचना और वहां लगातार अभ्यास करना आसान नहीं था. लेकिन वैभव और उनके परिवार ने कभी हार नहीं मानी. लगातार मेहनत और क्रिकेट के प्रति समर्पण ने आखिरकार वह दिन दिखाया जब वैभव को पहली बार रणजी खेलने का मौका मिला. यही वह टर्निंग पॉइंट साबित हुआ जिसने उनके क्रिकेट करियर की दिशा बदल दी. रणजी टीम में चयन के बाद वैभव की प्रतिभा बड़े स्तर पर लोगों की नजरों में आई और धीरे-धीरे उनकी पहचान बिहार से निकलकर पूरे देश तक पहुंच गई. कहा जाए तो इसी स्कॉर्पियो में बैठकर तय किया गया सफर ही उनकी नई जिंदगी की शुरुआत बना.

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समय बदला, सफलता मिली और आज वैभव सूर्यवंशी को कई नई और महंगी गाड़ियां गिफ्ट के रूप में मिल चुकी हैं. लेकिन उनके घर के दरवाजे पर आज भी वही पुरानी स्कॉर्पियो खड़ी है, जो उनके संघर्ष के दिनों की कहानी बयान करती है. यह गाड़ी साल 2014 मॉडल की स्कॉर्पियो है, जिसका नंबर BR 33 M 4992 बताया जाता है. परिवार के लोगों के लिए यह सिर्फ एक वाहन नहीं बल्कि उस मेहनत, उम्मीद और संघर्ष की पहचान है. जिसने वैभव को आज इस मुकाम तक पहुंचाया. हर खरोंच और हर सफर आज एक सफलता की कहानी सुनाता है.

समस्तीपुर वैभव जब घर आने वाला था तभी उनके परिवार वाले ने घर को एक नया रूप दे दिया था, जो की चमचमाती हुई घर दिखाई दे रही है. बताते चले की समस्तीपुर की गलियों से निकलकर आज वैभव सूर्यवंशी भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर हैं. बहुत जल्द वह अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले में भारत के लिए मैदान पर उतर सकते हैं और पूरी दुनिया उनके खेल को देखेगी. जिस खिलाड़ी ने कभी इसी पुरानी स्कॉर्पियो में बैठकर पटना जाकर अपने सपनों को सींचा था, वही आज देश के करोड़ों लोगों की उम्मीद बन चुका है. समस्तीपुर के लोग गर्व से कहते हैं कि यह सिर्फ वैभव की सफलता नहीं, बल्कि उस संघर्ष की जीत है जो एक परिवार ने अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए किया. कभी पटना तक का सफर तय करने वाली यह गाड़ी आज एक ऐसी कहानी बन चुकी है जिसे सुनकर हर युवा को मेहनत करने की प्रेरणा मिल सकती है.

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