गेहूं और जौ की फसल में ऐसे दूर करें खरपतरवार, उत्पादन में होगी बढ़ोतरी, रोगों का भी हो जाएगा पुख्ता इलाज

Last Updated:December 27, 2025, 06:47 IST
Agriculture Tips: गेहूं और जौ की फसल में खरपतवार और दीमक किसानों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है. बुवाई के 30-40 दिन बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार तेजी से उभरते हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होती है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार समय पर 2,4-डी एस्टर या मेटासल्फुरान मिथाइल का सही मात्रा में छिड़काव करने से खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है और फसल सुरक्षित रहती है.
गेहूं की फसल में खरपतवार एक गंभीर समस्या होती है. यह पौधों के पोषक तत्व, पानी और धूप को प्रभावित करती है. बुवाई के लगभग 30 से 35 दिन बाद खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार उभरने लगते हैं. ऐसे समय पर किसानों को थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए 2 से 4 डी एस्टर 38 प्रतिशत ई.सी. या मेटासल्फुरान मिथाइल का प्रयोग करना फायदेमंद रहता है.

किसान इसमें मेटासल्फुरान मिथाइल 4 ग्राम मेटासल्फुरान मिथाइल (सक्रिय तत्व) को 500 से 700 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर समान रूप से छिड़काव करना चाहिए. इस दौरान किसान ध्यान रखे कि छिड़काव करते समय मौसम शांत होना चाहिए, जिससे दवा का प्रभाव अधिक समय तक बना रहे. इसके अलावा दवा के छिड़काव के बाद अधिक सिंचाई नहीं करनी चाहिए. इससे पूरी तरह छिड़काव की गई दवा का कोई असर नहीं होगा.

गेहूं के अलावा जौ की फसल में भी चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार उपज को नुकसान पहुंचाते हैं. इन खरपतवारों को नष्ट करने के लिए फसल की बुवाई के लगभग 40 दिन बाद निंदानाशी का प्रयोग किया जा सकता है. इसके लिए प्रति हेक्टेयर आधा किलोग्राम 2 से 4 डी एस्टर साल्ट 38 प्रतिशत ई.सी. का चयन करना चाहिए, जिससे खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके.
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इसके अलावा, जौ की फसल में उपयोग किए जाने वाले 2 से 4 डी एस्टर साल्ट को 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. इस दौरान यह ध्यान रखना जरूरी है कि दवा पूरे खेत में समान रूप से पहुंचे. सही मात्रा और समय पर छिड़काव करने से फसल को नुकसान नहीं होता और खरपतवार पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं, जिससे जौ की पैदावार बेहतर होती है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि गेहूं और जौ की खड़ी फसल में दीमक एक गंभीर कीट समस्या होती है, जो जड़ों को नुकसान पहुंचाकर पौधों को कमजोर कर देती है. दीमक नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफोस 20 प्रतिशत ई.सी. का प्रयोग किया जाता है. इसके लिए 4 लीटर दवा को 80 से 100 किलोग्राम सूखी मिट्टी में अच्छी तरह मिलाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि मिट्टी में मिलाए गए क्लोरपाइरीफोस को एक हेक्टेयर क्षेत्र में समान रूप से फैलाना चाहिए. इसके बाद हल्की सिंचाई कर सकते हैं. जिससे दवा मिट्टी में अच्छी तरह समा जाए और दीमक पर प्रभावी नियंत्रण हो सके. समय पर यह उपाय अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है और पौधों के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
First Published :
December 27, 2025, 06:47 IST
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गेहूं और जौ की फसल में ऐसे दूर करें खरपतरवार, रोगों का भी हो जाएगा इलाज



