Moringa Farming Benefits | सहजन की खेती से लाखों की कमाई | Moringa Farming Profitability and Success Story Jaipur

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सहजन की खेती? कम पानी में राजस्थान के किसानों के लिए बना कुबेर का खजाना
Last Updated:May 14, 2026, 12:54 IST
Moringa Farming Benefits and Profit: राजस्थान के किसानों के लिए सहजन (मोरिंगा) की खेती वरदान साबित हो रही है. कम पानी और शुष्क जलवायु में उगने वाली इस फसल से किसान सालाना लाखों कमा रहे हैं. जयपुर के किसान डॉ. बीसी जाट ने बताया कि फलियों के साथ-साथ अब पत्तियों के पाउडर की भारी मांग है. पत्तियों को सुखाकर पाउडर बनाने की प्रक्रिया आसान है और इसे हेल्थ सप्लीमेंट के रूप में विदेशों तक बेचा जा रहा है. यह कम लागत में अधिक मुनाफे वाली आधुनिक खेती का बेहतरीन उदाहरण है.
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Jaipur: राजस्थान जैसे शुष्क और कम वर्षा वाले प्रदेशों में कृषि हमेशा से एक कठिन चुनौती रही है. पानी की भारी कमी के कारण यहाँ के किसान अब पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं या बाजरे के बजाय ऐसी फसलों को अपना रहे हैं जो कम संसाधनों में अधिक उत्पादन दे सकें. इस श्रेणी में ‘मोरिंगा’ या ‘सहजन’ एक क्रांतिकारी फसल बनकर उभरी है. पिछले कुछ वर्षों में सहजन की वैश्विक मांग में जबरदस्त उछाल आया है. अब यह सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल हेल्थ और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है.
आमतौर पर लोग सहजन की फलियों और फूलों को ही उपयोगी मानते थे, लेकिन आधुनिक समय में इसकी पत्तियों ने बाजार में तहलका मचा रखा है. मोरिंगा की पत्तियों में मल्टीविटामिन्स और खनिज प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिस कारण इसका पाउडर हेल्थ सप्लीमेंट के रूप में विदेशों में भी खूब बिक रहा है. खास बात यह है कि फलियां और फूल साल में केवल एक बार ही आय देते हैं, लेकिन पत्तियों की कटाई साल में तीन से चार बार की जा सकती है. इससे किसानों के पास साल भर नकदी (Cash) प्रवाह बना रहता है.
जयपुर के डॉ. बीसी जाट ने पेश की सफलता की मिसालजयपुर जिले के चोमू स्थित रामपुर गांव के प्रगतिशील किसान डॉ. बीसी जाट इस बदलाव के जीते-जागते उदाहरण हैं. उन्होंने बताया कि राजस्थान की कठोर जलवायु सहजन के लिए सबसे उपयुक्त है. डॉ. जाट ने बहुत कम पानी और सीमित जल संसाधनों के साथ इसकी शुरुआत की थी और आज वे एक बड़े भूभाग पर सहजन की खेती कर रहे हैं. उनकी सफलता का राज यह है कि उन्होंने वर्षा जल संचयन के जरिए पौधों को तैयार किया है. डॉ. जाट के अनुसार, उन्होंने हाल ही में 150 से 200 नए पौधों की बुवाई की है, जिससे उनकी सालाना आय लाखों में पहुँच गई है.
प्रोसेसिंग यूनिट से बढ़ाएं अपना मुनाफाडॉ. बीसी जाट अन्य किसानों को भी सलाह देते हैं कि यदि उनके पास 200 से अधिक पौधे हैं, तो उन्हें खुद की एक छोटी प्रोसेसिंग यूनिट लगानी चाहिए. पत्तियों को सुखाने और पाउडर बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है. पत्तियों को पहले 24 घंटे धूप में और फिर 24 घंटे छाया में सुखाया जाता है. इसके बाद इन्हें पीसकर शुद्ध और बिना किसी मिलावट वाला प्राकृतिक पाउडर तैयार किया जाता है. इस पाउडर की कीमत बाजार में कच्ची पत्तियों के मुकाबले कई गुना ज्यादा मिलती है.
ग्लोबल मार्केट में मोरिंगा का दबदबाबाजार में मोरिंगा पाउडर की मांग लगातार बढ़ रही है. आयुर्वेद, न्यूट्रिशन और कॉस्मेटिक कंपनियां इसे ‘सुपरफूड’ मान रही हैं. प्राकृतिक उत्पादों की ओर बढ़ते रुझान के कारण मोरिंगा की खेती राजस्थान के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह खेती न केवल पानी बचाती है, बल्कि बंजर पड़ी जमीन को भी सोना उगलने लायक बना देती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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