मृत्युभोज में नहीं बने घी के मालपुए, 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद! पंचों के तुगलकी फरमान से मचा बवाल

Last Updated:June 25, 2026, 15:29 IST
Sirohi Social Boycott Case: सिरोही जिले के मंडवारिया गांव में समाज के कुछ पंचों के कथित तुगलकी फरमान ने 43 परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. आरोप है कि एक मृत्युभोज में घी के मालपुआ नहीं बनाए जाने से नाराज पंचों ने इन परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया. पीड़ितों का कहना है कि उन्हें समाज से अलग कर दिया गया है और हुक्का-पानी भी बंद कर दिया गया है. परिवारों ने पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है. इसके बाद वे न्याय की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. मामला अब प्रशासनिक हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई की मांग के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
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सिरोही. राजस्थान के सिरोही जिले के मंडवारिया गांव में समाज के कुछ पंचों का कथित तुगलकी फरमान चर्चा का विषय बना हुआ है. आरोप है कि एक परिवार द्वारा मृत्युभोज में परंपरा के अनुसार घी के मालपुआ नहीं बनाए जाने पर समाज के पंचों ने 43 परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया. इतना ही नहीं, इन परिवारों का कथित रूप से हुक्का-पानी भी बंद कर दिया गया, जिससे उनके सामने सामाजिक और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. पीड़ित परिवारों ने मामले में न्याय की मांग करते हुए प्रशासन और पुलिस से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है.
बताया जा रहा है कि मंडवारिया गांव में एक परिवार में मृत्युभोज का आयोजन किया गया था. आरोप है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार ने मृत्युभोज में घी के मालपुआ नहीं बनवाए और साधारण भोजन की व्यवस्था की. इसी बात से नाराज होकर समाज के एक दर्जन से अधिक पंचों ने बैठक कर कथित तौर पर 43 परिवारों को समाज से बाहर करने का फैसला सुना दिया. पीड़ितों का कहना है कि इस फैसले के बाद गांव में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें सामाजिक गतिविधियों से दूर रखा जा रहा है.
सामाजिक बहिष्कार से बढ़ी मुश्किलें
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि बहिष्कार के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई है. परिवारों का कहना है कि गांव में लोग उनसे बातचीत तक नहीं कर रहे हैं. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें मजदूरी और अन्य काम भी नहीं दिए जा रहे, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. महिलाओं और बच्चों को भी इस सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है. पीड़ितों का कहना है कि केवल एक परंपरा का पालन नहीं करने पर पूरे परिवारों को सजा देना अन्यायपूर्ण है.
पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
पीड़ित परिवारों ने इस मामले को लेकर स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है. उनका आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. इसके बाद सभी प्रभावित परिवार न्याय की मांग को लेकर सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की. पीड़ितों ने समाज के पंचों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.
कानून में सामाजिक बहिष्कार अपराध
भारतीय कानून के तहत सामाजिक बहिष्कार दंडनीय अपराध है. राजस्थान सामाजिक बहिष्कार निषेध अधिनियम, 2019 के तहत किसी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना गैरकानूनी माना गया है और दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान भी है. ऐसे में अब इस मामले को लेकर प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल सभी की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Sirohi,Rajasthan



