Goner Jhula Mela: 450 साल पुरानी परंपरा, झूले में विराजे जगदीशजी, सिर्फ 3 फीट की दूरी से होंगे दर्शन

जयपुर. राजस्थान की धार्मिक परंपराओं में कुछ आयोजन ऐसे हैं, जिनमें सदियों पुरानी आस्था और रीति-रिवाज की परंपरा जीवंत दिखाई देती है. जयपुर के गोनेर स्थित श्रीलक्ष्मीजगदीश महाराज मंदिर में भी एक ऐसी ही परम्परा निभाई जाती है. आज श्रावण शुक्ल एकादशी के अवसर पर 450 साल से अधिक पुरानी झूलों के मेले की परंपरा निभाई जा रही है. इस मेले की सबसे खास बात यह है कि साल में एक बार भगवान जगदीशजी गर्भगृह से बाहर आकर झूले में विराजमान होते हैं और भक्तों को बेहद करीब से दर्शन देते हैं.
गोनेर के इस प्राचीन मंदिर में झूलों का मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है. यह पीढ़ियों से चली आ रही एक ऐसी परंपरा है, जिसका भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं. श्रावण शुक्ल एकादशी से भाद्रपद कृष्ण द्वितीया तक भगवान जगदीशजी माता लक्ष्मीजी के साथ काष्ठ से निर्मित जगमोहन झूले के मंडप में विराजमान रहते हैं. इसी परंपरा के तहत आज मेले के अवसर पर ठाकुरजी गर्भगृह से बाहर झूले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. खास बात यह है कि श्रद्धालु भगवान के महज तीन फीट की दूरी से दर्शन कर सकेंगे.
450 साल से पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही परंपरा
झूलों के मेले की परंपरा को गोनेर की धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर बहुत विशेष होता है. साल में केवल एक बार भगवान के झूले में विराजमान होने की परंपरा का हिस्सा बनने और उनके निकट दर्शन करने का अवसर मिलता है. मंदिर महंत हनुमान दास के अनुसार, यह परंपरा 450 साल से भी अधिक समय से चली आ रही है. यही वजह है कि आज भी जयपुर के अलावा राजस्थान के अलग-अलग जिलों और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोनेर पहुंचते हैं.
खीर और मालपुए का लगेगा भोग
झूलों के मेले में भगवान जगदीशजी को विशेष रूप से खीर और मालपुए का भोग लगाया गया है. मेले के दिन दर्शन का समय भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ाया गया है. आज सुबह 5:15 बजे से रात 9 बजे तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे. सामान्य दिनों में दर्शन सुबह 7:15 बजे से शुरू होते हैं. यानी मेले के दिन भक्तों को करीब दो घंटे अतिरिक्त दर्शन का समय मिलेगा. श्रीलक्ष्मीजगदीश महाराज मंदिर में साल में दो प्रमुख वार्षिक मेले आयोजित होते हैं. पहला मेला श्रावण शुक्ल एकादशी पर लगने वाला झूलों का मेला है, जबकि दूसरा चैत्र कृष्ण द्वितीया के अवसर पर आयोजित होता है.
श्रद्धालुओं की भीड़ के लिए विशेष व्यवस्था
मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं. भीड़ नियंत्रण के लिए घुमावदार रेलिंग लगाई गई है. पुलिस के साथ बाउंसर और स्काउट-गाइड भी तैनात रहेंगे. श्रद्धालुओं के लिए मुख्य द्वार से प्रवेश और पीछे की ओर से निकासी की व्यवस्था रहेगी. चिकित्सा सुविधा, एंबुलेंस, पेयजल, बिजली और बारिश से बचाव के लिए टीन शेड व तिरपाल की व्यवस्था भी की गई है.
500 वर्ष पहले स्वयं प्रकट हुई थी प्रतिमा
जयपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर गोनेर कस्बे में स्थित श्री लक्ष्मी जगदीश मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध स्वयंभू तीर्थस्थल है. मान्याताओं के अनुसार, यहां भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की मूर्ति लगभग 500 वर्ष पुरानी और स्वयं प्रकट हुई थी. यहां खासतौर पर भगवान को मालपुओं का भोग लगाने की परम्परा है. जयपुर रेलवे स्टेशन या केंद्रीय बस स्टैंड से टैक्सी, निजी वाहन या स्थानीय परिवहन के जरिए आसानी से गोनेर पहुँचा जा सकता है.



